UP Politics: तीन विधायकों पर सपा का कड़ा एक्शन, बाकी बागियों को क्यों दी गई मोहलत? जानिए वजह

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमी आ गई है। समाजवादी पार्टी ने अपने तीन विधायकों को पार्टी से बाहर निकाल दिया है। जिन तीन विधायकों पर गाज गिरी है उनमें अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और मनोज कुमार पांडेय का नाम शामिल है। ये वही विधायक हैं जिन्होंने पिछले साल राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से हटकर वोटिंग की थी।

इस क्रॉस वोटिंग ने सपा को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। पार्टी उम्मीदवार आलोक रंजन की हार की एक बड़ी वजह इन बागी विधायकों की भूमिका मानी गई थी। वहीं बीजेपी को इसका सीधा फायदा मिला। उसी समय इस मामले को समाजवादी पार्टी के भीतर एक बड़ी गद्दारी के रूप में देखा गया।

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अब सपा ने स्पष्ट कर दिया है कि इन तीनों विधायकों को 'अनुग्रह अवधि' के दौरान सुधरने का मौका दिया गया था। लेकिन जब पार्टी को इनके व्यवहार में कोई बदलाव नजर नहीं आया तो उन्हें निष्कासित कर दिया गया। पार्टी नेतृत्व ने दो टूक कहा है जो पार्टी लाइन से हटेगा, उसके लिए जगह नहीं बचेगी।

क्यों हुई सिर्फ तीन पर कार्रवाई, बाकी बागी बचे क्यों?

सवाल उठता है कि जब आठ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी तो सजा सिर्फ तीन को ही क्यों मिली? माना जा रहा है कि बाकी पांच बागी विधायकों का रवैया फिलहाल अनुशासित रहा विरोधी दल की तरफ वे ज्‍यादा सक्रिय नहीं दिखे। इसलिए उनके खिलाफ सपा ने कोई कार्रवाई नहीं की।

सपा ने यह भी बताया कि पार्टी की मूल विचारधारा के खिलाफ काम करने वालों को भविष्य में भी कोई स्थान नहीं मिलेगा। यह संदेश सिर्फ इन तीन विधायकों को ही नहीं बल्कि बाकी असंतुष्टों को भी दिया गया है। पार्टी अब अनुशासन के मामले में सख्त लाइन पर चल रही है।

भाजपा से नज़दीकियों पर गहराया शक

निष्कासित विधायकों की हालिया गतिविधियां भी इस कार्रवाई के पीछे की एक बड़ी वजह मानी जा रही हैं। कई मौकों पर ये नेता बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ नजर आए, जिससे उनके राजनीतिक इरादों पर सवाल उठने लगे थे। पार्टी के भीतर यह साफ देखा जा रहा था कि ये नेता अब सपा की विचारधारा से अलग राह पर हैं।

बीजेपी के साथ लगातार बढ़ती नजदीकियों के कारण इन पर पार्टी में अविश्वास गहराता गया। क्रॉस वोटिंग की घटना के बाद भी ये नेता कभी सार्वजनिक रूप से पार्टी के प्रति पश्चाताप नहीं जताते दिखे। पार्टी नेतृत्व ने इस असहयोग और खुले विद्रोह को बर्दाश्त न करने का फैसला किया।

समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक कड़ा बयान जारी कर इस कार्रवाई की जानकारी दी। बयान में कहा गया कि इन विधायकों की "सांप्रदायिक, किसान विरोधी, महिला विरोधी और पीडीए विरोधी" सोच अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सपा के मुताबिक इन विधायकों को पार्टी ने समय दिया था कि वे अपने व्यवहार में बदलाव लाएं। लेकिन जब ऐसा कुछ नहीं हुआ, तो पार्टी ने जनहित को ध्यान में रखते हुए उन्हें बाहर करने का फैसला लिया। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सपा विचारधारा से समझौता नहीं करेगी।

पार्टी के भीतर अब और सख्ती की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी अब बाकी बागी विधायकों पर भी नजर रखे हुए है। अगर उनके व्यवहार में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कठोर कदम उठाए जाएंगे। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि अनुशासन और विचारधारा से बड़ा कोई नहीं है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव की रणनीति अब साफ दिख रही है। वफादारी को प्राथमिकता और बगावत के लिए जीरो टॉलरेंस। आने वाले समय में पार्टी संगठन को और मजबूत करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसका असर पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह पड़ेगा।

2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी समाजवादी पार्टी फिलहाल किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। ऐसे में यह निष्कासन केवल आंतरिक अनुशासन नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है कि जो साथ नहीं चलेगा, वो बाहर जाएगा।

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