दलितों के उद्धार के बहाने उनके वोट बैंक पर RLD की नजर, जयंत चौधरी ने क्यों चला ये नया दांव
लखनऊ, 12 जुलाई : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाला राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) अब दलित समुदाय को पार्टी से कनेक्ट करने के लिए नई कवायद शुरू कर दी है। रालोद एक तरफ जहां पश्चिमी यूपी में युवा पंचायत के माध्यम से युवाओं को जोड़ने में जुटी है वहीं दूसरी ओर पार्टी के चीफ जयंत चौधरी ने अब नया दांव खेला है। चौधरी ने अपने सभी विधायकों को पत्र लिखकर कहा है कि वह अपनी विधायक निधि का 35 फीसदी हिस्सा अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए खर्च करें। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो जयंत चौधरी के इस पत्र के पीछे का मकसद भी यही है कि वो आम चुनाव से पहले अपने वोट बैंक में वृद्धि करना चाहते हैं। अब इसमें कितनी कामयाबी मिलेगी यह तो समय ही बताएगा।

दलितों में पैठ बनाने के लिए विधायक निधि का सहारा
यूपी विधानयभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली रालोद अब दलितों को कनेक्ट करेगी। इसके लिए प्रयास भी शुरू कर दिया है। रालोद को डर है कि विधानसभा चुनाव में दलितों का एक वर्ग खासतौर से जाटव बीजेपी के साथ जुड़ रहा है। दलितों के बीजेपी की तरफ झुकाव को देखते हुए भी रालोद ने अब काउंटर अटैक करते हुए पार्टी के विधायकों को दलितों को साधने का जिम्मा सौंपा है। इसके लिए उन्होंने विधायक निधि का सहारा लिया है। लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि पश्चिम में दलित और जाटों के बीच की जो खाई है क्या जयंत के इस कदम से पट पाएगी।

आम चुनाव से पहले दलित वोट में सेंध की कोशिश
रालोद के मुखिया जयंत चौधरी ने सपा के साथ गठबंधन कर पश्चिमी यूपी में आठ सीटों पर अपना कब्जा जमाया था। सपा के साथ गठबंधन में शामिल होने के साथ ही अब रालोद अपना विस्तार भी करना चाहती है इसलिए उसने ये दांव चला है। हालांकि जयंत के इस दांव के पीछे रालोद के विधायकों की अपनी चिंताएं भी हैं। रालोद के एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यदि हम 35 फीसदी दलितों पर खर्च कर देंगे तो अपने जाट समुदाय का क्या होगा। उनके अंदर भी नाराजगी बढ़ेगी। 35 फीसदी खर्च करने के बाद भी दलित हमे वोट देगा कि नहीं देगा इसकी कोई गारंटी भी नहीं है।

दलितों पर 35 फीसदी खर्च कर पाएंगे रालोद विधायक ?
अपना दल के संस्थापक और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के दिग्गज नेता सोन लाल पटेल की जयंती मनाने के कुछ दिनों बाद, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने सभी पार्टी विधायकों को अपने विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास कोष (एमएलएएलएडी) का 35 प्रतिशत खर्च करने का निर्देश दिया। अनुसूचित जाति (एससी) के कल्याण के लिए। पार्टी नेताओं ने कहा कि यह कदम 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले दलितों के लिए पार्टी की आउटरीच योजना का एक हिस्सा है।

सकारात्मक बदलाव तभी आएगा जब कमजोर वर्ग को लाभ मिलेगा
पार्टी अध्यक्ष जयंत चौधरी ने रालोद के विधायक दल के नेता राजपाल बाल्यान को पत्र लिखा और उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा कि रालोद के सभी विधायक निर्देश का पालन करें। चौधरी ने अपने पत्र में लिखा, "सभी रालोद कार्यकर्ताओं का सामाजिक न्याय में अटूट विश्वास है और हमारा मानना है कि बड़े सामाजिक सुधार और सकारात्मक बदलाव तब तक संभव नहीं हैं जब तक कि अधिक से अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ कमजोर और वंचित वर्गों तक नहीं पहुंच जाता।"

दलितों के कल्याण के बहाने अपने वोट बढ़ाने की चिंता
उन्होंने कहा, "इस उद्देश्य के लिए, हमारी पार्टी के विधायक अपने स्थानीय क्षेत्र विकास कोष का 35 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति (एससी) के कल्याण पर अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में खर्च करेंगे," उन्होंने कहा। चौधरी ने अपनी पार्टी के विधायकों को विधानसभा में एससी और पिछड़े वर्गों के मुद्दों को उठाने, उन घटनाओं पर नजर रखने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए काम करने का भी निर्देश दिया।












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