भारत का ऐसा गांव जहां बच्चे ही नहीं भैंस भी जुड़वा पैदा होती हैं, तस्वीरें

जुड़वा बच्चों की इस रहस्य को समझने के लिए देश-विदेश के कई डाक्टर और वैज्ञानिक रिसर्च करने आए लेकिन इलाहाबाद के इस गांव में जुड़वा बच्चों के पैदा होने का रहस्य आज भी बना हुआ है।

इलाहाबाद। संगम नगरी, इलाबाबाद विश्व में धार्मिक मान्यता के लिये ही नहीं बल्कि एक आश्चर्यजनक तथ्य के लिये भी मशहूर है। यहां एक ऐसा गांव है जहां हर दूसरे घर में जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं। जानकार बताते है कि देश की आजादी के दौरान पहली बार यहां जुड़वा बहनें पैदा हुई थी उसके बाद तो इस गांव का मिजाज ही बदल गया। हर दूसरे घर में लोगों के जुड़वा बेटी और बेटे होने लगे। लेकिन यह क्रम यहीं नहीं रूका। अब तो इस गांव में जानवर भी जुड़वा पैदा हो रहे हैं। जुड़वा बच्चों की इस रहस्य को समझने के लिए देश-विदेश के कई डाक्टर और वैज्ञानिक रिसर्च करने आए, लोगो का ब्लड सैंपल लिया गया, पानी व मिट्टी के भी नमूने एकत्रित किये गये लेकिन संगम नगरी के इस गांव में जुड़वा बच्चों के पैदा होने का रहस्य आज भी बना हुआ है।

हसीना-मदीना से सोनू-मोनू तक

हसीना-मदीना से सोनू-मोनू तक

गांव में कई बुजुर्ग इसे कुदरत का करिश्मा तो मानते है लेकिन पुराने दिनों के बारे में सुनी और आखों देखी बातों को भी बताते है। गांव के वयोवृद्ध असगर बताते हैं कि जिस साल भारत अंग्रेजी हुकूमत से आजाद हुआ था उसी साल जुड़वा बेटियों ने तौफीक मियां के घर जन्म लिया था। उनका नाम हसीना -मदीना रखा गया। उसके बाद तो इस गांव पर कुदरत जैसे सीधे मेहरबान हो गई। हर दूसरे घर में एक जुड़वा पैदा होने लगे। यह क्रम आज तक नहीं रूका। इस समय सोनू-मोनू इस बस्ती के नये जुड़वा बच्चे हैं। हालांकि इनका नामकरण अभी नहीं किया गया है । परिजनों से पूछे जाने पर बोले की सोनू-मोनू जैसा कुछ रखेंगे।

150 से ज्यादा जुड़वा

150 से ज्यादा जुड़वा

इलाहाबाद के इस गांव में एक दो नहीं बल्कि 150 के लगभग छोटे बड़े जुड़वा बच्चे हैं। लोग कहते हैं इस गांव को जुड़वा लोक भी कहते हैं। अगर इसी तेजी से जुड़वा बच्चों की संख्या बढती रही तो अगले एक दशक में यहां हर घर में जुड़वा बच्चों का मिलना तय माना जा रहा है। फिलहाल कुदरत के इस चमत्कार पर वैज्ञानिकों की सोच भी नतमस्तक है। जो भी हो यह गांव दुनिया के अनूठे गांवों में एक अनूठा गांव है। ये भी पढ़ें- इलाहाबाद: महज 5,000 रुपयों की खातिर बिक गई यूपी पुलिस, होने दीं चार हत्याएं!

बगल के गांव में भी पैदा हुआ जुड़वा बच्चा

बगल के गांव में भी पैदा हुआ जुड़वा बच्चा

हाल ही में बगल के गांव में भी जब जुड़वा बच्चे पैदा हुए तो पता चला कि बच्चों की मां उसी गांव से लाये गये दूध का इस्तेमाल करती थी। फिलहाल यह आश्चर्यजनक तो है। लेकिन संगम नगरी की अद्भुत ख्याति का एक नायाब प्रमाण भी है। इलाहाबाद के बमरौली एयरपोर्ट के नजदीक का यह गांव मोहम्मदपुर उमरी के नाम से जाना जाता है। यह गांव इन दिनों खूब चर्चा में है। ठंड के महीने में तो विदेशी सैलानी जुड़वा देखने के लिये खास तौर पर यहां पहुंचते है। ये भी पढ़ें- 'मैंने अपने पति को नहीं मारा, योगी जी इंसाफ दिलाओ'

गांव के कुछ दिलचस्प किस्से

गांव के कुछ दिलचस्प किस्से

मोहम्मदपुर उमरी गांव में खूब सारे किस्से जुड़वा लोगो से जुड़े हैं। जैसे शादी के बाद पत्नी को पति पहचानने में दिक्कत होती है। दुल्हन यह नहीं समझ पाती की आखिर उसका पति कौन है। किसी शरारत को करने के बाद छिप जाना और उसकी सजा दूसरे को मिलना। स्कूल में बच्चों से लेकर टीचर तक अपना सिर इन बच्चों की शरारती हरकतों पर खुजाते रहते हैं। यहां घर वालों को परेशान करने के लिये जुड़वे खुद ही अपने हमशक्ल के हिस्से का भी सामान इस्तेमाल कर लेते हैं तो खूब उधम मचती है। किसी को भी परेशान करना तो यहां के बच्चों का प्रिय खेल है। इस गांव में मां ही अपने बच्चों को ठीक ठीक पहचान पाती है। इस गांवों में रेशमा-शबाना, अफसाना- मुमताज, शमां-जरीन, अफरोज-फारोज, असलम-असगर, जुनैद-जामिन, सेबू-सोनू, अमित-विपिन, एतिशान-जीशान, आयशा-जरीन, सरफराज- अदनान जैसे दर्जनों जुड़वा लोगों से मिलकर लगता है कि कुदरत से बढकर कोई और कारीगर नहीं है।

अगर आप जाना चाहे तो

अगर आप जाना चाहे तो

इस गांव में पहुंचने के लिये सड़क मार्ग ही सबसे मुफीद है। लेकिन अगर आप हवाईजहाज से बमरौली एयरपोर्ट पर उतरते हैं तो एयरपोर्ट के बाहर टैक्सी पकड़ कर मात्र कुछ मिनट में आप इस गांव में पहुंच जायेंगे।
अगर आप ट्रेन से इलाहाबाद आये हैं तो जंक्शन से आप को बमरौली के लिये वाहन मिल जायेगा। लगभग 13 से 14 किलोमीटर की दूरी पर यह गांव मौजूद है। कौशांबी जाने वाली बस व छोटे वाहन भी एयरपोर्ट रोड से ही गुजरते हैं। जिससे आप सफर कर सकते हैं। वैसे आप इलाहाबाद, बस से आए हुये हैं तो सिविल बस स्टैंड से ही आपको कौशांबी की ओर जाने वाली गाड़ियों से गांव तक पहुंचना आसान होगा। फिलहाल निजी वाहन अथवा बुकिंग वाहन से इस गांव में जाने पर सहूलियत होगी। क्योकि मुख्य मार्ग यानि एयरपोर्ट रोड से हटकर कुछ दूरी पर यह गांव मौजूद है।

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