बीजेपी के परिवारवाद के आरोपों पर अखिलेश यादव ने पूछा-जय शाह की क्रिकेट में कैसे एंट्री हुई?
लखनऊ, 03 मार्च: उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव अब अंतिम चरण में है। आज छठे चरण का मतदान संपन्न हो गया। सातवें चरण के लिए चुनाव प्रचार चरम पर है। इस चुनाव में पीएम मोदी और बीजेपी सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधने के लिए परिवारवाद का सहारा ले रहे हैं। वे अखिलेश पर भाई-भतीजावाद के आऱोप लगा रहे हैं। बीजेपी के इन आरोपों को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि, सत्तारूढ़ दल हमेशा 'परिवार पहले' के अपने उदाहरणों की अनदेखी करता है।

एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में अखिलेश यादव ने कहा कि, मैंने बलिया में उनके द्वारा दिया गया भाषण सुना। उन्होंने अपने भाषण में परिवार और भाई-भतीजावाद के बारे में 15 बार बात की। और पूरे दिन में उन्होंने भाई-भतीजावाद के बारे में कम से कम 25 बार बात की होगी। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि सिर्फ इसलिए कि कोई उनके परिवार के बारे में बात नहीं करता इसका मतलब यह नहीं है कि वह पारिवारिक नहीं हैं।
अखिलेश यादव ने बीसीसीआई के महासचिव जय शाह की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि, उनके सेकेण्ड इन कमांड (अमित शाह) के बेटे ने क्रिकेट की दुनिया में कैसे प्रवेश किया है? अगर योगी आदित्यनाथ के चाचा गोरखपुर मठ में नहीं होते, तो शायद हमारे मुख्यमंत्री भी मठ का नेतृत्व नहीं कर रहे होते। जब प्रधानमंत्री बलिया में परिवारों और भाई-भतीजावाद पर भाषण दे रहे थे तो क्या उन्हें यहां के पूर्व सांसद अपने बगल में खड़े नहीं दिखे?
सपा प्रमुख ने कहा कि, क्या वह ज्योतिरादित्य सिंधिया को भूल गए हैं? उनकी दो मौसी भाजपा में हैं। वह किसके हैं? उनकी दो बुआ भाजपा में हैं। उनके बेटे कौन हैं? कर्नाटक के मुख्यमंत्री किसके बेटे हैं? अगर उनका परिवार नहीं है, तो मैं क्या कर सकता हूँ? सोमवार को खत्म हो रहे सातवें चरण के चुनाव प्रचार में पीएम मोदी और भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री को एक अप्रभावी प्रशासक के रूप में चित्रित करने की कोशिश की है।
10 मार्च को आने वाले परिणामों में जीतने का विश्वास व्यक्त करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, इस बार अधिक उत्साह और ऊर्जा है ... यह पहला चुनाव है जहां मैं लोगों को अपनी मर्जी से आते देख रहा हूं। हम बदलाव चाहते हैं, लेकिन अधिक हमसे ज्यादा ये लोग बदलाव चाहते हैं। बीजेपी के अपराध कम होने के दावों पर अखिलेश यादव ने कहा कि, यदि आप एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) के आंकड़ों को देखें, तो सबसे अधिक असुरक्षित महिलाएं यूपी में हैं, सबसे अधिक फर्जी मुठभेड़ यूपी में हैं। अगर कोई आईपीएस अधिकारी कार्रवाई में लापता है, तो वह यूपी में है।












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