मौज गिरी बाबा: यहां शिव के पैरों के निशान की होती है पूजा, सैकड़ों साल पुराना है मंदिर
इलाहाबाद। सावन के महीने में शिवलिंग की पूजा तो आपने देखी होगी लेकिन उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में ऐसी जगह जहां भगवान शिव के पैरों के निशान की पूजा की जाती है। कीटगंज स्थित यमुना तट पर आध्यात्म का अनोखा केंद्र और प्राचीन मूर्तिकला शैली व परंपरा का शिवालय है। इस शिवालय की सुरक्षा और संरक्षा विश्व प्रसिद्ध जूना अखाड़े के साधु-संत करते हैं। यहां बाबा मौजगिरी के रूप में भगवान शिव की मूर्ति और उनके पैरो के निशान स्थापित हैं।

मंदिर की विशेषता हैं शिव की प्रतिमा
इस मंदिर की विशेषता यह है कि शिवलिंग की जगह शिव की प्रतिमा ही प्राण प्रतिष्ठित है। प्रतिमा के समक्ष भगवान शिव के चरण स्थापित हैं और यहां प्रतिमा को स्पर्श नहीं किया जाता, बल्कि शिव चरण पर ही मस्तक रखा जाता है। यहां शिवलिंग की जगह शिव प्रतिमा की ही पूजा होती है। यहां प्रतिमा के चारों ओर काफी बड़ा चबूतरा बना हुआ है, जिस पर बैठकर धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। जूना अखाड़े की ख्याति पूरे विश्व में है और उनके अनुयायी भी पूरे विश्व में हैं।

कैसे हुई स्थापना
ऐसी मान्यता है कि सैकड़ों साल पूर्व प्रयाग के कुंभ में नागा साधु के रूप में सन्त मौजगिरी बाबा प्रयागराज पधारे थे। कुंभ प्रवास के दौरान यमुना तट के इस स्थल पर वह जब आए तो उन्होंने यहां बेहद ही शांत और दिव्य वातावरण पाकर ध्यान लगाया। ध्यान लगाते ही सन्त मौजगिरी को पता चला कि वह जिस जिस स्थान पर है वह भगवान दत्तात्रेय की तपोभूमि है और इसी स्थान पर भगवान दत्तात्रेय ने ऋषि भृगु को त्रिकालयज्ञ होने का ज्ञान दिया था। दिव्य स्थल का ज्ञान होते ही अपने नाम के अनुरूप बाबा मौज गिरि से चिमटा गाड़ दिया और धूनी रमा दी।

स्वयं शिव करते हैं वास
जूना अखाड़ा के संत बताते हैं कि बाबा मौजगिरी इसी स्थान पर ध्यान योग में बैठे रहे और धीरे-धीरे समय व्यतीत होता गया। ऐसी मान्यता है कि लगभग 500 वर्ष तक बाबा मौजगिरी इसी स्थान पर विराजमान रहे और इसी स्थान समाधि ले लिए। इस स्थान पर उन्होंने भगवान शिव की प्रतिमा व उनके चरण की स्थापना की थी जो आज भी मौजूद है और उनके नाम से ही इस स्थल को बाबा मौजगिरी के नाम से जाना जाता है। बता दें कि कुछ दिनों पहले ही बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी इस स्थान पर दर्शन करने पहुंचे थे।

देखें कैसे थे प्राचीन शिवालय
अगर आपको प्राचीन चीजों से लगाव है तो आप यहां देख सकते हैं कि प्राचीन शिवालय कैसे होते थे। आपको बाबा मौज गिरी मंदिर जरूर देखना चाहिए। यहां के कण-कण में आपको पौराणिकता नजर आएगी और शिव मूर्ति से लेकर यहां निर्मित प्रत्येक चीजें प्राचीन काल की एक झलक दिखाती हैं। इस मंदिर में आप स्वंय को चिंताओं से मुक्त महसूस करेंगे। बड़ी संख्या में लोग इस स्थान पर आते हैं और शिव चरण की पूजा अर्चना करने के बाद कुछ वक़्त बिताते हैं।












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