Samajwadi Party: स्वामी प्रसाद को छूट देकर UP में नॉन यादव वोट सहेजने की कोशिश में अखिलेश यादव?
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव यूपी में नॉन यादव ओबीसी की राजनीति कर रहे हैं। वह यादवों के साथ गैर यादव ओबीसी को अपने पाले में लाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। लेकिन इसमें वो कितना सफल होंगे ये तो समय बताएगा।

Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के मुखिया अखिलेश यादव ने बसपा से आए वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) को एक तरह से खुली छूट दे रखी है। स्वामी प्रसाद ने पहले श्रीरामचरितमानस को लेकर विवादित बयान दिया फिर उसके बाद 'मिले मुलायम कांशी राम, हवा में उड़ गए जयश्रीराम' नारे को ताजा कर यूपी में नॉन यादव ओबीसी के बीच एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की थी। इन सबके बीच अखिलेश यादव का स्वामी को छूट देना इस बात के संकेत दे रहा है कि वह यूपी में नॉन यादव ओबीसी को समेटने की रणनीति पर काम कर रहे हैं लेकिन दूसरी तरफ उनके सामने सवर्ण वोट बैंक के छिटकने का भी खतरा बना हुआ है।

यूपी में नॉन यादव वोट बैंक को साधने का प्रयास
यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव अब गैर यादव ओबीसी को समेटने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। अभी बहुत हद तक नॉन यादव ओबीसी वोट बैंक पर बीजेपी का कब्जा है। अखिलेश इस वोट बैँक को साधना चाहते हैं इसलिए उन्होंने अपने खास नेता स्वामी प्रसाद को पूरी छूट दे रखी है। पहली बार स्वामी प्रसाद ने जब श्रीराम चरित मानस को लेकर विवादित बयान दिया तब भी अखिलेश ने इसका विरोध नहीं किया बल्कि उल्टे स्वामी प्रसाद का कद बढ़ाकर राष्ट्रीय महासचिव बना दिया। खुद अखिलेश ने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया और रामचरितमानस का विरोध न करके उस चौपाई का विरोध किया जिसको लेकर बवाल मचा हुआ था।

'मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गए जयश्रीराम' से कितना फायदा
श्रीराम चरितमानस विवाद के बाद स्वामी प्रसाद ने जब दूसरा बयान दिया तब अखिलेश यादव खुद उस कार्यक्रम में मौजूद थे। एक तरफ स्वामी प्रसाद मंच से 'मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गए जयश्रीराम' के नारे लगवा रहे थे तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव मंच पर बैठे मुस्कुरा रहे थे। यानि अखिलेश ने स्वामी के बयान को अपनी सहमति दे रखी थी। इस बयान के बहाने स्वामी प्रसाद मौर्य नॉन यादव के साथ दलितों को भी यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि सपा ही एक मात्र ऐसी पार्टी है जो बीजेपी का मुकाबला कर सकती है। हालांकि सार्वजनिक मंचों से बोला जाने वाला यह बयान अखिलेश को फायदा पहुंचाएगा या नुकसान इसके लिए इंतजार करना होगा।

अखिलेश के सामने सवर्ण वोट बैंक छिटने का भी खतरा
स्वामी प्रसाद मौर्य के जयश्रीराम वाले बयान को लेकर वरिष्ठ पत्रकार राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि अखिलेश के सामने खतरा तो है। सार्वजनिक मंचों से जब इस तरह के नारे लग रहे हैं तो इसका साइडइफेक्ट भी हो सकता है। इससे इस बात का खतरा बना रहेगा कि जो सवर्ण उनके साथ हैं वो भी उनसे या सपा से दूरी बना सकते हैं। हालांकि इस बात का एहसास अखिलेश यादव को भी है इसीलिए अखिलेश ने उन सवर्ण नेताओं के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जिन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य के श्रीरामचरितमानस वाले बयान का विरोध किया था। यानी वह सवर्ण खेमे को भी उतनी ही छूट दे रहे हैं जितना स्वामी प्रसाद मौर्य को।

2024 के लिहाज से नॉन यादव पॉलिटिक्तस अखिलेश के लिए अहम
देश में अगले साल आम चुनाव होने हैं। आम चुनाव से पहले अखिलेश यादव अब नॉन यादव-दलित और मुस्लिम वोटों को सहेजने का प्रयास कर कर रहे हैं। अखिलेश ने प्रयागराज वाली घटना सदन में उठाई लेकिन जब यूपी पुलिस अतीक को गुजरात से लेकर यूपी आ रही थी तब सपा के नेताओं ने बिना नाम लिए बगैर मुस्लिम समुदाय को खुश करने के लिए कई बयान दिए। इनमें रामगोपाल का बयान भी शामिल है। सपा को पता है कि सिर्फ यादव वोट बैंक से यूपी की सियासत में ज्यादा दिन तक जिंदा रहना मुष्किल है इसलिए अब यादव के साथ नॉन यादव पर पार्टी फोकस कर रही है। विधानसभा चुनाव 2022 में मुस्लिम का साथ अखिलेश को मिला ही था ऐसा दावा पार्टी करती रही है।












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