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यूपी चुनाव 2022 में काशी के जरिए पूर्वांचल को साधने में लगे पीएम मोदी, क्या 'डबल इंजन' फिर ला पाएगी भाजपा?

वाराणसी, 23 दिसंबर। उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव 2022 में सत्ताधारी भाजपा पूर्वांचल के इलाके में सबसे ज्यादा एक्टिव दिख रही है। इस क्षेत्र में पिछले दो महीनों में एक्सप्रेसवे समेत अन्य परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के लिए केंद्र की मोदी सरकार के मंत्री समेत प्रदेश सरकार के मंत्री लगातार आए। पूर्वांचल को तोहफे देने का सिलसिला भाजपा की केंद्र और प्रदेश की सरकार जारी रखे हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में काशी का दो बार दौरा कर चुके हैं। 13 दिसंबर को वो काशी विश्वनाथ धाम का भव्य उद्घाटन करके गए और 23 दिसंबर को वो काशी को डेयरी प्लांट का तोहफा देकर गए। वाराणसी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है और पूर्वांचल क्षेत्र में बहुत अहमियत रखने वाला जिला है। पूर्वांचल में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ गोरखपुर भी है। यूपी विधानसभा की 403 सीटों में से पूर्वांचल में 164 सीटें हैं। आखिर भाजपा पूर्वांचल पर ही अभी सबसे ज्यादा दांव लगाती क्यों दिख रही है?

अखिलेश गठबंधन से मुकाबले की चुनौती

अखिलेश गठबंधन से मुकाबले की चुनौती

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पूर्वांचल की 164 सीटों में से 115 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन उस चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन में ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा भी थी। 2022 चुनाव की तैयारी कर रही सपा ने इस बार सुभासपा के साथ गठबंधन किया है। भाजपा के साथ गठबंधन में संजय निषाद की निषाद पार्टी और अनुप्रिया पटेल का अपना दल (एस) है। राजभरों का वोट भाजपा के लिए कितना अहम है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों ने पूर्वांचल में हुई अपनी रैलियों में राजभरों के अराध्य राजा सुहेलदेव का नाम लिया। सपा ने पूर्वांचल में इस बार ऐसा जाति समीकरण बनाया है जिसकी काट के लिए भाजपा ने इस क्षेत्र में पूरा जोर लगा दिया है। पूर्वांचल में अखिलेश के गढ़ आजमगढ़ से जहां गृह मंत्री, मुख्यमंत्री ने सपा पर निशाना साधा। वहीं प्रधानमंत्री ने गोरखपुर की रैली में सपा की लाल टोपी को रेड अलर्ट कह दिया। भाजपा के बड़े नेता पूर्वांचल आकर सपा पर परिवारवादी और माफियावादी होने का आरोप बार-बार लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल में पिछले कुछ हफ्तों में ही लगातार उद्घाटन और शिलान्यास की झड़ी लगा दी।

काशी में आकर पीएम दे रहे पूर्वांचल और यूपी को मैसेज

काशी में आकर पीएम दे रहे पूर्वांचल और यूपी को मैसेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने गंगा एक्सप्रेस का शिलान्यास किया। फिर काशी में आकर उन्होंने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भव्य लोकार्पण किया। इस मौके पर उनके गंगा में डुबकी लगाने, पूजा-अर्चना करने, श्रमिकों के साथ भोजन करने और लोगों को संबोधित करने का व्यापक कवरेज किया गया। संसदीय क्षेत्र को काशी विश्वनााथ धाम देकर पीएम मोदी ने भाषण में विकास और विरासत दोनों को संभालने की बात कही। वे दस दिन बाद फिर लौटकर काशी आए और डेयरी प्लांट का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास से वो लोग आहत हैं जो जाति, पंथ और धर्म के आधार पर राजनीति करते हैं। पीएम ने कहा कि वे लोग नहीं चाहते हैं कि यूपी का विकास हो, इसकी पहचान हो। भाषण में उन्होंने परिवारवाद और माफियावाद का जिक्र किया। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के जरिए पीएम मोदी ने जहां हिंदुत्व और विकास को साथ में जोड़ा वहीं डेयरी प्लांट का उद्घाटन करते हुए उन्होंने केंद्र और प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन सरकार और विकास का मैसेज दिया।

