UP Education News: डेथ ग्रेच्युटी पर साफ आदेश जारी, शिक्षकों के परिवारों को नहीं झेलनी पड़ेगी परेशानी
UP Education News: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जो न सिर्फ शिक्षकों के परिवारों के लिए राहतभरा है, बल्कि सरकार की एक बेहतर सोच को भी उजागर करता है। लंबे समय से पेंशन और ग्रेच्युटी से जुड़े तकनीकी पेंच में फंसे परिजन अब डेथ ग्रेच्युटी के पात्र माने जाएंगे।
खास बात यह है कि यह राहत उन शिक्षकों के परिवारों को भी मिलेगी जो विकल्प न भर पाने या विकल्प अवधि पूरी होने से पहले ही दुनिया से चले गए। सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षकों और उनके परिवार के लोगों में खुशी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में राज्य सरकार ने सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत मृतक शिक्षकों के परिवारों को आर्थिक सहारा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इस निर्णय को लेकर स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं, जिससे अब पात्र परिवारों को लाभ मिलना सुनिश्चित हो गया है।
यह आदेश 1983 और 2004 में जारी शासनादेशों का अद्यतन रूप है, जिसमें कई पुराने नियमों को मानवता की दृष्टि से संशोधित किया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने खुद इसकी जानकारी दी और कहा कि निदेशक, उच्च शिक्षा को इसका सख्ती से अनुपालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
किन्हें मिलेगा इस योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ उन्हें मिलेगा जो शिक्षक 60 वर्ष की सेवा आयु पूरी होने से पहले ही निधन कर गए, लेकिन उन्होंने सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना था। ऐसे में यदि उनकी मृत्यु विकल्प परिवर्तन की निर्धारित अवधि के पहले हुई हो, तो उनके परिजनों को भी अब डेथ ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा।
वहीं दूसरी श्रेणी में वे शिक्षक शामिल हैं जिन्होंने सेवानिवृत्ति का कोई विकल्प नहीं भरा और 58 वर्ष से पहले उनका निधन हो गया। इन मामलों में भी सरकार ने स्पष्ट किया है कि उनके परिजनों को पूरी पात्रता के साथ आर्थिक सहायता दी जाएगी।
2004 के बाद के मामलों पर भी राहत
2004 के बाद की नियुक्तियों के मामले भी इस योजना के दायरे में लाए गए हैं। यदि कोई शिक्षक 60 या 62 वर्ष की सेवा आयु का विकल्प भर चुका था लेकिन तय समय से पहले उनका निधन हो गया, तो उनके परिवार को भी मृत्यु उपदान दिया जाएगा।
यह फैसला कई वर्षों से लंबित मामलों को सुलझाने में मदद करेगा और सैकड़ों परिवारों को तत्काल राहत मिलेगी। खासकर वे परिवार जो वर्षों से कागजी कार्यवाही के कारण अनिश्चितता में जी रहे थे।
योगी सरकार का यह निर्णय शासन की मानवीय सोच और पारदर्शी नीतियों की मिसाल है। अक्सर सरकारी प्रक्रियाएं तकनीकी कारणों से अटक जाती हैं, लेकिन यह आदेश स्पष्ट रूप से दिखाता है कि सरकार जनकल्याण को प्राथमिकता देती है।












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