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UP BJP President: यूपी भाजपा अध्यक्ष क्या महिला होगी? इन 3 नेताओं का नाम रेस में आगे, इस जाति का पलड़ा भारी

UP BJP President: उत्तर प्रदेश बीजेपी में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हलचल तेज हो गई है। लगभग सभी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद अब सभी की नजरें सिर्फ एक बड़े फैसले पर टिक गई हैं कि आखिर पार्टी प्रदेश की कमान किस चेहरे को सौंपेगी। खास बात यह है कि इस बार चर्चा सिर्फ नामों की नहीं, बल्कि इस संभावना की भी है कि बीजेपी उत्तर प्रदेश में पहली बार किसी महिला को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा राजनैतिक संदेश दे सकती है।

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जो भी चेहरा चुना जाएगा, वह सिर्फ यूपी को नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों के जातीय और चुनावी समीकरणों को भी छुएगा। इसी वजह से केंद्रीय नेतृत्व बेहद सावधानी से विकल्पों पर विचार कर रहा है।

UP BJP President

🟡 कौन होगा UP BJP चीफ? दिल्ली में चल रहा है गहन मंथन

बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर विचार-विमर्श जारी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह और महासचिव संगठन बीएल संतोष समेत शीर्ष नेता इस पर लगातार चर्चा कर रहे हैं। कुछ महीने पहले राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने यूपी के तमाम बड़े नेताओं से राय ली थी। सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर दोनों डिप्टी सीएम, प्रदेश महामंत्री, मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों की राय पहले ही हाईकमान को भेजी जा चुकी है।

जिलाध्यक्षों की नई सूची जारी होने के बाद अब माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष पर जल्द फैसला होना जरूरी है, क्योंकि आगे पंचायत चुनाव और फिर 2027 के विधानसभा चुनाव सामने हैं।

🟡 UP BJP Chief: क्या बीजेपी इस बार चलेगी 'महिला कार्ड'? इन 3 महिला नेताओं की चर्चा तेज

बीजेपी ने 33 फीसदी महिला आरक्षण की बात कही है और कई चुनावों में महिलाओं ने पार्टी को भारी समर्थन दिया है। बिहार इसका बड़ा उदाहरण है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में महिला प्रदेश अध्यक्ष बनाना पार्टी का मास्टरस्ट्रोक माना जा सकता है।

रेस में तीन महिला नेताओं के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं और खास बात यह है कि तीनों पिछड़े या दलित वर्ग से आती हैं। इससे पार्टी को बड़ा सामाजिक संदेश देने में मदद मिल सकती है। भाजपा यूपी में ओबीसी या दलित नेता को ही कमान सौंप सकती है।

▶️1. रेखा वर्मा: दो बार सांसद, संगठन में मजबूत पकड़

रेखा वर्मा बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तराखंड की सह-प्रभारी हैं। वह धौरहरा लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुकी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाहकार समिति और रसायन एवं उर्वरक समिति में भी अहम भूमिका निभा चुकी हैं।

रेखा वर्मा का नाम इसलिए मजबूत माना जा रहा है क्योंकि वह संगठन और सत्ता दोनों में अनुभव रखती हैं और पिछड़े वर्ग से आने के कारण बीजेपी के सामाजिक समीकरण फिट करती हैं।

▶️2. साध्वी निरंजन ज्योति: फायरब्रांड नेता, केंद्र में मंत्री रह चुकीं

फतेहपुर से लोकसभा सांसद साध्वी निरंजन ज्योति बीजेपी की चर्चित चेहरों में शामिल हैं। वह 2014 में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री और 2019 में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री बनीं। 2012 में हमीरपुर से विधायक भी रहीं। धार्मिक और समाजिक क्षेत्रों में इनकी मजबूत पकड़ है। महिला और ओबीसी चेहरा होने के कारण इनके नाम पर पार्टी गंभीरता से विचार कर सकती है।