यूपी चुनाव में भाजपा: केंद्र और प्रदेश का डबल इंजन

यूपी चुनाव में भाजपा: केंद्र और प्रदेश का डबल इंजन

23 दिसंबर को काशी आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिन लोगों के शब्दकोश, बॉडी लैंग्वेज और विचारों में परिवारवाद और माफियावाद है उनको पूर्वांचल के विकास से समस्या है, यहां तक कि उनको काशी विश्वनाथ धाम से भी समस्या है। जितना हमें जनता का आशीर्वाद मिलेगा उतना ही उन लोगों का गुस्सा आसमान छुएगा। पीएम ने कहा कि मैं डबल इंजन के डबल पावर, काशी और यूपी के डबल विकास की बात करता हूं। प्रधानमंत्री पूर्वांचल और यूपी की जनता को यह मैसेज दे रहे हैं कि अगर प्रदेश में भाजपा सरकार बनेगी तो केंद्र की भाजपा सरकार के साथ मिलकर डबल इंजन की सरकार, डबल विकास करेगी। 23 दिसंबर की रैली में पीएम मोदी ने गाय की भी चर्चा की। कहा कि गाय कुछ लोगों के लिए गुनाह हो सकती है, हमारे लिए गाय माता है। इस रैली में पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भी याद किया और किसानों को साधने की कोशिश की। कहा कि डेयरी प्लांट से बनारस ही नहीं, आसपास के जिलों के किसानों और पशुपालकों को भी लाभ होगा। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने यूपी चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है, अब जनता इस पर क्या और कितना आशीर्वाद देगी, यह तो 2022 का चुनाव परिणाम बताएगा। लेकिन उससे पहले इतना तो नजर आ रहा है कि 2022 यूपी चुनाव के महाभारत को भाजपा आसान मुकाबला मानकर नहीं चल रही है।

लखीमपुर खीरी कांड और किसान आंदोलन का असर

लखीमपुर खीरी कांड और किसान आंदोलन का असर

23 दिसंबर को काशी में हुई रैली में पीएम मोदी ने भाषण को किसानों पर ही फोकस रखा। तीन कृषि कानूनों के बाद हुए किसान आंदोलन और लखीमपुर खीरी में किसानों को केंद्रीय मंत्री के वाहन से कुचले जाने की घटना के बाद वेस्ट यूपी और अवध समेत अन्य इलाकों के किसान भाजपा सरकार से नाराज बताए जा रहे हैं। वेस्ट यूपी में जाट और मुसलमान एक हो गए हैं और सपा के साथ इस बार रालोद का गठबंधन है। भाजपा इस कोशिश में है कि पूर्वांचल में अगर भाजपा बेहतर प्रदर्शन करेगी तो यूपी में फिर से सरकार बनाना आसान हो जाएगा। इसलिए काशी में मोदी और गोरखपुर में योगी की ताकत से भाजपा पूर्वांचल को साधने में लगी है। हिंदुत्व और विकास की बात कर वह सभी जातियों के वोटों को अपनी तरफ आकर्षित करने में लगी है। पूर्वांचल में जाति समीकरण बहुत मायने रखते हैं, ऐसे में पीएम मोदी हिंदुत्व और विकास की बात कर और सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के नारों से भाजपा के पक्ष में माहौल बना रहे हैं ताकि सभी जातियों का वोट हासिल हो सके। यूपी चुनाव में मोदी फैक्टर की परीक्षा तो होगी ही, साथ ही 2022 का यह मुकाबला भाजपा की विरासत के विकास के लिए भी बहुत अहम है।

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