UP Cabinet Expansion: BJP ब्राह्मण MLAs का 'सहभोज' क्यों हुआ-क्या पक रही कोई खिचड़ी? केशव मौर्य ने खोले राज!
UP Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से हावी रहे हैं, और अब विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के बीच ब्राह्मण विधायकों का 'सहभोज' नई बहस छेड़ रहा है। ठाकुर विधायकों की पिछली बैठक के बाद अब ब्राह्मण MLAs का जुटान। क्या यह कैबिनेट एक्सपेंशन की अटकलों से जुड़ा है? या ब्राह्मण समाज की 'दबी आवाज' को मजबूत करने की कोशिश?
उधर, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बड़ी बात कही, लेकिन विपक्ष ने BJP पर 'जातीय विभाजन' का आरोप लगाया। आइए, इस पूरे मुद्दे को विस्तार से समझते हैं- क्या हुआ, क्यों हुआ, और इसके राजनीतिक मायने क्या हैं...

क्या हुआ: ब्राह्मण विधायकों का सहभोज और बैठक की डिटेल्स
23 दिसंबर 2025 को लखनऊ में कुशीनगर से BJP विधायक पीएन पाठक (पंचानंद पाठक) के आवास पर ब्राह्मण समाज से जुड़े विधायकों और MLCs की बैठक हुई। इसे औपचारिक रूप से 'सहभोज' नाम दिया गया, जहां लिट्टी-चोखा और फलाहार परोसा गया। लेकिन यह कोई साधारण पार्टी नहीं थी। इसमें BJP के 46 ब्राह्मण विधायकों में से 45-50 शामिल हुए, साथ ही बीजेपी सहयोगी अन्य पार्टियों के ब्राह्मण विधायक भी पहुंचे।
- मुख्य आयोजक और भूमिका: मिर्जापुर विधायक रत्नाकर मिश्रा और MLC उमेश द्विवेदी ने मुख्य भूमिका निभाई। पत्रकार से नेता बने देवरिया विधायक शलभ मणि त्रिपाठी (Shalabh Mani Tripathi) भी मौजूद थे।
- चर्चा के मुद्दे: ब्राह्मण समाज की 'दबी आवाज' पर फोकस। विधायक अनिल कुमार (MLA Anil Kumar) ने बताया कि ब्राह्मणों ने भारत की सामाजिक संरचना में योगदान दिया, लेकिन आज उन्हें अपमानित किया जा रहा है। शिक्षा, ज्ञान और स्वतंत्रता संग्राम में ब्राह्मणों की भूमिका पर चिंतन हुआ। समाज को 'संस्कार विहीन' होते देख चिंता जताई गई।
- अन्य विधायक: शामिल होने वालों में अंकुर राज तिवारी (खलीलाबाद), प्रकाश द्विवेदी (बांदा), काशीनाथ शुक्ला (बलरामपुर), विनय द्विवेदी (मेहनौन), राकेश गोस्वामी (महोबा) आदि थे।
BJP Brahmin Community Sahbhoj Reason: क्यों हुआ ब्राह्मण विधायकों का सहभोज?
UP में ठाकुर vs ब्राह्मण का टकराव पुराना है। ठाकुर विधायकों की मानसून सत्र में बैठक के बाद ब्राह्मण MLAs का जुटान कोई संयोग नहीं लगता। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य वजहें:-
- ब्राह्मणों की 'दबी आवाज': विधायकों ने कहा कि ब्राह्मण पथ-प्रदर्शक रहे हैं, लेकिन अब सत्ता में उनकी हिस्सेदारी कम हो रही है। डिप्टी CM ब्रजेश पाठक (ब्राह्मण) हैं, लेकिन ताकत नहीं।
- संस्कार और समाज: ब्राह्मणों को 'अपमानित' करने पर चिंता। वैदिक काल से ब्राह्मण 'वर्ण' नहीं, बल्कि योगदानकर्ता रहे, लेकिन जातिगत राजनीति में पिछड़ गए।
- क्षेत्रीय विकास: SIR (स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन) जैसे मुद्दों पर चर्चा, लेकिन असल फोकस ब्राह्मणों की राजनीतिक हिस्सेदारी पर।
- ठाकुर मीटिंग का जवाब: मानसून सत्र में ठाकुर विधायकों की बैठक से ब्राह्मणों में असंतोष। अब ब्राह्मण भी एकजुट हो रहे हैं।
अंदरखाने क्या पक रहा: कैबिनेट एक्सपेंशन की अटकलें?
