UP Nikay Chunav 2023: BJP का मुस्लिम कनेक्ट, Rampur-Tanda में पकड़ाया नगर पंचायत अध्यक्ष का टिकट

यूपी में बीजेपी ने बहुत पहले ही पसमांदा मुसलमानों को साधने की तैयारी शुरू कर दी थी। बीजेपी अब तक चार मुस्लिम चेहरों को एमएलसी का टिकट दे चुकी है। बीजेपी ने दो मुस्लिम उम्मीदवारों को निकाय चुनाव में उतारा है।

योगी आदित्यनाथ

Muslims in two Nagar Palika Parishad foe BJP: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुस्लिम समुदाय को साधने की दिशा में एक कदम और बढ़ा दिया है। पसमांदा मुस्लिम के बीच अपनी पैठ बनाने में जुटी बीजेपी ने पहली बार दो मुस्लिम चेहरों को नगर पंचायत चेयरमैन का टिकट दिया है। संगठन के इस कदम को बीजेपी के 2024 से पहले मुस्लिम कनेक्ट की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी ने जिन दो सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को जगह दी है उसमें सपा के वरिष्ठ नेता आजम का गढ़ रामपुर और बीएसपी के गढ़ अंबेडकरनगर की टांडा सीट शामिल है।

टांडा से मेहनाज जहान, रामपुर से डॉ मुसरेट मुजीब को टिकट

बीजेपी की तरफ से जारी सूची के मुताबिक, पार्टी ने टांडा से मेहनाज जहान और रामपुर से डॉ मुसरेट मुजीब को मैदान में उतारने का फैसला किया है। बीजेपी ने इससे पहले रामपुर ही क्या पूरे यूपी में नगर पंचायत की सीट पर कभी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा था। पार्टी के नेताओं की माने तो 2017 के निकाय चुनाव में निर्दलीय के रूप में टांडा सीट जीतने वाली मेहनाज़ को हाल ही में भाजपा में शामिल किया गया था। आंकड़े बताते हैं कि 2017 में बीजेपी ने इस सीट पर जिस उम्मीदवार को उतारा था वह अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई थीं।

पूर्व बसपा नेता मुजीब की पत्नी हैं मुजीब

डॉक्टर मुजीब बसपा के पूर्व नेता डॉक्टर तनवीर अहमद की पत्नी हैं। ये अपने लिए टिकट की मांग करती रही हैं। लेकिन सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा ने उनकी पत्नी को टिकट दे दिया। 2017 में भाजपा ने रामपुर एनपीपी से स्थानीय भाजपा नेता भारत भूषण गुप्ता की पत्नी दीपा गुप्ता को मैदान में उतारा था। दीपा हालांकि समाजवादी पार्टी की फातिमा जबी से हार गईं थी। 2019 में आजम द्वारा लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद सीट खाली होने के बाद भारत ने खुद रामपुर उपचुनाव लड़ा था। भूषण हालांकि सपा उम्मीदवार और आजम की पत्नी तज़ीन फातिमा से हार गए थे।

मुस्लिम को टिकट बीजेपी की रणनीति का हिस्सा

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो बीजेपी का यह कदम विपक्ष को काउंटर करने की एक रणनीति का ही हिस्सा है। साथ ही इस बात की ओर भी इशारा करता है कि बीजेपी किस तरह से इस समुदाय के भीतर पैठ बनाने को लालायित है। भाजपा ने हाल के उपचुनावों के दौरान हिंदू समुदाय के उम्मीदवारों को मैदान में उतारते हुए रामपुर को भेदने में कामयाबी हासिल की थी। रामपुर में हुए लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी ने एक ओबीसी नेता घनश्याम लोधी को मैदान में उतारा था जो जीतन में कामयाब रहे थे।

रामपुर लोकसभा और स्वार विधानसभा उपचुनाव जीत चुकी है बीजेपी

लोकसभा की तरह ही बीजेपी ने रामपुर विधानसभा उपचुनाव में भी भाजपा के आकाश सक्सेना ने सपा के उम्मीदवार राजा को हराया था। अभद्र भाषा के एक मामले में आजम की सजा के बाद आजम की सदस्यता खो देने के बाद रामपुर विधानसभा उपचुनाव हुआ था।

मोदी की मंशा के अनुसार काम कर रही बीजेपी

दरअसल, अगस्त 2022 में हैदराबाद अधिवेशन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े पसमांदा मुसलमानों तक पहुँचने की आवश्यकता पर जोर देने के बाद भाजपा मुसलमानों तक पहुंचने में जुटी है। बीजेपी तब से 2024 के लोकसभा चुनावों में मुसलमानों को लुभाने के लिए 'अल्पसंख्यक सम्मेलनों' का आयोजन भी कर रही है। बीजेपी अपनी इसी रणनीति के तहत अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति को विधान परिषद में भेज चुकी है जबकि चार मुस्लिम चहरे पहले ही बीजेपी की तरफ से सदन में मौजूद थे।

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