संयुक्त भागीदारी मोर्चा की बैठक में होगा भावी रणनीति पर मंथन, 27 अक्टूबर को मऊ में महारैली से होगा शंखनाद

लखनऊ, 20 सितंबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले संयुक्त भागीदारी मोर्चा एक बीजेपी के खिलाफ गठबंधन बनाने की कवायद में जुट गया है। पिछले दिनों AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के मुखिया ओम प्रकाश राजभर और भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर की मुलाकात हुई थी। इस अहम मुलाकात के बाद अब मोर्चा के स्वरूप को लेकर 21 सितंबर को लखनऊ में एक अहम बैठक होगी जिसमें आगे की रणनीति और मोर्चा की रुपरेखा पर विचार होने की संभावना है कि इसमें नये दलों को शामिल किया जाए या नहीं। बड़ी खबर ये है कि 27 अटक्टूबर को मोर्चा की महारैली मऊ में आयोजित की जाएगी जिसमें गठबंधन में शामिल सभी दलों के प्रमुख रहेंगे और वहीं से चुनावी बिगुल फूंकने का प्लान बनाया गया है।

राजभर

पिछले दिनों ओवैसी, राजभर और चंद्रशेखर की हुई थी मुलाकात

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी और उनके सहयोगी ओम प्रकाश राजभर ने पिछले दिनों आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद से ही अटकलें लगाई जा रही हैं कि ''भागीदारी संकल्प मोर्चा'' आजाद को अपने पाले में शामिल करना चाहता है। ऐसा माना जा रहा है कि संयुक्त भागीदारी मोर्चा में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी), एआईएमआईएम, कृष्णा पटेल का अपना दल गुट और जनता क्रांति पार्टी सहित 10 दल शामिल हो सकते हैं। कल 21 को लखनऊ में होने वाली बैठक में ओवैसी के शामि होने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि सीटों के बंटवारे को लेकर इस बैठक में अहम फैसला हो सकता है।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता अरूण राजभर ने बताया कि,

'' 21 अक्टूबर को दो बैठकें होनी हैं। पहली बैठक सुभासपा के चीफ और एआईएमआईएम के बीच होगी। इसके बाद मोर्चा की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में यह तय किया जाएगा कि नए सहयोगियों को को जोड़ना है या नहीं। फिलहाल संयुक्त भागीदारी मोर्चा में दस दल शामिल हैं। इस मोर्चा की बड़ी रैली 27 अक्टूबर को मऊ में की जाएगी जिसमें गठबंधन की आधिकारिक घोषणा के साथ ही चुनावी शंखनाद भी किया जाएगा।''

योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं ओम प्रकाश राजभर
दरअसल, 2019 तक योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली कैबिनेट में मंत्री रहे राजभर भगवा पार्टी से अलग होने के बाद राज्य सरकार और केंद्र के घोर आलोचक रहे हैं। हाल ही में, एआईएमआईएम और एसबीएसपी के बीच तनातनी हुई थी जिसके बाद एसबीएसपी ने बीजेपी के साथ अपनी नजदीकीयां बढ़ा दी थीं। यूपी एआईएमआईएम के अध्यक्ष शौकत अली ने जोर देकर कहा कि बीजेपी को रोकने के लिए एआईएमआईएम राजभर के साथ हैं। तय उनको करना है कि गठबंधन करना है कि नहीं।

ओवैसी

यूपी चुनाव पर ओम प्रकाश राजभर का फोकस
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में, भाजपा ने 403 सदस्यीय सदन में 312 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि बसपा केवल 19 सीटें जीत सकी। दूसरी ओर, सपा-कांग्रेस गठबंधन फल देने में विफल रहा क्योंकि वह केवल 54 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल कर सका। आगामी चुनावों के लिए, ओम प्रकाश राजभर एक गंभीर दावेदार के रूप में अपनी साख दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गठबंधन 300 से अधिक सीटें जीतेगा और एक फॉर्मूला पेश किया जिसके तहत हर साल एक नया सीएम और 5 डिप्टी सीएम नियुक्त किए जाएंगे।

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