UP सरकार का बड़ा दांव: 1 मई से मिशन मोड में 'School Chalo Abhiyan', हर बच्चे को स्कूल पहुंचाने का लक्ष्य
UP Government School Chalo Abhiyan: उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 1 मई 2026 से पूरे प्रदेश में 'स्कूल चलो अभियान' को मिशन मोड में शुरू करने का फैसला किया है।
अभियान का मुख्य लक्ष्य है कि मजदूर बस्तियों, ईंट भट्ठों, वंचित और पिछड़े समुदायों के हर बच्चे को स्कूल से जोड़ना, ताकि एक भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे। सरकार का साफ संदेश है कि शिक्षा का अधिकार अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर बच्चे तक पहुंचेगा।

School Chalo Abhiyan क्यों और कब शुरू हो रहा है?
बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। 1 मई से शुरू होने वाला यह अभियान विशेष रूप से उन बच्चों पर फोकस करेगा जो अभी भी शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हैं। यह अभियान 6 से 14 वर्ष के हर बच्चे को स्कूल पहुंचाने का सुनिश्चित लक्ष्य लेकर चल रहा है।
Vanchit Bachchon Ko School अभियान के प्रमुख टारगेट और प्राथमिकताएं?
सरकार ने अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं:
- वंचित समुदायों के बच्चों को प्राथमिकता: मजदूर बस्तियां, ईंट भट्ठे, दूरदराज के गांव और वंचित इलाकों के बच्चों की पहचान कर तुरंत दाखिला।
- दिव्यांग बच्चों को विशेष प्राथमिकता: उनके दाखिले को सबसे ऊपर रखा जाएगा।
- RTE अधिनियम के तहत लॉटरी से चुने गए पात्र बच्चों का 100% दाखिला सुनिश्चित करना।
- कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में लड़कियों के दाखिले को बढ़ावा।
- पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों को वापस स्कूल लाना।
- कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 में 100% संक्रमण (अगली कक्षा में जाना) सुनिश्चित करना, ताकि कोई बच्चा बीच में पढ़ाई न छोड़े।
अभियान कैसे चलेगा? जमीनी स्तर की रणनीति
सरकार ने जमीनी स्तर पर मजबूत रणनीति तैयार की है:
- हर गांव, हर वार्ड और हर बस्ती में डोर-टू-डोर सर्वे।
- बच्चों की सटीक पहचान और उनकी सूची तैयार करना।
- जागरूकता अभियान चलाकर अभिभावकों को शिक्षित करना।
- स्थानीय प्रशासन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी।
- अभियान की निरंतर निगरानी और रिपोर्टिंग।
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने साफ कहा, 'हर हाल में 6 से 14 वर्ष के हर बच्चे का दाखिला सुनिश्चित किया जाए।'
इसका मायने क्या है?
यह अभियान सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि शिक्षा क्रांति का हिस्सा है। UP में लाखों बच्चे अभी भी मजदूरी, घरेलू काम या सामाजिक-आर्थिक कारणों से स्कूल नहीं पहुंच पाते। 'स्कूल चलो अभियान' इन्हीं बच्चों को मुख्यधारा से जोड़कर उनके भविष्य को संवारने का प्रयास है।
विशेष रूप से लड़कियां, दिव्यांग बच्चे और वंचित समुदायों के बच्चे अब प्राथमिकता सूची में होंगे। इससे न सिर्फ साक्षरता दर बढ़ेगी, बल्कि राज्य के समग्र विकास में भी तेजी आएगी।
सरकार का वादा है कि एक भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं रहेगा। अभियान 1 मई से शुरू हो रहा है। जिला प्रशासन, शिक्षक और समुदाय - सभी को इस मिशन में अपनी भूमिका निभानी होगी।












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