यूपी चुनाव की तैयारियों में जुटे बिहार के कई राजनीतिक दल, कितनी अहम साबित होगी नीतीश की JDU और मांझी की HAM
लखनऊ, 13 अगस्त: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर यूपी के रानीतिक दल तो अपनी सियासी गोटियां बैठाने में लगे हुए हैं। वहीं पड़ोसी राज्य बिहार की भी कई पार्टियां चुनाव में अपना दम दिखाने की तैयारी में जुट गई हैं। बिहार के सीएम नीतिश कुमार की जेडीयू हो या पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM)हो सभी पार्टियां चुनाव में उतरने की तैयारियों में जुटी हुई हैं। बिहार की विकाससील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने तो लखनऊ में अपना कार्यालय खोल दिया है। उसका दावा है कि जल्द ही मंडल और जिलों में भी पार्टी के कार्यालय खोल दिए जाएंगे।

एक अगस्त को जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने आधे घंटे तक यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस बैठक को सियासी हलकों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जीतन राम मांझी की पार्टी हम यूपी में अपनी सक्रियता बढ़ाने में जुटी है क्योंकि वह विधानसभा चुनाव में उतरना चाहती है और इसी इच्छा वह जाहिर कर चुके हैं। लखनऊ दौरे के दौरान संतोष सुमन ने अपने बयान में कहा था कि दलित समुदाय जो बिहार की तरह ही यूपी में भी तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई थी कि हम यूपी में होने विधानसभा चुनाव में उतरेगी। हालांकि सुमन ने तब यह भी स्पष्ट किया था कि अभी यह निश्चित नहीं है कि हम यूपी में अकेले चुनाव लड़ेगी या बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।
यूपी के 22 प्रतिशत दलित वोट बैंक पर राजनीतिक दलों की नजर
यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में बाहर से आने वाली पार्टियां यहां के 22 प्रतिशत दलित वोट बैंक पर अपनी नजर गड़ाए हुए हैं। यूपी की 403 विधानसभा सीटों में 86 सीटें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं और पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 71 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके अलावा दो सीटों पर बहुजन समाज पार्टी, सात सीटों पर समाजवादी पार्टी और 6 सीटों पर अन्य उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी।
राजनीतिक समीक्षक और वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकज ने कहा, '' दलित वोटरों पर मायावती की पकड़ ढीली हो रही है। यही वजह से है कि बाहरी पार्टियां भी अब यूपी में अपना भविष्य देखने लगी हैं। पहले दलित वोट बैंक पर मायावती का ही सिक्का चलता था लेकिन पिछले एक दशकों में इसमें काफी गिरावट आई है। दूसरे राज्यों की पार्टियां भी इसकी कमी का फायदा उठाना चाहती हैं।''
दलितों के अलावा ओबीसी वोटों पर भी दावेदारी ठोकेंगे बाहरी दल
यूपी विधानसभा चुनाव में दलित वोटों के अलावा ओबीसी सीटों पर भी बाहरी पार्टियां तगड़ी दावेदारी पेश करेंगी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू भी यूपी में चुनाव लड़ने का फैसला कर चुकी है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह फैसला लिया गया था। हालांकि जेडीयू का कहना है कि वह एनडीए के साथ भी मिलकर चुनाव लड़ सकती है लकिन यदि सीटों को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ तो वह अकेले ही अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरेगी।
जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं यूपी इन चार्ज के सी त्यागी ने वन इंडिया डॉट कॉम से बातचीत के दौरान कहा कि चुनाव में अभी काफी वक्त है। बीजेपी के साथ बातचीत चल रही है लेकिन अभी इसपर अंतिम निर्णय होना बाकी है। लेकिन इतना तय है कि समझौता हुआ तो बीजेपी के साथ लड़ेंगे नहीं तो अकेले चुनाव में जाएंगे। सीटों को लेकर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। समय आने पर सब कुछ तय हो जाएगा।
यूपी में 50 सीटों पर अहम भूमिका निभाता है कुर्मी समाज
दलित एवं ओबीसी के अलावा कुर्मी समुदाय भी यूपी में लगभग सात फीसदी हैं। यूपी में कुर्मी समुदाय लगभग 50 सीटों पर अच्छी भूमिका निभाता है। इनको लेकर भी राजनीतिक दल रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार भी कुर्मी समुदाय से आते हैं और बिहार से सटे पूर्वांचल के दर्जनभर जिलों में उनकी अच्छी फैन फालोइंग भी है जिसका फायदा उनकी पार्टी को मिल सकता है। संतकबीरनगर, मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर, बलियां, वाराणसी, उन्नाव, जालौन, फतेहपुर और प्रतापगढ़ समेत दो दर्जन जिले ऐसे हैं जहां यह समुदाय हर सीट पर लगभग 15000 से 20000 तक वोटर हैं जो चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं।
विकाससील इंसान पार्टी भी लड़ेगी चुनाव
बिहार के कैबिनेट मंत्री व विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश साहनी ने भी पिछले दिनों दावा किया था कि वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव उनकी पार्टी मजबूती से लड़ेगी। उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में 160 सीटें ऐसी हैं, जिनमें निषाद मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। उनकी पार्टी की नजर इन सीटों पर विशेष तौर पर है। इसके अलावा अन्य सीटों पर भी पार्टी संभावनाएं तलाश रही है।
लखनऊ में कार्यालय भी खोल चुकी है वीआईपी
उत्तर प्रदेश में पार्टी का विस्तार करने के लिए लखनऊ में प्रदेश कार्यालय खोला जा चुका है। अब मंडल व जिलों में कार्यालय खोले जाएंगे। साहनी ने बातचीत के दौरान कहा कि निषादों के आरक्षण की लड़ाई उनका मुख्य मुद्दा है। इसके लिए केंद्र सरकार से लड़ाई करेंगे। विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर हर मंडल व जिले में रैलियां भी आयोजित की जाएंगी।












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