यूपी: कैबिनेट मंत्री रीता जोशी ने स्पेशल कोर्ट में किया सरेंडर, मिली जमानत
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री डॉ रीता बहुगुणा जोशी ने अपने विरुद्ध जारी गैर जमानती वारंट के मामले में खुद को प्रयागराज स्थित एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट में सरेंडर किया है। सरेंडर के साथ जोशी के वकील की ओर से स्पेशल कोर्ट में तत्काल जमानत की अर्जी दी गई थी, जिसे स्पेशल कोर्ट ने स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत दे दी है। गौरतलब है कि निषेधाज्ञा उल्लंघन और तोड़फोड़ के मामले में का मुकदमा प्रयागराज स्थित एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट में चल रहा है। स्पेशल कोर्ट ने गैर जमानती वारंट रद्द करते हुए 20-20 हजार रुपये की दो-दो जमानत और व्यक्तिगत मुचलका पर रीता जोशी की जमानत स्वीकार कर लिया है। मामले पर सुनवाई स्पेशल जज पवन कुमार तिवारी ने की।

क्या है मामला
लखनऊ के वजीरगंज थाना क्षेत्र में 16 फरवरी 2010 को तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षा डॉ. रीता जोशी ने निषेधाज्ञा तोडकर लाउडस्पीकर पर भाषण दिया था । इन पर यह भी आरोप था कि भाषणबाजी के बाद में भारी संख्या में रीता जोशी व उनके समर्थक सीएम आवास की ओर बढ़े तब पुलिस से इनकी भिड़ंत हुई। इसी मामले में रीता जोशी पर निषेधाज्ञा उल्लंघन समेत मारपीट आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। यह मुकदमा 2010 से लंबित था, स्पेशल कोर्ट बनने के बाद इस मुकदमे को प्रयागराज ट्रांसफर किया गया। जिस पर सुनवाई के बाद अब रीता जोशी को जमानत दी गई है।
किस आधार पर मिली जमानत
रीता जोशी ने दिन में लगभग 11.30 बजे स्पेशल कोर्ट में सरेंडर किया, जिसके बाद उन्हे लगभग तीन घंटे तक न्यायिक अभिरक्षा में रखा गया। जब मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई तो बचाव पक्ष ने कोर्ट में मुकदमे को लेकर सफाई दी कि राजनीतिक विद्वेष के कारण उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। दलीलों में बताया गया कि घटना वाले दिन रीता जोशी ने कोई अपराध नहीं किया था, केवल शांतिपूर्ण तरीके से सभा कर रही थीं। पुलिस ने पानी की बौछार कर लाठीचार्ज किया था।
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