RSS के दबाव में स्वतंत्रदेव को देना पड़ा प्रदेश अध्यक्ष से इस्तीफा, जानिए कैसे बची कैबिनेट मंत्री की कुर्सी

लखनऊ, 30 जुलाई: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश ईकाई के अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह का इस्तीफा इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। इसमें भी रोचक यह है कि बीजेपी के अंदरखाने ही इस बात की चर्चा जोरों पर है कि जब बीजेपी में प्रदेश अध्यक्ष के इस्तीफे की कोई परिपाटी नहीं है तो फिर उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा। दरअसल सबसे बड़ी खबर ये है कि स्वतंत्रदेव सिंह ने इच्छा से नहीं बल्कि RSS के कहने पर इस्तीफा दिया था। सूत्रों की माने तो जलशक्ति राज्य मंत्री दिनेश खटीक के आरोपों के बाद ही स्वतंत्रदेव सिंह की कुर्सी हिल गई थी। वो तो सीएम योगी आदित्यनाथ से उनकी निकटता की वजह से जलशक्ति मंत्री की कुर्सी बच गई। लेकिन सूत्रों का यह भी दावा है कि देर सबेर कभी भी स्वतंत्रदेव सिंह पर गाज गिर सकती है।

प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी गई लेकिन योगी ने बचाया मंत्री पद ?

प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी गई लेकिन योगी ने बचाया मंत्री पद ?

जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के नीचे काम करने वाले जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने विभाग में बड़े भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके बाद से ही संघ सक्रिय हो गया था। चूंकि दिनेश खटीक भी संघ बैकग्राउंड सेआते हैं और उनके पिता भी संघ के पदाधिकारी रह चुके हैं, इस नाते संघ में उनकी अच्छी पकड़ है। खटीक ने अपने पत्र में जो आरोप लगाए थे उससे बीजेपी पर दलित विरोधी होने का आरोप लगा रहा था। दबाव इस कदर बढ़ा कि स्वतंत्रदेव सिंह को योगी के दरबार में जाकर सफाई देनी पड़ी। हालांकि संघ के दबाव में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष का पद तो छोड़ना पड़ा लेकिन योगी ने बतौर कैबिनेट मंत्री उनको अभयदान दे दिया नहीं तो मंत्री की कुर्सी भी जानी तय थी।

स्वतंत्रदेव सिंह के लिए खतरा अभी टला नहीं ?

स्वतंत्रदेव सिंह के लिए खतरा अभी टला नहीं ?

बीजेपी के सूत्रों का दावा है कि स्वतंत्रदेव सिंह अपने इस्तीफे पर नहीं बोल रहे हैं क्योंकि उन्होंने अपना इस्तीफा दबाव में आकर दिया है। जिस तरह से उनके उपर दबाव बना उसको वो नहीं झेल पाए और उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहे हैं। लिहाजा कैबिनेट मंत्री के विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप को वह भी नहीं पचा पा रहे थे। लेकिन उन्होंने स्वतंत्रदेव को अभयदान देने का फैसला किया। योगी सख्त फैसलों के लिए जाने जाते हैं वह स्वतंत्रदेव को मंत्री पद से भी हटा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया लेकिन ऐसा भी नहीं है कि स्वतंत्रदेव सिंह के लिए खतरा टल गया है। फिलहाल अभी उनकी कुर्सी इसलिए बच गई क्योंकि तुरंत हटाया जाता तो सरकार पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप भी लगते इसलिए इस मामले को आगे के लिए टाला गया है।

खटीक की RSS से करीबी स्वतंत्रदेव पर पड़ी भारी

खटीक की RSS से करीबी स्वतंत्रदेव पर पड़ी भारी

स्वतंत्र देव सिंह का तीन साल का कार्यकाल वैसे भी 16 जुलाई को खत्म हो गया था।सिंह का इस्तीफा, जो जल शक्ति के कैबिनेट मंत्री भी हैं। उनके कनिष्ठ मंत्री दिनेश खटीक द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अपना इस्तीफा भेजे जाने के कुछ दिनों बाद ही उनके इस्तीफे की खबर आई। राज्यमंत्री खटीक सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद अपने मतभेदों को दूर करने में कामयाब रहे। वहीं बीजेपी सूत्रों ने कहा कि आरएसएस के साथ उनके करीबी जुड़ाव ने स्वतंत्र देव को यूपी बीजेपी का पद छोड़ने के लिए मजबूर किया। हाल ही में, आरएसएस दलितों में पैठ बनाने की कवायद में जुटा हुआ है और वह नहीं चाहता कि बीजेपी की छवि दलित विरोधी बने।

दिनेश खटीक का RSS से पुराना नाता काम आया

दिनेश खटीक का RSS से पुराना नाता काम आया

खटीक ने भी आरएसएस के साथ अपना करियर शुरू किया और 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में मेरठ की हस्तिनापुर आरक्षित सीट से जीत हासिल की। जानकारों का कहना है कि अगर इस्तीफा देना होता तो वह 16 जुलाई को ही पद से इस्तीफा दे देते, जब उनका तीन साल का कार्यकाल समाप्त हो जाता। गौरतलब है कि बीजेपी में राज्य इकाई के प्रमुख के अपने पद से इस्तीफा देने का रिवाज नहीं है। यह एक नेता द्वारा कार्यभार संभालने की एक सरल प्रक्रिया है।

कलराज मिश्रा और सूर्य प्रताप शाही ने की थी इस्तीफे की पेशकश

कलराज मिश्रा और सूर्य प्रताप शाही ने की थी इस्तीफे की पेशकश

सिंह से पहले कलराज मिश्रा और सूर्य प्रताप शाही थे जिन्होंने क्रमशः 2002 और 2012 में यूपी भाजपा अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा देने की पेशकश की थी। चुनाव के बाद भाजपा राज्य के राजनीतिक इतिहास में पहली बार यूपी में सत्ता में दोबारा लौटने में सफल रही। विशेषज्ञ बताते हैं कि सिंह का इस्तीफा काफी हद तक प्रतीकात्मक था क्योंकि उन्होंने जल्द ही एक नए राज्य इकाई अध्यक्ष के लिए मार्ग प्रशस्त किया होगा। सूत्रों ने कहा कि पार्टी थोड़े समय के लिए भी नेतृत्वविहीन रहना पसंद नहीं करती इसलिए जल्द ही नए बॉस का ऐलान किया जाएगा।

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