जरूरतें पूरी होने पर खिले दिव्यांगों के चेहरे, स्वाति सिंह बोलीं- यह हमारे लिए सेवाभाव है, वोट का जरिया नहीं
लखनऊ, 27 नवम्बर: उत्तर प्रदेश सरकार की मंत्री स्वाती सिंह ने शनिवार को अपने विधानसभा क्षेत्र में दिव्यांगजनों के लिए ट्राइ साइकिल, चलित दुकान, नौकरी के लिए आवेदन, स्मार्ट फोन, कम्बल वितरण दिव्यांग प्रमाण पत्र, बस व ट्रेन पास आदि के लिए स्टाल लगवाए थे। इस मौके पर स्वाती सिंह ने कहा कि हम सेवाभाव से काम करते हैं। यह हमारे लिए वोट का जरिया नहीं है। यह हमारा कर्तव्य है, जिसका निर्वहन कर रही हूं। मैं हमेशा यही कोशिश करती हूं कि जो भी योजनाओं से वंचित हैं, उन सभी तक योजना पहुंच सके।

''हमारा बच्चा जन्म से ही दिव्यांग है। चौदह वर्ष का हो चुका। कई बार सीएमओ आफिस गयी लेकिन वहां सर्टिफिकेट भी नहीं बन पाया। यह तो सरोजनगर विधायक व प्रदेश में राज्यमंत्री का दया भाव है, जो यहां शिविर लगवाईं और हमारा आवेदन भी ले लिया गया।'' यह कहते-कहते जन्म से ही बोलने, चलने में अक्षम बुद्धेश्वर से आयी आर्यन की मां की आंखों में आंसू छलक आये। यह हकीकत एक की नहीं, सैकड़ों दिव्यांगों की है, जो किसी न किसी उपकरण के लिए आये थे।
शनिवार को कानपुर रोड स्थित कृष्णानगर में उत्तम लान में दिव्यांगजनों के लिए एक ही जगह नौकरी से लेकर ट्राइ साइकिल, चलित दुकान, नौकरी के लिए आवेदन, स्मार्ट फोन, कम्बल वितरण दिव्यांग प्रमाण पत्र, बस व ट्रेन पास आदि के लिए स्टाल लगाये गये थे। स्वाती सिंह ने समर्थ दिव्यांगजन नाम से लगे शिविर में एक-एक दिव्यांगों से मिलकर उनकी व्यथा को समझा और खुद भी उनकी समस्याओं को सुलझाया।
वहीं कार्यक्रम में पीजीआई के पास से आये दोनों पैर से दिव्यांग कमलेश ट्राई साइकिल के लिए आवेदन किये थे। उन्होंने बताया कि स्वाती सिंह हर वक्त कमजोर वर्ग के लोगों की मदद करती रही हैं। इसी क्रम में उन्होंने यह लगवाया है। उन्होंने स्वाती सिंह को धन्यवाद देते हुए कहा कि अब तक हम बेरोजगार थे। इससे हमें अब रोजगार मिल जाएगा। इसी तरह के वक्तव्य गौरीगांव सरोजनीनगर से आये गोविंद प्रसाद का भी था।
महिलाओं और बच्चों के लिए भी उठाए जा रहे कदम
स्वाति सिंह ने यह भी कहा कि महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। महिलाओं के उत्थान के लिए और बच्चों के कल्याण के लिए हमेशा से कदम उठाते रहे हैं। कोविड महामारी के दौरान जिन बच्चों ने अपने माता पिता को खोया उनके लिए विभाग की तरफ से कदम उठाए गए हैं। उन बच्चों के लालन पालन के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर हर महीने चार हजार रुपए उनके अकाउंट में जमा कराए जाते हैं जिससे उनका खर्च चल सके। इसके अलावा जिन बच्चों ने अपने माता या पिता में से किसी एक को खोया है उसके अकाउंट में 2500 रुपए दिए जाते हैं।

9.5 लाख बच्चियों को मिल चुका है सुमंगला योजना का लाभ
उन्होंने कहा कि इस तरह की योजनाओं का लाभ हर उस गरीब परिवार को मिलता है जिसको इसकी जरूरत होती है। जहां तक कन्या सुमंगला योजना की बात की जाए तो सरकार ने अब तक 9.5 लाख बच्चियों को इसका लाभ मिल चुका है। आगे तक हमारा टारगेट है कि इसको 12 लाख तक लेकर जाने का लक्ष्य रखा गया है। यह केवल विभाग की उपलब्धि नहीं है बल्कि यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति की वजह से हुआ है।












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