स्वर्वेद महामंदिर धाम में बोले पीएम मोदी- मैं दिल्ली में रहकर भी काशी पर नजर बनाए रखता हूं
वाराणसी, दिसंबर 14। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काशी दौरे का आज दूसरा दिन है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी मंगलवार को स्वर्वेद महामंदिर धाम पहुंचे, जहां उन्होंने सद्गुरु सदाफलदेव विहंगम योग संस्थान की 98वीं वर्षगांठ के मौके पर समारोह को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा कि आज काशी बदली-बदली सी नजर आती है। पीएम मोदी ने कहा कि कल काशी ने महादेव भव्य विश्वनाथ धाम समर्पित किया है।

पीएम ने सद्गुरु सदाफल देव जी को किया नमन
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मैं आज इस मंच से सद्गुरु सदाफल देव जी को नमन करता हूं और उनकी आध्यात्मिक उपस्थिति को प्रणाम करता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि मैं स्वतंत्रदेव जी महाराज और श्री विज्ञानदेव जी महाराज का भी आभार व्यक्त करता हूं जो इस परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं और नया विस्तार दे रहे हैं।
पीएम मोदी के संबोधन की बड़ी बातें:-
- पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मैं जब काशी आता हूं तो यहां चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा जरूर करता हूं। इतना ही नहीं जब मैं दिल्ली में भी होता हूं तो वहां से भी मेरा प्रयास रहता है कि काशी में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करता रहूं।
- पीएम मोदी ने कहा कि कल रात 12 बजे के बाद जैसे ही मुझे अवसर मिला, मैं फिर निकल पड़ा था अपनी काशी में जो काम चल रहे हैं, जो काम किया गया है, उन्हें देखने के लिए।
- प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आज आप सभी से कुछ संकल्प लेने का आग्रह करना चाहता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि हमें संकल्प लेना चाहिए कि सद्गुरु के संकल्पों की सिद्धि हो, जिसमें देश के मनोरथ भी शामिल हों। पीएम ने आगे कहा कि हमें ऐसा संकल्प लेना चाहिए कि जिनके पूरे होने से अगले दो साल में गति दी जाए, मिलकर पूरा किया जाए।
- पीएम मोदी ने कहा कि एक संकल्प ये हो सकता है कि हमें बेटी को पढ़ाना है, उसका स्किल डवलपमेंट भी करना है। अपने परिवार के साथ साथ जो लोग समाज में ज़िम्मेदारी उठा सकते हैं, वो एक दो गरीब बेटियों के स्किल डवलपमेंट की भी ज़िम्मेदारी उठाएं।
- एक और संकल्प हम ले सकते हैं और वो है पानी बचाने का। हमें अपनी नदियों को, गंगा जी को, सभी जलस्रोतों को स्वच्छ रखना है।
- पीएम मोदी ने कहा कि बनारस जैसे शहरों ने मुश्किल से मुश्किल समय में भी भारत की पहचान के, कला के, उद्यमिता के बीजों को सहेजकर रखा है। जहां बीज होता है, वृक्ष वहीं से विस्तार लेना शुरू करता है।












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