कभी लोगों ने मारा था ताना,'कि हल चलाना ही है किस्मत', व्यक्ति ने उसे ही बनाई ताक़त और बन गया करोंड़ों का मालिक
Success Story of Strawberry Farmer Virender Chaurasia Maharajganj: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के नौतनवां तहसील के लक्ष्मीपुर ब्लाक के ग्राम मठिया ईदू, पोस्ट खालिक गढ़ के रहने वाले किसा वीरेंद्र कुमार चौरसिया की सफलता की कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। जीवन में आर्थिक अभाव, बाहर में नौकरी, लोगों का ताना और समय की मार के बाद भी वीरेंद्र ने हिम्मत नही हारी और आज सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं ।उन्होंने वन इंडिया हिंदी से खास बातचीत में अपनी पूरी कहानी सुनाई।
पिता परमेश्वर चौरसिया व माता ज्ञानमती देवी की चार संतानों में एक वीरेंद्र का बचपन आर्थिक तंगी में गुजरा। किसी तरह हाईस्कूल तक की शिक्षा ग्रहण कर उसे जीवन यापन के लिए बाहर जाना पड़ा। पंजाब और मुंबई महज 50 रुपए प्रतिदिन की नौकरी करने के बाद वीरेंद्र अपने गांव लौट आया। उसने खेती को अपनाया और पुस्तैनी जमीन पर खेती शुरू कर दी।
कभी लोगों ने मारा था ताना वीरेंद्र ने जब खेती करने का मन बनाया तो शुरुआत में ही कई कठिनाइयों का उसे सामना करना पड़ा। खेत में उसने हल से जुताई शुरू की और सब्जी की खेती प्रारंभ की। खेत में उसे हल चलाता देख लोग ताना मारने से पीछे नहीं हटे। लोगों ने कहा कि पढ़ लिखकर इसके किस्मत में हल चलाना ही है। वीरेंद्र ने लोगों की बात का बुरा नहीं माना और इसी हल को अपनी ताकत बना ली।

लोन पर लिया ट्रैक्टर
कुछ साल पहले वीरेंद्र ने लोन पर ट्रैक्टर लिया। घर वालों ने इसका विरोध किया। लेकिन वीरेंद्र को खुद पर विश्वास था। उसने ट्रैक्टर ली और खेती का दायरा बढ़ा दिया।
शुरू की स्ट्राबेरी की खेती
वीरेंद्र बताते हैं कि उन्होंने सन 2017 में देवरिया जिले में लगे किसान मेले में पहली बार स्ट्रॉबेरी को देखा। उसके बाद इसकी खेती करने के बारे में सोचने लगे। कई लोगों से बातचीत की और फिर उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर दी।
इतनी आती है लागत
वीरेंद्र 2.5 एकड़ में स्ट्राबेरी की खेती करते है। वह बताते है कि खेती करने के लिए 9 लाख की लागत आती है।
अक्टूबर माह में लगाते हैं पौधा
स्ट्राबेरी का पौधा अक्टूबर माह में लगाया जाता है। यह पौधा 45 से 60 दिन में फल देना शुरू कर देता है। 10 अप्रैल तक इसमें फल लगता है।
प्रतिदिन 2 से 3 कुंतल स्ट्रॉबेरी करते हैं सप्लाई
वीरेंद्र बताते हैं कि इस समय प्रतिदिन 120 ट्रे मार्केट में सप्लाई करते हैं। एक ट्रे 2 किलो का होता है। यानी कुल 2.5 कुंतल हो जाता है। किसी दिन तीन कुंतल तक सप्लाई करते है।
चार माह में 6 लाख हुआ मुनाफा वीरेंद्र बताते हैं कि चार माह में उन्हें स्ट्रॉबेरी की खेती से अब तक 6 लाख का मुनाफा हो चुका है। यह खेती फायदेमंद है।
लोगों को मिला रोजगार
स्ट्राबेरी की खेती में वर्तमान समय में 20 लोगों को रोजगार मिला है।
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