शराब-सट्टा के लिए पहले से कुख्यात इस इलाके को अब पावर कट, चिट्टा और क्रीम ने बर्बाद कर दिया

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के पर्वतीय क्षेत्र इन दिनों स्मैक तस्करों का गढ़ बनता जा रहा है। यहां पर नशा करने के विभिन्न पदार्थों को सीधे उसके असली नाम से नहीं पुकारा जाता, बल्कि तस्करों द्वारा ऐसे कोड वर्ड तैयार किए गए हैं जो आम आदमी की समझ से परे होते हैं। जनपद के थाना मिर्जापुर क्षेत्र में ऐसा कोई नशीला पदार्थ नहीं है, जिसका क्रय, विक्रय या तस्करी ना होती हो। इन नशीले पदार्थों के बाद तस्करी कर लाखों रुपए कमाते हैं।

saharanpur drug is being sold by the name of power cut chitta cream and etc

उल्लेखनीय है कि थाना मिर्जापुर क्षेत्र पहले से ही गो तस्करी, गोकशी, सट्टा, शराब आदि के लिए कुख्यात था। इन सबके साथ-साथ कारोबार नए-नए तरीकों से बढ़ते इन धंधों ने उद्योग का रूप ले लिया है। अब आधुनिक युग में नए नशे का चलन बढ़ा है, जिसके चलते शराब, चरस, गांजा, डोडा पोस्त, स्मैक आदि का कारोबार धड़ल्ले से बेरोकटोक किया जा रहा है। नशीले पदार्थ के क्रय विक्रय और तस्करी से तस्करों को लाखों का फायदा हो रहा है। वह भी एक ही दिन में। इतने मोटे फायदे के लिए अब तस्करों की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। इतना ही नहीं नशीले पदार्थों के शिकार लोग खुद भी हो रहे हैं।

तस्करों ने अपने हिसाब से नशीले पदार्थ का कोड बनाया हुआ है, जैसे पावर कट, चिट्ठा, मुठा, बत्ती, हाथों मल, क्रीम आदि। नशीले पदार्थों की तस्करी कर तस्कर इन्हें मोटे भाव से बेचते हैं। जैसे रेट प्रति किलो मुठा 20,000 रुपये से 25,000 रुपये, चरस 8000 रु से 10000 रुपये, क्रीम 35000 रु से 40 हजार रुपये, बत्ती 12000 रुपये, हाथों मल 40000 रुपये/किलो आदि।

स्मैक की कैटेगरी- पावर, कट, स्मैक, चिट्ठा, रेट प्रति ग्राम : पावर 400 रुपये ग्राम, कट:150 रुपये प्रति ग्राम। स्मेक::1800 प्रति ग्राम से 5000 प्रति ग्राम,चिट्ठा::8000 रु/ग्राम है। नशीले पदार्थों की तस्करी हिमाचल प्रदेश, हरियाणा व राजस्थान आदि प्रदेशों से की जाती है। इन में बत्ती मुठा वह हाथों मल उत्तर प्रदेश में ही मिल जाता है, जबकि नेपाल व हिमाचल प्रदेश से चरस तथा राजस्थान से क्रीम आदि का कारोबार किया जाता है।

तस्करी करने वालों के हाथ भी लंबे हो गए हैं। उनकी पकड़ अधिकारियों से लेकर नेताओं तक है। इसी से उनका गोरखधंधा बड़ी आसानी से चल जाता है साथ ही लाखों रुपये की आमदनी होती है। इन नशीले पदार्थों की गिरफ्त में महिलाएं और बच्चे भी आ रहे हैं। कुछ बुद्धिजीवियों का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते इस कारोबार से आने वाली पीढ़ियां बचपन में ही बूढ़ी होती जा रही है।

पुलिस की नाक के नीचे गोरखधंधा चल रहा है, लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ रखे बैठी है। क्षेत्र में जागरूकता की कमी के चलते भी इस कारोबार में बढ़ोत्तरी हो रही है। लोग इसका शिकार होते जा रहे हैं। थाना अध्यक्ष मिर्जापुर योगेश शर्मा ने कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी किसी भी सूरत में नहीं होने दी जाएगी। तस्करों के खिलाफ अभियान चलाकर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

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