मुलायम के घर में सेंध लगाने से BJP को कितना फायदा ? अबतक 3 तोड़े, अगला इनका नाम

लखनऊ, 20 जनवरी: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपने मुख्य विरोधी समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव परिवार से ही नेताओं को तोड़कर चुनावों से पहले बहुत बड़ा राजनीतिक बदला लिया है। चुनावों में इसका असर क्या होता है, यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन फिलहाल जो धारणा बन रही है उसमें भाजपा ने पिछले हफ्ते खाई चोट के बदले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को सियासी तौर पर गहरा झटका जरूर दिया है। 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में अखिलेश यादव से उनके चाचा शिवपाल यादव रूठ कर अलग हो गए थे और इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा था। इस बार उनके चाचा तो उनके प्रति समर्पित होते दिख रहे हैं, लेकिन करीबी रिश्तेदारों ने ही बीजेपी का दामन थामकर उन्हें बहुत ही बड़ी चुनौती दे डाली है।

मुलायम परिवार से दो महिला और एक पुरुष सदस्य भाजपा में आए

मुलायम परिवार से दो महिला और एक पुरुष सदस्य भाजपा में आए

सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव विरोधी बीजेपी में शामिल होने वाली उनके परिवार की अकेली सदस्य नहीं हैं। वह मुलायम परिवार की तीसरी सदस्य और दूसरी महिला हैं, जिन्होंने साइकिल की सवारी करने की जगह कमल थामने में भरोसा जताया है। यादव परिवार के लिए यह इसलिए अंदर की चोट है, क्योंकि अब बीजेपी कह रही है कि इस परिवार की बहू और बेटी दोनों का अपने परिवार की विचारधारा से मोह भंग हो चुका है। मुलायम की एक भतीजी संध्या यादव 2017 में ही भाजपा में आ चुकी थीं। वह मुलायम के बड़े भाई अभय राम यादव की बेटी और पूर्व सपा सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन हैं। इसके अलावा यादव परिवार के एक पुरुष रिश्तेदार हरिओम यादव भी हाल ही में भाजपा की धारा में बहने का फैसला कर चुके हैं। हरिओम यादव फिरोजाबाद की सिरसागंज सीट से एमएलए हैं और मुलायम के एक चचेरे पोते के ससुर भी लगते हैं। कुछ ही हफ्ते पहले वो भी बीजेपी में आए हैं।

मुलायम परिवार में 2017 वाली स्थिति बनी

मुलायम परिवार में 2017 वाली स्थिति बनी

मुलायम के रिश्तेदारों को इस तरह से पार्टी में शामिल करने के पीछे बीजेपी की रणनीति को समझने के लिए 2017 के विधानसभा चुनावों का रुख करना होगा। उस समय मुलायम की अनिच्छा के बावजूद अखिलेश यादव ने कांग्रेस और सपा में गठबंधन किया था। आखिरकार मुलायम के छोटे भाई और अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव ने इसको लेकर विद्रोह कर दिया था। पिछले दिनों जिस तरह से अखिलेश ने पांच साल तक मंत्री रहे बीजेपी के तीन पिछड़े नेताओं और करीब आधा दर्जन विधायकों को पार्टी में शामिल करके, उसके खिलाफ एक धारणा बनाने का खेल शुरू किया था, बीजेपी उसी हथियार से सपा की साइकिल पंचर करने की नीति पर चल पड़ी है। 2017 में वोटरों की नजर में मुलायम का परिवार बंटा हुआ नजर आया था और बीजेपी ने इस बार भी वैसा ही इंतजाम कर दिया है।

मुलायम के एक और रिश्तेदार के बीजेपी में जाने की चर्चा

मुलायम के एक और रिश्तेदार के बीजेपी में जाने की चर्चा

सपा नेताओं को भाजपा की रणनीति का अंदाजा लग चुका है। इसलिए प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने शिवपाल यादव के भी संपर्क में होने का दावा क्या किया, उन्होंने इसका आनन-फानन में खंडन करके बताने की कोशिश की कि उनकी तरफ से सबकुछ ठीक चल रहा है। लेकिन, अखिलेश खेमे की परेशानी इसी से खत्म नहीं हुई। उनके एक और करीबी रिश्तेदार और पूर्व सपा सांसद प्रमोद गुप्ता ने यह आरोप लगाकर सनसनी मचा दी कि दरअसल मैनपुरी सांसद मुलायम को यादव परिवार ने एक तरह से लखनऊ में बंधक बनाकर रख लिया है। प्रमोद गुप्ता मुलायम के साढ़ू हैं और उनके भी बीजेपी में जाने की चर्चा है।

मुलायम परिवार के सदस्यों के आने से बीजेपी को क्या फायदा ?

मुलायम परिवार के सदस्यों के आने से बीजेपी को क्या फायदा ?

दरअसल, मुलायम परिवार की बहू और बेटी को पार्टी में शामिल करके बीजेपी ने यह कहना तो शुरू कर ही दिया है कि प्रदेश की बहू-बेटियों को वही सुरक्षा दे सकती है। दूसरा ये कि मुलायम के बुजुर्ग होने के बाद यादव परिवार में एकजुटता नहीं है। राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपर्णा यादव के पार्टी में आने पर आरोप भी लगाया है कि अखिलेश यादव एक राजनेता के तौर पर तो फेल हो ही चुके हैं, परिवार को एकजुट रखने में भी नाकाम हो चुके हैं। बीजेपी के नेता भी अंदर खाने मान रहे हैं कि 2017 में विधानसभा चुनाव हार चुकीं अपर्णा यादव के आने से पार्टी को कोई खास चुनावी फायदा नहीं भी हो, लेकिन वह धारणा की लड़ाई तो जीत ही सकती है और यह तो दिखा सकती है कि यादव परिवार पूरी तरह से विभाजित हो चुका है।(ऊपर वाली पुरानी तस्वीर)

वायरल हो रहा है मुलायम का पुराना बयान

वायरल हो रहा है मुलायम का पुराना बयान

यही वजह है कि भाजपा के कई नेता मुलायम का अखिलेश को लेकर पांच साल पहले दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर खूब बढ़ा रहे हैं, जिसमें वह अपने बेटे की सख्त आलोचना करते सुनाई पड़ रहे हैं। बीजेपी के रणनीतिकारों को लगता है कि 2017 की तरह ही यह रणनीति समाजवादी पार्टी को काफी नुकसान पहुंचा सकती है। सपा नेताओं का कहना है कि उन्हें बीजेपी के इरादे की जानकारी है, इसलिए शिवपाल यादव ने बीजेपी नेता के दावे का तुरंत खंडन करके अखिलेश के साथ होने की बात कही। 10 मार्च के चुनाव परिणाम में ही पता चलेगा कि किसकी रणनीति ज्यादा कारगर रही। लेकिन, फिलहाल तो अखिलेश यादव ने भाजपा से जिस तरह से कुछ नेताओं को तोड़कर उसके खिलाफ हवा बनाने की कोशिश की थी, बीजेपी ने उससे बड़ा झटका उनके परिवार के नेताओं को तोड़कर उनको दे दे दिया है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+