VIDEO: पाकिस्तानियों को मिली भारतीय नागरिकता, बरेली में रहेंगे

वतन वापसी के दौरान वो गर्भवती थी और उनकी बेटी महक का जन्म पाकिस्तान की सरजमीं पर हुआ। लिहाजा कानून महक भी पाकिस्तानी नागरिकता के साथ पैदा हुई, मां-बेटी और उनके वालिद के बीच सरहद की दीवारें आड़े आने लगी

बरेली। हिंदुस्तानी हुकूमत ने नागरिकता पाने की जद्दोजहद में वर्षों से जुटे कई परिवारों की समस्या का हल किया है। बरेली में ऐसे ही चार परिवारों के पाकिस्तान में रह रहे 6 लोगों को भारतीय नागरिकता दी है। इसमें से एक परिवार की मां-बेटी को 31 साल के लंबे अरसे के बाद भारतीय होने का गौरव मिला है।

Pakistani Family got Indian Citizenship, they will stay in Bareilly

देखिए VIDEO...

बरेली के मलूकपुर निवासी यूसुफ अली खान का निकाह उनके बड़े भाई ने पाकिस्तान में करांची की रहने वाली शबाना से महज इसलिए कर दिया ताकि दोनों रिश्तेदारों में मेल-जोल बढ़े और रिश्तों की कड़ियों को और मजबूती मिले। 24 अगस्त 1986 में निकाह के बाद शबाना अपने शौहर के साथ लॉन्ग टर्म वीजा पर बरेली रहने आ गई। लेकिन वीजा की मियाद खत्म होने पर शबाना को वापस पाकिस्तान जाना पड़ा। वतन वापसी के दौरान वो गर्भवती थी और उनकी बेटी महक का जन्म पाकिस्तान की सरजमीं पर हुआ। लिहाजा कानून महक भी पाकिस्तानी नागरिकता के साथ पैदा हुई और दोनों मां-बेटी और उनके वालिद के बीच सरहद की दीवारें आड़े आने लगी।

तमाम दुश्वारियों के बीच कभी शबाना अपनी बेटी के साथ बरेली तो कभी यूसुफ अपने बच्चों से मिलने करांची आते-जाते रहे। इस दौरान यूसुफ ने अपने बच्चों को भारतीय नागरिकता दिलाने के लिए लंबी कागजी लड़ाई लड़ी और एंबेसी के चक्कर काटे लेकिन किसी भी सूरत में उनकी मुश्किलें आसान होती नजर नहीं आईं। 31 साल बाद उनको अपनी पत्नी और बच्चों के साथ स्थाई तौर पर रहने का हक हासिल हुआ और वो भी हिंदुस्तान की सरजमीं पर। सरकार ने शबाना और उसकी बेटी महक को भारतीय नागरिकता देकर हिंदुस्तानी कहलाने का हक दे दिया। अपनी शादी की 31वीं सालगिरह पर ये खुशी पाकर यूसुफ का परिवार फूला नहीं समा रहा है।

यूसुफ ने अपनी बेटी की भी शादी इंडिया में कर दी। महक की सात और पांच साल की दो बेटियां हैं जिनका जन्म बरेली में ही हुआ। निकाह के नौ साल पूरे होने के बावजूद नागरिकता को लेकर हो रही जद्दोजहद के बीच कई बार महक को इस बात का संशय रहा कि अगर उसे भारतीय नागरिकता नहीं मिली तो उसे अपने बच्चों से दूर रहना होगा। लेकिन वक्त की करवट ने महक के संशय को भी मिटा दिया। इस परिवार की खुशियां लौटाने के साथ-साथ बरेली में तीन और परिवारों के चार लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई है। जिनमें दो परिवारों में पाकिस्तान की सिंध निवासी दो महिलाएं शामिल हैं।

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