Sambhal की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान बवाल क्यों? SP समेत 15 पुलिसकर्मी घायल, पथराव, फूंकी गाड़ियां
Uttar Pradesh, Sambhal News: उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बहुल जिले संभल की रविवार (24 नवंबर) की सुबह बड़ी तनावपूर्ण साबित हुई। जब जिले की शाही जामा मस्जिद में कोर्ट के आदेश पर किए गए सर्वे के दौरान बड़ा बवाल खड़ा हो गया। इस दौरान पथराव, आगजनी और हिंसा की घटनाएं सामने आईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कड़ा कदम उठाया।
इस घटना में संभल के एसपी के पीआरओ के पैर में गोली लगी। पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लेकर भीड़ को खदेड़ने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि बवाल में एसपी समेत 15 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। आइए, जानते हैं इस पूरे मामले की शुरुआत से लेकर अब तक की स्थिति...

सर्वे के दौरान क्यों हुआ बवाल?
शाही जामा मस्जिद का सर्वे कोर्ट के आदेश पर किया जा रहा था। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद पहले श्री हरिहर मंदिर थी। कोर्ट ने मस्जिद का सर्वे करवाने और सात दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। 19 नवंबर को हुए पहले सर्वे के बाद, 24 नवंबर की सुबह दूसरे सर्वे के लिए टीम पहुंची। जैसे ही सर्वे टीम जामा मस्जिद पहुंची, वहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और विरोध करने लगे। देखते ही देखते विरोध बवाल में तब्दील हो गया। 26 नवंबर को सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी है और 29 को सुनवाई का वक्त तय है।
पथराव और हिंसा की घटनाएं
- सुबह 6:30 बजे सर्वे टीम के पहुंचने के बाद भीड़ ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए, और मस्जिद के बाहर करीब 2000 से अधिक लोग जमा हो गए। अचानक पथराव शुरू हो गया, जिससे पुलिस को पीछे हटना पड़ा।
- आगजनी: उग्र भीड़ ने पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी। गलियों में जगह-जगह पत्थर बिछ गए और हिंसा बढ़ने लगी।
- पुलिसकर्मी घायल: इस घटना में संभल के एसपी के पीआरओ के पैर में गोली लगी। पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लेकर भीड़ को खदेड़ने की कोशिश की।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
संभल के एसपी कृष्ण कुमार ने कहा, "स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने जरूरी कदम उठाए। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की मदद से उपद्रवियों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।" मुरादाबाद से डीआईजी मुनिराज जी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
राज्य सरकार और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
- जयवीर सिंह (राज्य मंत्री): "कोर्ट के आदेश का पालन हर हाल में किया जाएगा। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है।"
- डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य:"सरकार कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करेगी। जो भी बाधा डालने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।"

कोर्ट का आदेश और सर्वे की प्रक्रिया
- 19 नवंबर को हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि मस्जिद पहले श्री हरिहर मंदिर थी। कोर्ट ने इस दावे पर सर्वे करवाने का आदेश दिया।
- सर्वे के दौरान मस्जिद के सभी हिस्सों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की गई। ब यह रिपोर्ट 29 नवंबर को कोर्ट में पेश की जाएगी।
ये भी पढ़ें- Stone Pelting in Sambhal: शाही जामा मस्जिद का सर्वे करने पहुंची टीम पर संभल में जमकर पत्थरबाजी
हिंदू पक्ष का दावा
हिंदू पक्ष का कहना है कि शाही जामा मस्जिद में मंदिर के प्रमाण मौजूद हैं। इस दावे को सिद्ध करने के लिए उन्होंने बाबरनामा, आइन-ए-अकबरी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 150 साल पुरानी रिपोर्ट को आधार बनाया है।
क्या है हिंदू पक्ष के वकील का तर्क?
हिंदू पक्ष के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि 19 नवंबर को पारित न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आज एडवोकेट कमिश्नर द्वारा दूसरे दिन का सर्वेक्षण सुबह 7:30 बजे से 10:00 बजे तक किया गया। इस सर्वेक्षण के दौरान सभी विशेषताओं का अध्ययन किया गया। न्यायालय द्वारा निर्देशित वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी का अनुपालन किया गया है और अब यह सर्वेक्षण पूरा हो गया है। रिपोर्ट 29 नवंबर से पहले या 29 नवंबर को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
अगली सुनवाई 29 नवंबर को
मस्जिद पक्ष ने कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी। संभल की यह घटना कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। कोर्ट का आदेश पालन करवाने के साथ ही प्रशासन को शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाता है?
ये भी पढ़ें- संभल में बढ़ा तनाव, 10 हिरासत में, योगी सरकार ने संभाला मोर्चा












Click it and Unblock the Notifications