यूपी चुनाव में मतदान के तुरंत बाद एग्जिट पोल प्रकाशित करने वाले Jagran.com के संपादक को मिली जमानत
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 ए के अनुसार मतदान संपन्न हो जाने से पहले कोई भी एग्जिट पोल प्रकाशित या प्रसारित नहीं कर सकता।
नई दिल्ली। 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सख्त भारतीय निर्वाचन आयोग के आदेश पर समाचार पत्र दैनिक जागरण की वेबसाइट जागरण डॉट कॉम के संपादक शशांक शेखर त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिा गया। आयोग के आदेश के बाद शेखर समेत दैनिक जागरण अखबार के प्रबंध संपादक और एग्जिट पोल आयोजित करने वाली संस्था रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (RDI) नामक संस्था के खिलाफ आचार संहिता का उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया था। चुनाव आयोग ने चुनाव अधिकारियों से दैनिक जागरण के खिलाफ 15 जिलों में एफआईआर दर्ज कराने को कहा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक दैनिक जागरण की वेबसाइट पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान के तुरंत बाद एग्जिट पोल प्रकाशित कर दिया गया। इस मामले की जानकारी होते ही आयोग ने समाचार पत्र के प्रबंध संपादक,संपादक और (RDI) के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। आयोग ने जागरण को धारा 188 के उल्लंघन का आरोपी पाया है, इसके अलावा सेक्शन 126 बी का भी आरोपी पाया है।
गाजियाबाद पुलिस ने किया अरेस्ट
इसके बाद शशांक शेखर को उत्तर प्रदेश स्थित गाजियाबाद की कविनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद मंगलवार दोपहर उन्हें जमानत भी मिल गई। बता दें कि उत्तर प्रदेश में पहले चरण का मतदान 11 जनवरी को हुआ था। इस दौरान पश्चिमी यूपी की 73 सीटों पर मतदान किए गए थे। जागरण डॉट कॉम ने इन्हीं सीटों के एग्जिट पोल वेबसाइट पर प्रकाशित किए थे। हालांकि इस मामले पर दैनिक जागरण की ओर से सफाई भी दी गई है।
जागरण की ओर से सफाई पर कहा गया है कि इंग्लिश प्लेटफॉर्म के अलावा एग्जिट पोल से जुड़ी स्टोरी दैनिक जागरण अखबार में प्रकाशित नहीं की गई। इंग्लिश वेबसाइट पर एग्जिट पोल से जुड़ी स्टोरी अनजाने में प्रकाशित की गई थी। इस भूल का तुंरत सुधार किया गया। इसकी जानकारी होते ही तुंरत संबंधित स्टोरी को हटा दिया गया था।
लेकिन आयोग रहा आदेश पर कायम
हालांकि इस सफाई के बाद भी आयोग अपने आदेश पर कायम रहा। इसके बाद प्रदेश के 15 जिलों में दैनिक जागरण और आरडीआई के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। आयोग के अदेशानुसार, 4 फरवरी की सुबह 7 बजे से 8 मार्च की शाम 5.30 बजे तक कोई एग्जिट पोल नहीं कर सकता। साथ ही इनके नतीजे अखबार पर प्रकाशित या टीवी पर प्रसारित नहीं कर सकता। इस मामले में दोषी पाए जाने पर दो साल की कैद या जुर्माना या फिर दोनों कीी सजा का प्रावधान है।
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