UP विधानसभा सत्र: सरकार और विपक्ष की महिलाओं ने एक दूसरे पर किए तीखे हमले

लखनऊ, 22 सितंबर: उत्तर प्रदेश में गुरुवार को विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक दिखी। हालांकि एक दिन महिला सदस्यों के लिए रिजर्व किया गया था लेकिन महिला सदस्य भी पार्टी लाइन पर ही एक दूसरे पर वार करती नजर आईं। हालांकि इस दौरान माहौल बिल्कुल हल्का दिखा और सदन में आधी आबादी की शक्ति का भी एहसास कराया। कुछ महिलाओं ने राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा उठाया तो कुछ ने अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाने का प्रयास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हालांकि ये व्यवस्था दे रखी थी कि महिला सदस्यों के बोलने को समय सीमा में न बांधा जाए। वो जितना चाहे बोल सकती हैं।

आधी आबादी के लिए कई योजनाएं चला रही है सरकार

आधी आबादी के लिए कई योजनाएं चला रही है सरकार

सदन की कार्यवाही गुरुवार को शुरू होते ही विधानसभा सतीश महाना ने नेता सदन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बोलने का मौका दिया। योगी ने इस मौके पर महिला सदस्यों को बधाई दी और कहा कि ये एक ऐतिहासिक अवसर मिला है इसका सदुपयोग कीजीए। योगी ने कहा कि केंद्र की सरकार और राज्य की सरकार ने नारी शक्ति के उत्थान के लिए काफी काम किया है। आधी आबादी का प्रतिनिधित्व पहले की अपेक्षा अब विधानसभा में बढ़ गया है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह और बढ़ेगा और महिलाएं बढ़ चढ़कर राजनीति में हिस्सा लेंगी।

अखिलेश बोले- राज्य में महिला उत्पीड़न के मामले बंद होने चाहिए

अखिलेश बोले- राज्य में महिला उत्पीड़न के मामले बंद होने चाहिए

सीएम के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव को भी अपनी बात रखने का मौका दिया। इस मौके पर अखिलेश ने कहा कि पूरा सदन विधानसभा अध्यक्ष का आभारी है कि महिलाओं के लिए एक दिन अलग से रखा गया है। इस तरह की चीजें आने वाले समय में भी होना चाहिए। अखिलेश ने कहा कि आज राजनीति करने का समय नहीं है लेकिन जिस तरह से यूपी में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार हो रहा है वह सही नहीं है। सपा की सरकार में भी घटनाएं होती थीं आज भी हो रही हैं लेकिन समय आ गया है कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार को लेकर एक साथ आवाज उठाई जाए।

कांग्रेस का आरोप- 70 साल में महंगाई अपने चरम पर

कांग्रेस का आरोप- 70 साल में महंगाई अपने चरम पर

इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने महिलाओं को बोलने का मौका दिया। सबसे पहले कांग्रेस की विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने देश में महंगाई का मुद्दा उठाया। मोना ने कहा कि जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है उससे अब जनता की रोटी भी छिन गई है। पूरा देश महंगाई का दंश झेल रहा है। हर गरीब के घर की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। 70 साल में पहली बार महंगाई सबसे अधिक स्तर तक पहुंच गई है। सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। केंद्र की बीजेपी की सरकार ने उज्जवला योजना के तहत गरीबों को फ्री सिलेंडर तो बांट दिए थे लेकिन अब गरीब के पास उन्हें भरवाने के लिए पैसे नहीं हैं। फिर गरीब वहीं चूल्हे तक पहुंच गया है।

यूपी में हर जगह हो रही दुष्कर्म की घटनाएं

यूपी में हर जगह हो रही दुष्कर्म की घटनाएं

आराधना मिश्रा के बाद समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ रागिनी ने महिला उत्पीड़न के मुद्दे को लेकर हमला बोला। रागिनी ने कहा कि आज यूपी में महिलाएं सुरक्षित नहीं रह गई हैं। जहां देखो वहीं बीभत्स तस्वीरें आ रही हैं। महिलाएं भय के वातावरण में जीने को मजबूर हैं। पूरे राज्य में जगह जगह दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ रही हैं जिससे भय का माहौल पैदा हो गया है। इस सरकार में महिलाओं के खिलाफ अपराध में बढोत्तरी हुई है। देश की सबसे बड़ी विधानसभा में बोलने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष का शुक्रिया।

केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं को लेकर गंभीर

केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं को लेकर गंभीर

बीजेपी की तरफ से पूर्व मंत्री अनुपमा जायसवाल ने विधानसभा में अपनी बात रखी। अनुपमा जायसवाल ने कहा कि सरकार ने यूपी के इतिहास में पहली बार महिलाओं के लिए जो सुविधा प्रदान की है वह काफी सराहनीय है। यह पीएम मोदी और सीएम योगी के नारी सशक्तिकरण की दिशा में अभिनव प्रयोग है। इसका असर है कि आज पूरे सदन में आधी आबादी की गूंज सुनाई दे रही है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए जो योजनाएं चलाई हैं वो वाकई में काबिलेतारीफ हैं और इसका लाभ महिलाओं को मिल रहा है।

जब महिला सदस्य ने पूछा- किसानों की आमदनी कब होगी दोगुनी

जब महिला सदस्य ने पूछा- किसानों की आमदनी कब होगी दोगुनी

सपा की विधायक पिंकी यादव ने सरकार से पूछा कि किसानों की आमदनी कब दोगुनी होगी। इस सवाल का जवाब संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने दिया। खन्ना ने कहा कि सरकार ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए हर कदम उठा रही है। खन्ना ने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह से सरकार किसानों को कई फसलों पर लागत मूल्य से कहीं ज्यादा समर्थन मूल्य दे रही है। इसके पीछे मकसद यही है कि किसानों के हितों की रक्षा की जाए और उनकी आमदनी दोगुनी की जाए।

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