Whatsapp-Facebook पर 'सिंघम' बनने वालों की खैर नहीं, पुलिस की वर्दी पहनकर फोटो खींचने से पहले सावधान

अगर कोई पुलिसकर्मी फोटो अपलोड करता है तो ये आवश्यक है की उसकी वो फोटो पूरी हो और नियमों का पालन कर रही हो। साथ ही हथियार की फोटो में नुमाइश न हो।

इलाहाबाद। फिल्म सिंघम तो आपको याद होगी। अजय देवगन की कड़क छवि ने रातोंरात रियल लाइफ के वर्दीधारियों को झकझोर दिया था। हर किसी पर सिंघम की तरह रौबीला अंदाज दिखाना, स्टाइलिश दिखना एक आम सी बात हो गई। सिपाही से लेकर दरोगा व अधिकारी पिस्टल, राइफल व अत्याधुनिक हथियारों के साथ अपनी स्टाइलिस फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर वाहवाही लूटने लगे। लेकिन इस चक्कर में वो विभाग की नियमावली की धज्जियां उड़ाते रहे और वर्दीधारियों समेत विभाग की प्राइवेसी ताक पर जाने लगी। जिस पर अब योगी सरकार के आते ही एक्शन शुरू हो गया है।

Whatsapp-Facebook पर 'सिंघम' बनने वालों की खैर नहीं, पुलिस की वर्दी पहनकर फोटो खींचने से पहले सावधान

यूपी पुलिस के अधिकारी व जवान अब व्हाट्सएप-फेसबुक पर वर्दी-हथियार के साथ फोटो नहीं डाल सकेंगे। उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी जावीद अहमद ने व्हाट्सएप-फेसबुक के इस्तेमाल पर भी सावधानी बरतने को कहा है। अगर अब वर्दी पहनकर स्टाइल में कोई फोटो सोशल साइट पर अपलोड करेगा तो ऐसे वर्दीधारी की खैर नहीं होगी। डीजीपी ने सर्कुलर जारी करके सभी पुलिस कप्तान को निर्देश दिया है की वो सोशल साइट पर ऐसे पुलिसकर्मियों को चिन्हित करे और आदेश अनुपालन न करने वालों पर कार्रवाई करे।

क्या होगी छूट

अगर कोई पुलिसकर्मी फोटो अपलोड करता है तो ये आवश्यक है की उसकी वो फोटो पूरी हो और नियमों का पालन कर रही हो। साथ ही हथियार की फोटो में नुमाइश न हो। जिससे जनता के बीच वर्दी और कर्मी का कोई गलत प्रभाव का संदेश न जाए। जबकि उनके कमेंट में ये स्पष्ट होना चाहिए की वो उनका निजी विचार है। इससे विभाग का कोई लेना देना नहीं है।

विभाग की प्रतिष्ठा का सवाल

डीजीपी के सर्कुलर में कहा गया है की उत्तर प्रदेश पुलिस का कोई भी कर्मचारी चाहे वो ड्यूटी पर हो अथवा नहीं, पुलिस का प्रतिनिधि होता है। समाज में अथवा सोशल मीडिया पर उसकी व्यक्तिगत गतिविधियां विभाग की प्रतिष्ठा से सीधे तौर पर जुड़ी होती हैं। ऐसे में वो कोई ऐसे काम का प्रदर्शन न करे जिससे विभाग की प्रतिष्ठा पर सवाल उठे।

नियम उल्लंघन पर कार्रवाई

डीजीपी ने अपने आदेश में साफ किया है कि अगर कोई सोशल मीडिया पर कमेंट करता है तो ये स्पष्ट होना चाहिए की वो विचार उसके निजी हैं, इससे विभाग का कोई सरोकार नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी विभाग के लोगो, वर्दी, उससे जुड़ी वस्तु या हथियार प्रदर्शित करती तस्वीर पोस्ट नहीं करेगा। डीजीपी का कहना है की ट्रेनिंग के दौरान ही सबकुछ सिखाया जाता है। सबको उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 को याद रखना चाहिए और उसका अनुपालन करना चाहिए। किसी भी प्रकार से उल्लंघन अगर अब किया गया तो सख्त कार्रवाई होगी।

टारगेट पर इलाहाबाद

दरअसल इस आदेश के पीछे इलाहाबाद रहा और यहां के सिपाही दरोगा अब टारगेट पर हैं। बता दें की इलाहाबाद में तैनात सिपाही और दरोगाओं की फोटो सोशल साइट्स पर खूब अपलोड होती है। जिसमें अत्याधुनिक हथियारों के साथ उनकी सेल्फी वायरल होती है। आजकल तो हर खास मौके पर या कहीं ड्यूटी पर कुछ सिंघम टाइप के वर्दीधारी तत्काल फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं लेकिन अब ऐसा करने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है।

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