Samajwadi Party: Atiq Ahmad के बहाने मुस्लिमों को रिझाने में जुटे Akhilesh Yadav?

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो मुस्लिम की इमेज को बरकरार रखना चाहते है। अतीक का बिना नाम लिए उसके समर्थन में खड़े होकर वो मुस्लिम वोट बैंक को अपने साथ जोड़े रखना चाहते हैं।

योगी आदित्यनाथ

Akhilesh Yadav on Atiq Ahmad: Uttar Pradesh में इस समय माफिया डॉन अतीक अहमद (Atiq Ahmad) को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। उमेश पाल मर्डर केस में आरोपी अतीक अहमद को यूपी पुलिस की टीम साबरमती जेल से लेकर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज आ रही है। इस हाइप्रोफाइल केस पर सभी राजनीतिक दलों की निगाहें टिकी हैं लेकिन सबसे बड़ी चुनौती अखिलेश यादव के सामने है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो यूपी में 2022 विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों का वोट अखिलेश को मिला था लेकिन आजम खान के साथ खड़ा न होने को लेकर उनपर काफी आरोप लगे थे। अब अखिलेश काफी सोच समझकर आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि उनके सामने 2024 में होने वाला आम चुनाव खड़ा है और वह नहीं चाहेंगे कि किसी एक बड़ी चूक की वजह से मुस्लिम वोट बैंक उनसे अलग हो।

योगी

अतीक अहमद के बचाव में खड़े हुए थे सपा नेता

उमेश पाल हत्याकांड के बाद से ही समाजवादी पार्टी काफी संभलकर अपना दांव खेल रही है। इस हत्याकांड का मामला अखिलेश यादव ने ही विधानसभा में उठाया था। हालांकि अतीक को लेकर अखिलेश ने यह भी कहा था कि वह बसपा में चला गया है इसलिए सरकार मायावती की वजह से उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है। इसके बाद सपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव प्रो रामगोपाल यादव ने भी एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अतीक के बेटे की एक दो दिन में हत्या हो सकती है। सपा के नेताओं का बयान अतीक के फेवर में आने लगा। हालांकि सपा के नेताओं की माने तो यह सपा की रणनीति का ही एक हिस्सा है।

मुस्लिम वोटों को सहेजने की अखिलेश की मजबूरी

वरिष्ठ पत्रकार राजीव श्रीवास्तव कहते हैं,

देखिए अतीक का मामला अखिलेश के लिए काफी अहम है। इसकी कई वजहें है। एक तो अखिलेश के सामने यह मजबूरी है कि वह 2024 से पहले मुस्लिम वोट बैंक को सहेज कर रखें। 2024 का चुनाव अखिलेश के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यूपी में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान अखिलेश को मुस्लिम समुदाय का भरपूर साथ मिला था लेकिन आजम खां के जेल प्रकरण में अखिलेश के खिलाफ माहौल बना था। आरोप लगाए गए कि वह आजम से जेल में मिलने नहीं गए। उनको मुस्लिमों की चिंता नहीं है। ऐसे में अखिलेश के लिए यह और भी अहम है कि वो इस बात का परसेप्शन बनाएं कि वह मुस्लिमों के साथ हैं।

अखिलेश यादव

मुस्लिम वोट छिटका तो अखिलेश यादव को होगा नुकसान

उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की आबादी लगभग 20 फीसदी है। अखिलेश को इस समुदाय का भरपूर साथ मिला था जब उन्होंने विधानसभा में 100 से ज्यादा विधानसभा सीटें जीती थीं। हालांकि सपा के नेता अंदरखाने यह बताते हैं कि मुस्लिम-यादव गठजोड़ सपा के लिए काफी अहम होगा। यदि लोकसभा चुनाव से पहले मुस्लिमों के भीतर सपा और अखिलेश यादव को लेकर निगेटिव छवि बनी तो इसका बड़ा नुकसान हो सकता है। अखिलेश को भी यह अंदाजा है कि मुस्लिम वोट को सहेजना उनके लिए कितना अहम है। इसलिए वो अतीक अहमद को लेकर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं।

मायावती

मायावती की मुस्लिम प्रेम से सतर्क हैं अखिलेश यादव

मुस्लिम वोट बैंक को लेकर अखिलेश के सामने परेशानियों कई हैं। सबसे बड़ी चुनौती बसपा की मुखिया मायावती हैं जो अतीक को लेकर बीजेपी पर लगातार हल्ला बोल रही हैं। चुनाव के दौरान अतीक की पत्नी शाइस्ता ने बसपा ज्वाइन की थी और चर्चा यह भी थी कि बसपा शाइस्ता को प्रयागराज से मेयर पद का उम्मीदवार बना सकती है लेकिन उससे पहले ही उमेश पाल कांड ने सारा खेल बिगाड़ दिया। मायावती जिस तरह से अतीक को लेकर लगातार भाजपा पर हमलावर हैं उससे अखिलेश के लिए यह मजबूरी भी हो गई है कि वह अतीक का नाम लिए बगैर उनका उनके साथ खड़े हों। रविवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भी अखिलेश ने गाड़ी पलटने की बात कहकर मुस्लिमों के साथ खड़े होने की ही कोशिश की थी।

अखिलेश यादव

प्रो मुस्लिम छवि को बचाने की कोशिश में अखिलेश

मायावती के बाद अखिलेश के सामने बड़ी चुनौती ये भी है कि वो अपनी प्रो मुस्लिम छवि को इस चालांकी से बरकरार रखें कि ओबीसी का वोट उनसे न छिटके। मुस्लिम को साधने में यदि ओबीसी वोट ने उनका साथ छोड़ दिया तो उनको दूसरे मोर्चे पर भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ओबीसी को अपने पाले में लाने के लिए ही सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को आगे लाकर श्रीरामचरितमानस के मुद्दे को हवा दी गई ताकि इससे ओबीसी वर्ग की बीजेपी के प्रति नाराजगी बढ़े। हालांकि इस मुद्दे को सपा कितना लंबा खींच पाएगी यह कह पाना अभी जल्दबाजी होगी।

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