यूपी: शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति मामले में योगी सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम

योगी सरकार ने शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति करने के मामले में दो जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। अधिकारियों के निलंबन की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।

मिर्जापुर। योगी सरकार ने शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति करने के मामले में मिर्जापुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) मनभरन राजभर और सोनभद्र के बेसिक शिक्षा अधिकारी अमरनाथ सिंह को निलंबित कर दिया है। यह जानकारी बेसिक शिक्षा सचिव अजय कुमार सिंह ने दी। मनभरन राजभर ने सोनभद्र में बीएसए रहते हुए सहायक अध्यापकों की पहली और दूसरी काउंसलिंग होने के बाद कई अभ्यर्थियों को बिना आनलाइन आवेदन और काउंसलिंग के फर्जी तरीके नियुक्ति कर दी थी।

यूपी: शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति मामले में योगी सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम

शिक्षकों के चयन में गड़बड़ी दोनों बीएसए के गले की बनी फांस
आखिरकार बीएसए मनभरन राम राजभर और सोनभद्र के बीएसए अमरनाथ सिंह को शिक्षकों के चयन में गड़बड़ी के आरोप में सूबे की भाजपा सरकार ने निलंबित कर दिया। उनके निलंबन की खबर मिलते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। यहीं नहीं सपा शासनकाल में गड़बड़ी करने वाले अन्य अफसरों को भी अब दण्डित किए जाने की चिंता सता रही है। ये भी पढे़ं- योगी के मंत्री को बच्चे ने कराया कड़वे सच का सामना, देखें वीडियो

सोनभद्र में तैनाती के दौरान बगैर आवेदन के ही शिक्षकों की कर ली थी नियुक्ति
सूबे की तत्कालीन सपा सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को पूरा कराने के लिए 72 हजार 800 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अभ्यार्थियों से वर्ष-2015 में आवेदन मांगा था। बड़ी संख्या में अभ्यार्थियों ने आनलाइन आवेदन किए थे। आरोप है कि मिर्जापुर के तत्कालीन बीएसए अमरनाथ सिंह व सोनभद्र के बीएसए मनभरन राम राजभर ने ऐसे अभ्यार्थियों को भी चयन कर लिया जिन्होंने आनलाइन आवेदन भी नहीं किए थे। ऐसे आवेदकों की काउसिलिंग भी नहीं करायी गयी और दोनों बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने अपनी मनपसंद के अभ्यार्थियों को प्राथमिक विद्यालयों में बतौर शिक्षक नियुक्त कर दिया। ये भी पढे़ं- यूपी की शिक्षा में बड़े सुधार की तैयारी में योगी सरकार, लोगों से मांगी राय

बीते वर्ष हुआ था खुलासा
इस मामले में सबसे पहले खुलासा वर्ष-2016 में सोनभद्र में हुआ और तत्कालीन डीएम के निर्देश पर बीएसए मनभरनराम राजभर के खिलाफ रपट भी दर्ज करा दी गयी, पर सत्ता के करीब होने के कारण रपट दर्ज कराए जाने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं की गयी और उनका स्थानांतरण मिर्जापुर के बीएसए पद पर कर दिया गया। यहां के बीएसए अमरनाथ सिंह को सोनभद्र भेज दिया गया।

आरोप है कि मिर्जापुर के बीएसए रहे अमरनाथ सिंह ने भी मनभरन राम राजभर की तरह ही कई अभ्यार्थियों की बगैर आवेदन और काउसिलिंग के ही नियुक्ति कर सोनभद्र चले गए। यहां तो इस मामले का खुलासा नहीं हुआ पर शासनस्तर पर इस मामले की उसी समय जांच शुरु करा दी गयी थी। शासन से जांच पूरी होते ही आखिरकार दोनों बीएसए निलंबित कर दिए। इन्हें अब इस मामले में जेल भी जाना पड़ सकता है।

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