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यूपी पीसीएस 2018: परीक्षा में एक बार फिर पूछे गए गलत सवाल, आयोग ने कहा किसी का नहीं होगा नुकसान

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस 2018 की परीक्षा फिर से विवादों में घिर गई है। रविवार को संपन्न हुई परीक्षा में इस बार बाहरी खामियां तो सामने नहीं आईं लेकिन, अब प्रश्न पत्र में पूछे गए सवाल को लेकर आयोग पर सवाल उठाया गया है। अभ्यर्थियों ने जनरल स्टडीज के प्रथम प्रश्न पत्र में 2 सवालों पर आपत्ति जताई है और उनका दावा है कि गलत प्रश्न पूछे गए हैं। यह मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि आयोग की पिछली दो लगातार परीक्षाओं में गलत प्रश्न पूछे जाने को लेकर ही विवाद सामने आया और यह दोनों भर्तियां हाईकोर्ट का चक्कर काटते हुए अधर में लटकी हुई हैं। ऐसे में प्रश्न पूछे जाने की प्रवृत्ति पर सबक लेने के बजाय आयोग का रवैया नहीं बदला। जिसके चलते एक बार फिर से भर्ती को अभ्यार्थी हाईकोर्ट ले जाने की तैयारी में हैं।

किन प्रश्नों पर है आपत्ति

किन प्रश्नों पर है आपत्ति

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस 2018 की परीक्षा में जिन दो प्रश्नों पर सवाल उठे हैं उनमें सीरीज बी के प्रश्न संख्या 133 व 149 है। प्रश्न संख्या 133 में पूछा गया है कि निम्न में से कौन से कथन सही है ? जिसमें ऑप्शन दिए गए हैं - प्राकृतिक आपदाएं सर्वाधिक क्षति विकासशील देशों में करती हैं, भोपाल गैस त्रासदी मानव निर्मित थी,भारत आपदा युक्त देश है, मैंग्रोव चक्रवात का प्रभाव कम करते हैं। इसमें जो c नंबर पर विकल्प दिया गया है "भारत आपदा युक्त देश है" इस पर ही अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं। क्योंकि इसी प्रश्न के अंग्रेजी अनुवाद में इस ऑप्शन को कहा गया है कि इंडिया इज डिजास्टर फ्री कंट्री यानी भारत आपदा मुक्त देश है। जबकि हिंदी के अनुवाद में ठीक इसका उल्टा ऑप्शन दिया गया है और लिखा गया है भारत आपदायुक्त देश है। इस सवाल को लेकर अभ्यर्थियों ने अपनी आपत्ति जाहिर की है और अगर आयोग इस प्रश्न पर अपना रुख साफ नहीं करता तो मामला हाईकोर्ट जाना तय है।

ये है दूसरा सवाल

ये है दूसरा सवाल

इसी सीरीज में एक और प्रश्न संख्या 149 भी विवादों में घिर गई है। इसमें आयोग ने प्रश्न पूछा है कि भारत सरकार द्वारा महिला एवं बाल विकास के लिए स्वतंत्र मंत्रालय कब स्थापित किया गया। इस प्रश्न के उत्तर में चार विकल्प दिए गए हैं जिनमें 1985, 1986, 1987, 1988 का विकल्प दिया गया है। अभ्यर्थियों ने इस पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि महिला एवं बाल विकास के लिए स्वतंत्र मंत्रालय का गठन वर्ष 2006 में किया गया है लेकिन ऑप्शन में दिया ही नहीं गया, ऐसे में सवाल गलत है। अभ्यर्थियों ने दावा किया कि वर्ष 1985 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग का गठन किया गया था ना कि महिला एवं बाल विकास के लिए स्वतंत्र मंत्रालय की स्थापना हुई थी। अभ्यर्थियों ने दोनों प्रश्नों को लेकर आयोग को अपना रुख साफ करने की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर इसे आयोग की ओर से अपनी गलती के तौर पर स्वीकार कर इस पर अपना रुख साफ नहीं किया जाता तो। अभ्यर्थी इन दोनों प्रश्नों को हाई कोर्ट में चैलेंज करेंगे।

क्या बोले अधिकारी

क्या बोले अधिकारी

मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सचिव जगदीश ने कहा कि जिन प्रश्नों को लेकर आपत्तियां होंगी उसे नियमानुसार जांचने परखने का कार्य किया जाएगा। अभ्यर्थियों का कोई नुकसान नहीं होगा। जल्द ही उत्तर कुंजी जारी की जाएगी और अभ्यार्थी निश्चिंत रहें उत्तर कुंजी जारी करने से पहले विषय विशेषज्ञ सवालों का परीक्षण करेंगे, उनके उत्तरों को परखेंगे और उसके बाद ही उत्तर कुंजी जारी होगी। जहां आवश्यकता होगी संशोधन किया जाएगा। अभ्यर्थियों का कोई नुकसान नहीं होगा। जल्द ही चारों सीरीज की आंसर की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। अभ्यार्थियों से वहां उनकी आपत्ति भी मांगी जाएगी, अभ्यर्थी अगर आंसर की से संतुष्ट नहीं होते हैं तो आप अपनी आपत्ति नियमानुसार वेबसाइट पर कर सकते हैं। उनकी आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।

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