पीएम मोदी ही नहीं जॉर्ज साहब भी थे पप्पू की बनारसी चाय के शौकीन
लखनऊ, 05 मार्च। भारत की राजनीति में बनारस की चायमिजाजी बहुत खास है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'पप्पू की अड़ी' पर चाय पीकर समां बांध दिया। 'पप्पू की अड़ी' पर कभी जॉर्ज फर्नांडीस का भी आना-जाना होता था। वे खुद चाय को खौलते हुए देखते थे।

कभी कभी भरपूर उबाल के बाद चाय उफन कर बर्तन के बाहर आने लगती। तब जॉर्ज साहब खुद चम्मच उठा कर बर्तन में चलाने लगते ताकि चाय नीचे न गिर पड़े। ये 'चाय की अड़ी' क्या है ? तो इसका मतलब है चाय का अड्डा। अड़ी खांटी बनारसी शब्द है। ये पप्पू कौन हैं ? तो इनका मूल नाम है विश्वनाथ सिंह।

चाय की अड़ी पर जॉर्ज सुबह की प्रेस कांफ्रेंस
जॉर्ज फर्नांडीस को पप्पू की चाय इतनी पसंद थी कि वे उनकी दुकान को ही अपना अस्थायी ऑफिस बना लेते थे। वहीं पत्रकारों को बुला कर अपनी बात कहते। कुल्हड़ के कुल्हड़ चाय पीते और पिलाते। यानी वे चाय की दुकान पर ही प्रेस कांफ्रेंस करते। जॉर्ज साहब जैसे विद्वान नेता अगर किसी चाय की दुकान पर अड्डेबाजी और गपबाजी करते थे तो यह चायवाले की खुशनसीबी थी। यह लम्हा पप्पू चायवाले के लिए किसी गौरव से कम न था। एक बहुत चर्चित तस्वीर है जिसमें जॉर्ज फर्नांडीस, पप्पू के चूल्हे के पास खड़े और बहुत गौर से खौलते हुए चाय को देख रहे हैं। जॉर्ज साहब जब रेल मंत्री थे तब बनारस के विजय नारायण उनके निजी सचिव थे। विजय नारायण से जॉर्ज साहब की बहुत नजदीकी थी। आपातकाल के समय गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने बनारस को ही ठिकाना बनाया था। वे यहां सिख के वेष में रहते थे। फर्राटे से अंग्रेजी बोलते और खुद को खुशवंत सिंह की तरह पत्रकार बताते। बाद में जॉर्ज साहब और विजय नारायण को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया था।

एक घंटे की प्रेस कांफ्रेंस में तीन बार पप्पू की चाय
बनारस के असी घाट के पास स्थित पप्पू की अड़ी एक चाय दुकान नहीं बल्कि काशी की सामाजिक- राजनीतिक विरासत है। 2019 में जब जॉर्ज साहब का निधन हुआ था तब पप्पू यानी विश्वनाथ सिंह ने उन्हें बड़ी भावुकता से याद किया था। 1988 के आसपास की बात है। एक मजदूर संघ के आंदोलन के सिलसिले में जॉर्ज साहब बनारस आये हुए थे। वे बनारस पहुंचे तो मेरी दुकान पर आये। अखबार के लोगों को यहीं बुला लिया। उस समय साधारण नेता भी बड़े-बडे होटलों में प्रेस कांफ्रेंस किया करते थे। लेकिन जॉर्ज साहब मस्तमौला आदमी थे। कभी दिखावा नहीं करते थे। ये प्रेस कांफ्रेंस करीब एक घंटे तक चल चली। एक बार चाय बनी। दो बार बनी। जॉर्ज साहब का मन नहीं भरा। उन्होंने तीसरी बार भी चाय बनाने का संकेत किया। सबने फिर चाय पी। इतनी देर प्रेस कांफ्रेंस चलने से भला मुझे क्या एतराज होता ? ये तो मेरी किस्मत थी कि जॉर्ज साहब जैसा नेता मेरी दुकान पर बैठ कर राजनीति पर चर्चा कर रहे थे। दुकान के पास तो लोगों का मेला लग गया। इससे बड़ी और खुशकिस्मती क्या हो सकती है ?

एक चाय वाला गुजरात का, एक चाय वाला बनारस का
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक पहचान 'पूर्व चायवाला' की भी रही है। जब वे बनारस के चायवाले (पप्पू की अड़ी) की दुकान पर गये तो चाय के कुल्लहड़ में राजनीतिक तूफान आ गया। लोगों का हुजूम उमड़ा पड़ा। 7 मार्च को बनारस, आजमगढ़, गाजीपुर समेत 9 जिलों की 54 सीटों पर वोटिंग है। बनारस में प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव ने भी डेरा जमाया। लेकिन नरेन्द्र मोदी का घिसे -पुराने बेंच पर बैठ कर आम लोगों के साथ चाय पीना, महफिल लूट ले गया। जिन लोगों को प्रधानमंत्री के बगल में बैठ कर चाय पीने का मौका मिला वे खुद को नसीबवाला मान रहे हैं। पप्पू यानी विश्वनाथ सिंह तो अब बुजुर्ग हो चले हैं। सेहत ठीक नहीं होने की वजह से वे दुकान पर कम ही बैठते हैं। शुक्रवार को जब प्रधानमंत्री दुकान पर आये तो उस समय पप्पू के पुत्र दुकान पर थे। प्रधानमंत्री ने चाय पीने के बाद विश्वनाथ सिंह के पुत्र के सिर पर हाथ फेर कर आशीर्वाद भी दिया। बनारस की ये 'टी पार्टी' अंतिम चरण के चुनाव में असर पैदा कर सकती है।
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