Sharda Sinha Death: शारदा सिन्हा को गोरखपुर में दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि, याद कर रो पड़े लोग
Sharda Sinha News In Hindi Gorakhpur Uttar Pradesh: 'बिहार कोकिला' शारदा सिन्हा ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। अब सिर्फ और सिर्फ उनके गीत और उनकी यादें ही शेष हैं। मंगलवार रात एम्स में उनकी मौत के बाद से ही उनके प्रशंसकों के भावपूर्ण पोस्ट लगातार आ रहे हैं। सभी उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी क्रम में सीएम योगी के शहर गोरखपुर में भी शोकसभा कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी गई। भोजपुरी एसोसियन ऑफ इंडिया यानी 'भाई ' ने शारदा सिन्हा को खास अंदाज में याद किया और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि सभा का आयोजन एस एस एकेडमी गोरखपुर में किया गया। इस दौरान वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने लोगों से खास बातचीत की।
भोजपुरी जगत की एक अपूरणीय क्षति है
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भोजपुरी असोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि लोक गायिका पद्मश्री शारदा सिन्हा का निधन भोजपुरी जगत की एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने पूरी दुनियाँ में भोजपुरी गीतों को सम्मान दिलाया। यह हम भोजपुरियों के लिये गर्व की बात है।

परंपरा को निभाइए तो दुनिया पूजती है
भाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि शारदा सिन्हा जी ने कभी भी मंच पर उछल कूद या उल जलूल गीत नहीं गाया जिसका परिणाम आज सारी दुनियाँ देख रही है कि उनका कितना सम्मान हो रहा है । उन्होंने यह साबित कर दिया कि अच्छे गीत गाना और अपनी परंपरा को निभाना पूजनीय होता है। आज विश्व में उनके चाहने वाले हैं। सभी की आंखे नम हैं।
मरते दम तक किया अभ्यास
राकेश श्रीवास्तव कहते हैं कि शारदा सिन्हा जी ने जाते जाते भी लोगों को बड़ा संदेश दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि अभ्यास सदैव जारी रहना चाहिए। अंतिम समय में भी अस्पताल में उन्होंने अपना अभ्यास नहीं छोड़ा।
ऐसी रही आखिरी मुलाकात
राकेश श्रीवास्तव बताते हैं कि उनसे 1995 से ही मिलना जुलना होता था। 2019 में वो गोरखपुर महोत्सव में आईं थी। यही उनसे आखिरी मुलाकात थी। वह बेहद सरल और शालीन महिला थीं। लेकिन उनका व्यक्तित्व व्यापक था।
शारदा सिन्हा को याद कर जब रो पड़े शिवेंद्र
भोजपुरी एसोसियन ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय संयोजक शिवेंद्र पांडेय शारदा सिन्हा के बारे में बात करने के दौरान रो पड़े। उनकी आंखों से आंसू बहने लगे जो रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। किसी तरह उन्होंने अपनी बात रखी और कहा आज मन बहुत द्रवित है। कुछ लोगों ने व्यावसायिक लाभ के चक्कर में देव भाषा भोजपुरी को बदनाम कर दिया था। शारदा सिन्हा ने इस भाषा को देव भाषा का रूप दिया। उनका जाना भोजपुरी समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।
उनकी सहजता उनके बड़प्पन को दर्शा रही थी
भोजपुरी एसोसियन ऑफ इंडिया के संरक्षक कनक हरि अग्रवाल ने कहा कि गोरखपुर महोत्सव में उनसे मिलने का मौका मिला। मिलने के दौरान उनकी सहजता देखने योग्य थी। इतना बड़ा कलाकार और इतनी सहजता, मै तो स्तब्ध था। उनकी सौम्यता अद्भुत थी। उनका जाना भोजपुरी समाज और कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
भाई के क्षेत्रीय निदेशक डॉ रूप कुमार बनर्जी, ने कहा कि शारदा सिन्हा जी ने यह संदेश दिया है कि कलाकार को अंतिम समय तक अपना रियाज़ नहीं छोड़ना चाहिये।
इस अवसर पर संरक्षक डॉ सुरेश, सुधा मोदी, कनक हरि अग्रवाल , शिवेंद्र पांडेय , राकेश मोहन , लोक गायिका, स्वीटी सिंह , नीतू मोहन , लक्ष्मी गुप्ता , सहित तमाम लोग उपस्थित थे ।












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