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हाईस्कूल की सेकंड टॉपर यशस्वी पर आगे पढ़ाई के लिए अब नहीं हैं पैसे, छलका दर्द

By अमरीश मनीष शुक्ल
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    इलाहाबाद। 12 किलोमीटर हर रोज सफर करके स्कूल जाना, घर की जिम्मेदारियां निभाना और यूपी का सेकंड टॉपर बन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली फतेहपुर की छात्रा यशस्वी आज किसी पहचान की मोहताज नहीं रही। पीएम मोदी की फैन यशस्वी देश में स्वच्छता और बेटी शिक्षा की दिशा में काम करना चाहती हैं। सेना में अफसर बन कर देश की सेवा का सपना संजोये इस टॉपर के पास इस समय खुशी व्यक्त करने के लिए जितने शब्द नहीं हैं, उससे ज्यादा भविष्य की पढ़ाई के व्यथा है। आर्थिक तौर पर कमजोर घर से आने वाली यशस्वी के भाई-बहन भी पढ़ाई में तेज तर्रार हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वह अच्छे कॉलेजों में दाखिला नहीं ले सके। अब यही दर्द यशस्वी के मन में भी है कि इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बाद भी वह अपने मनपसंद स्कूल कॉलेज में एडमिशन नहीं पा सकेगी और इसके पीछे कारण सिर्फ एक है कि यशस्वी का परिवार आर्थिक रुप से बेहद ही कमजोर है।

    दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ना चाहती हैं

    दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ना चाहती हैं

    बारहवी के बाद यशस्वी दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने का ख्वाब संजोए हुये हैं। यशस्वी को यह नहीं पता है कि उसका भविष्य आगे क्या होगा, लेकिन उसके इरादे बेहद मजबूत हैं कि अगर उसे मौका मिला तो वह सेना में अफसर बन कर देश की सेवा करेगी और देश में स्वच्छता और बेटियों की शिक्षा की दिशा में बडा काम करेंगी।

    खेती किसानी के पिता बुन रहे सपने

    खेती किसानी के पिता बुन रहे सपने

    फतेहपुर के अमौली निवासी यशस्वी के पिता देवीप्रसाद खेती किसानी करते हैं। खेती किसानी पर ही परिवार का पूरा आधार खडा है। बच्चों की पढ़ाई और उसी पर पूरी गृहस्थी टिकी है, लेकिन किसानी से इतने पैसे नहीं होते हैं कि वह बच्चों को बेहतर शिक्षा में की मूलभूत सुविधाएं दे पाए। उम्र के तीसरे पड़ाव में पहुंच चुके देवी प्रसाद कहीं नौकरी चाकरी के लिए भी अब हाथ पांव नहीं मार सकते हैं। ऐसे में बेटी कि सफलता पर गर्व से जब उनका सीना चौड़ा हुआ था और लोगों की बधाई ले रहे थे, उसी वक्त आंखों में खुशी के आंसू भी छलके। आंसू बेटी को आगे बेहतर शिक्षा ना दे पाने में पैसों की तंगी को लेकर भी थे, लेकिन वह इसे छिपाते रहे और किसी से बयां नहीं कर रहे थे । हालांकि मीडिया से बात करते हुये वह अपने जज्बात को रोक नहीं पाये और बच्चो की उच्च शिक्षा में रोड़ा बनी आर्थिक मजबूरियों पर अपनी व्यथा व्यक्त की।

    यशस्वी का छलका दर्द

    यशस्वी का छलका दर्द

    पीएम मोदी की फैन और यूपी बोर्ड हाई स्कूल की सेकंड टॉपर यशस्वी अपनी आगे की पढ़ाई के लिए चिंतित है। यशस्वी कहती हैं कि मेरी दो बड़ी बहने भी पढ़ने में बहुत ही अच्छी है, उनकी प्रेरणा से ही मैं भी पढ़ाई की दिशा में आगे बढ़ रही हूं, लेकिन पापा के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह बहनों को अच्छे कालेज में पढ़ा सकते और अब इसी बात की चिंता मुझे भी है की आगे की पढ़ाई कैसे होगी। यशस्वी बताती हैं कि बड़ी बहन सौम्या और शिवानी दोनों ही बीएससी फाइनल ईयर में है। 12वीं के बाद दोनों दिल्ली जाकर पढ़ाई करना चाहती थी, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के चलते यह संभव नहीं हो सका।

    घर में नहीं है बेटा और बेटी में भेदभाव

    घर में नहीं है बेटा और बेटी में भेदभाव

    यशस्वी अपने माता-पिता की खूब सराहना करती हैं। कहती हैं कि उनके घर में बेटी बेटा में कोई भेद नहीं है। बेटियों को उतनी ही छूट है जितना कि बेटों को मिलती है। यही कारण है कि उनके पिता के पास भले ही पैसे नहीं हैं, लेकिन बेटियों को आगे बढ़ाने उन्हें पढ़ाने के जज्बे में कोई कमी नहीं है । यही वजह है कि 12 किलोमीटर दूर हर रोज यशस्वी पढ़ने के लिए जाती हैं और पिता के भरोसा को यशस्वी ने सेकंड टॉपर बन कर सच साबित कर दिया है। यशस्वी की बड़ी बहन भी जहानाबाद के डिग्री कॉलेज में पढ़ने जाती हैं और बड़ा भाई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।

    स्वच्छता का संदेश

    स्वच्छता का संदेश

    फतेहपुर के जहानाबाद स्थित विकास विद्या मंदिर की छात्रा यशस्वी अपने नाम के अनुरूप यशस्वी हैं। वह देश में स्वच्छता और शिक्षा पर पीएम मोदी के प्रयास की बहुत बडी प्रशंसक हैं। यशस्वी भी स्वच्छता और शिक्षा की अलख जगाना चाहती हैं और कहती हैं कि गंदगी होगी तो आप बीमार होंगे और शिक्षित नहीं होंगे तो दर-दर की ठोकरें खाएंगे। इसलिए इन दोनों दिशाओं में हमेशा आगे रहना चाहिये।

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    English summary
    UP Board second topper Yashashwi has money problem for study in Allahabad

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