सत्र के बीच यह बैठक राजनीतिक हलकों में 'कैबिनेट एक्सपेंशन' (Cabi)से जोड़ी जा रही है। अटकलें:-
- मंत्री बनने की छटपटाहट: बैठक में ज्यादातर वो विधायक थे, जो मंत्री नहीं हैं। कैबिनेट विस्तार में ब्राह्मणों को कितनी जगह मिलेगी, इस पर चिंता है।
- 2027 चुनाव की तैयारी: UP में ब्राह्मण 7% वोटर हैं, जो BJP के कोर सपोर्टर हैं। 2022 चुनाव में BJP को 89% ब्राह्मण वोट मिले थे। मीटिंग से संदेश: ब्राह्मणों को नजरअंदाज न करें।
- जातीय संतुलन: ठाकुर, ओबीसी, SC/ST के बाद ब्राह्मण भी अपनी हिस्सेदारी मांग रहे हैं। योगी सरकार में ब्राह्मणों की 'कमजोर आवाज' पर असंतोष।
- विपक्ष का हमला: SP नेता शिवपाल यादव ने तंज कसा कि BJP में ब्राह्मण MLAs की मीटिंग से साफ है कि पार्टी में जातीय विभाजन है।
केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने क्या कहा:- 'इसे राजनीतिक चश्मे से न देखें'
UP के डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने मीटिंग को सामान्य बताया। मीडिया से बातचीत में कहा:
-
'सत्र में विधायक मिलते रहते हैं। इसे ब्राह्मण, क्षत्रिय, OBC या SC से न जोड़ें।'
- 'मिलना-बैठना अच्छी बात है, लेकिन मीडिया ने कैमरा पहुंचा दिया तो हंगामा हो गया। कोई राजनीतिक मतलब न निकालें।'
- मौर्य ने इसे 'सामाजिक कार्यक्रम' कहा, जहां लोग समय-समय पर मिलते हैं।
- 2017 में BJP को 38% वोट मिले, 2022 में 54%।
- ब्राह्मण BJP के कोर वोटर, लेकिन मीटिंग से संकेत: असंतोष बढ़ सकता है।
2022 चुनाव में ब्राह्मण वोट: BJP का मजबूत आधार
UP में ब्राह्मणों की जनसंख्या 7% है, लेकिन उनका वोट राजनीति बदल सकता है। लोकनीति-CSDS डेटा से-
| क्रमांक | जाति (जनसंख्या %) | BJP+ | SP+ | BSP | INC |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ब्राह्मण (7%) | 89 | 6 | - | 1 |
| 2 | ठाकुर (7%) | 87 | 7 | 2 | 1 |
| 3 | वैश्य (2%) | 83 | 12 | 1 | 1 |
| 4 | अन्य सवर्ण (2%) | 78 | 17 | 1 | 2 |
| 5 | यादव (11%) | 54 | 33 | 12 | - |
| 6 | अन्य OBC (16%) | 66 | 23 | 4 | 3 |
| 7 | मुस्लिम (19%) | 8 | 79 | 6 | 3 |
राजनीतिक संकेत या सामान्य मुलाकात?
यह सहभोज UP में जातीय राजनीति की नब्ज टटोलता है। ठाकुर मीटिंग के बाद ब्राह्मणों का जुटान- क्या कैबिनेट एक्सपेंशन में हिस्सेदारी की जंग? या 2027 चुनाव की तैयारी? मौर्य ने इसे सामान्य कहा, लेकिन विपक्ष ने BJP की 'अंदरूनी कलह' बताया। योगी सरकार के लिए चुनौती:- जातीय संतुलन बनाए रखना। क्या यह मीटिंग बड़ा बदलाव लाएगी? आपका क्या विचार है? कमेंट्स में बताएं!












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