▶️3. प्रियंका रावत: युवा दलित चेहरा, 2014 में बड़ी जीत के बाद पहचान बनी

प्रियंका रावत 2014 में बाराबंकी से सांसद बनीं और शुरुआती दिनों से ही महिला एवं बाल विकास और उपभोक्ता मामलों से जुड़ी समितियों में सक्रिय रहीं। दलित समाज से आने के कारण उनका नाम भी चर्चा में है। बीजेपी अगर दलित महिला चेहरा आगे लाना चाहती है तो प्रियंका रावत एक मजबूत विकल्प मानी जा रही हैं।

🟡 पुरुष नेताओं की लंबी लाइन भी मुकाबले में

अगर पार्टी महिला अध्यक्ष की ओर नहीं जाती तो पिछड़े, सामान्य और दलित वर्ग से कई दिग्गज नाम भी कतार में हैं। पिछड़े वर्ग से केशव प्रसाद मौर्य, भूपेंद्र सिंह चौधरी, बीएल वर्मा, पंकज चौधरी, स्वतंत्र देव सिंह और अमरपाल मौर्य जैसे नाम सक्रिय चर्चा में हैं।

सामान्य वर्ग में ब्रजेश पाठक, दिनेश शर्मा, हरीश द्विवेदी, श्रीकांत शर्मा, महेश शर्मा और सतीश गौतम जैसे नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। दलित वर्ग से विद्यासागर सोनकर, रामशंकर कठेरिया और बेबी रानी मौर्य भी रेस में हैं।

🟡 जातिगत समीकरण UP से लेकर हरियाणा-बिहार तक देखे जाएंगे

बीजेपी जब भी प्रदेश अध्यक्ष बनाती है, उसका संदेश सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रहता। राजस्थान में तेली समाज, हरियाणा में ब्राह्मण, मध्यप्रदेश में वैश्य, बिहार में कलवार समाज और उत्तराखंड में ब्राह्मण समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है। यूपी में किन जातियों को संतुलन देना है, इस पर नजर रखकर ही नया अध्यक्ष चुना जाएगा।
यही वजह है कि यूपी में ओबीसी और दलित समाज से जुड़े नेताओं की लिस्ट भी काफी लंबी है। पर इस बार चर्चा महिलाओं के इर्द-गिर्द ज्यादा घूम रही है।

🟡 खरमास से पहले फैसला नहीं आया तो 15 जनवरी के बाद इंतजार

बीजेपी के एक पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी शुभ मुहूर्त और धार्मिक तिथियों को देखते हुए ही बड़े फैसले लेती है। 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक खरमास रहेगा, जिसमें शुभ कार्य नहीं होते। अगर 14 दिसंबर तक फैसला नहीं हुआ तो नया अध्यक्ष 15 जनवरी या उसके बाद ही मिल पाएगा।

🟡 14 नए जिलाध्यक्षों के जरिए बीजेपी ने साधा जातीय संतुलन

हाल ही में जारी सूची में 14 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की गई, जिनमें 7 सामान्य, 6 पिछड़े और 1 अनुसूचित जाति वर्ग से हैं। कई जगह पुराने चेहरों पर भी भरोसा जताया गया है। इससे साफ है कि पार्टी संगठन में जातीय संतुलन पर खास ध्यान दे रही है और प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति भी इसी फार्मूले से तय होगी।

🟡 महिला कार्ड चलेगा या सामाजिक संतुलन? बस कुछ ही दिनों का इंतजार

यूपी बीजेपी का नया अध्यक्ष कौन होगा, यह फैसला सिर्फ एक पोस्ट की नियुक्ति नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक संकेत होगा। क्या पार्टी महिला चेहरा उतारेगी और चुनाव से पहले आधी आबादी को एक बड़ा संदेश देगी, या फिर जातीय समीकरणों को देखते हुए किसी अनुभवी नेता को आगे लाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल इतना तय है कि इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प है और तीन महिला चेहरे चर्चा के केंद्र में हैं।

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