Sambhal News: संभल मामले पर सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए: प्रियंका गांधी वाड्रा
Sambhal Violence: उत्तर प्रदेश के संभल के जिले में हुई हिंसा ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मामले में योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना करते हुए, इसे विभाजनकारी राजनीति से जोड़कर देखा और सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की।
प्रियंका गांधी ने एक्स पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संभल में अचानक हुए संघर्ष के प्रति राज्य सरकार का दृष्टिकोण खेदजनक था। उन्होंने प्रशासन पर सभी पक्षों से परामर्श किए बिना संवेदनशील मामले में जल्दबाजी करने का आरोप लगाया, जिससे तनाव बढ़ गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सत्ता में रहते हुए भेदभाव और विभाजन फैलाना लोगों और राष्ट्र दोनों के लिए हानिकारक है।

घटना का पृष्ठभूमि और घटनाक्रम:
1. मामला:
- संभल में एक मुगलकालीन मस्जिद का न्यायालय आदेशित सर्वेक्षण हो रहा था।
- सर्वेक्षण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी।
2. हिंसा की घटना:
- रविवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान अशांति फैली, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई।
- कई पुलिसकर्मी और अन्य लोग घायल हो गए।
- प्रशासन ने कहा कि उपद्रवियों ने गोलीबारी की, जिससे पुलिसकर्मियों सहित 1520 लोग घायल हो गए।
- घायलों में पुलिस अधीक्षक के जनसंपर्क अधिकारी और सर्किल अधिकारी भी शामिल थे।
3. प्रशासन की प्रतिक्रिया:
- संभल तहसील में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं।
- स्कूलों को सोमवार को बंद कर दिया गया।
- 30 नवंबर तक बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
प्रियंका गांधी का बयान:
प्रियंका गांधी वाड्रा ने घटना के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए निम्नलिखित बातें कहीं:
1. सरकार की आलोचना:
- उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया।
- कहा कि सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सभी पक्षों से परामर्श किए बिना जल्दबाजी में निर्णय लिया।
- यह दृष्टिकोण राज्य में तनाव और हिंसा को बढ़ावा देने वाला साबित हुआ।
2. सर्वोच्च न्यायालय का आह्वान:
- प्रियंका ने सुप्रीम कोर्ट से मामले को संज्ञान में लेने और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की।
- उन्होंने प्रशासन के रवैये को खेदजनक बताया और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ कहा।
3. शांति की अपील:
- कांग्रेस महासचिव ने राज्य के निवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की।
- उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से केवल सामाजिक सौहार्द्र को नुकसान पहुंचेगा।
हिंसा में हताहत और प्रशासन की रिपोर्ट:
- मृतकों में नईम, बिलाल और नौमान (लगभग 25 वर्ष के) शामिल थे।
- घायलों में सुरक्षाकर्मियों के साथ एक उप जिलाधिकारी भी थे, जिनका पैर टूट गया।
- मंडल आयुक्त मुरादाबाद औंजन्ये कुमार सिंह ने बताया कि गोलीबारी और अन्य हिंसात्मक गतिविधियों ने स्थिति को बिगाड़ा।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया:
- कांग्रेस पार्टी ने भाजपा और आरएसएस पर शांति भंग करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह दावा किया कि:
- प्रदर्शनकारियों पर सीधी गोलीबारी की गई।
- प्रशासन हिंसा रोकने में नाकाम रहा और सरकार ने इसके लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए।
यह घटना उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करती है।
प्रियंका गांधी के बयान से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस इस मुद्दे को भाजपा सरकार की विफलता के रूप में पेश कर रही है।
हालांकि, इस प्रकार की घटनाओं का समाधान केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि प्रशासनिक संतुलन और कानूनी हस्तक्षेप से ही संभव है।
संभल की घटना ने सामाजिक सौहार्द्र को गहरे घाव दिए हैं। इस संवेदनशील मामले में न्यायपालिका का हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। साथ ही, सभी राजनीतिक दलों और प्रशासन को इस प्रकार के मुद्दों को भड़काने के बजाय समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।












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