ओवैसी ने अतीक के परिवार को शामिल कर चला सहानुभूति बटोरने का दांव, निगाहें पूर्वांचल की कई विधानसभा सीटों पर
लखनऊ/ अयोध्या: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अब सभी सियासी दल उन चेहरों को भुनाने में जुटे हुए हैं जिन्हें उनकी कौम या समाज आइकन मानता है। कुछ दिनों पहले ही समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने पूर्वांचल के माफिया और मऊ सदर सीट से विधायक शिवगतुल्लाह अंसारी को पार्टी में शामिल कराया था। इसके बाद अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को प्रयागराज से जेल में बंद पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके परिवार का पार्टी में स्वागत किया। दरअसल , राजनीति में अपराधियों का संरक्षण कोई नई बात नहीं है।

फूलपुर से समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद अीतक अहमद जेल में बंद हैं। वह कई आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं और उसे योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा एक गैंगस्टर नामित किया गया है। उससे जुड़ी कई संपत्तियों को ध्वस्त कर दिया गया है और उसके करीबी लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। हालांकि अतीक अहमद का प्रयागराज और सुल्तानपुर जिले में कई विधानसभा सीटों पर उनका वर्चस्व है। सपा में रहते हुए उन्होंने फूलपुर से चुनाव भी जीता था। यहां की कई विधानसभाएं मुस्लिम बाहुल्य हैं जहां अतीक अहमद का सीधा दखल है।
'देश के लिए प्यार'
अहमद की पत्नी, शाइस्ता परवीन, जिन्होंने ओवैसी के साथ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने अपने पति द्वारा एक संदेश पढ़ा कि वह एआईएमआईएम में क्यों शामिल हो रहे हैं। अहमद ने कहा कि उन्होंने ओवैसी के देश, अल्पसंख्यकों और दलितों के प्रति प्रेम और उनके "संविधान में विश्वास" को देखते हुए पार्टी में शामिल करने का विचार किया था।

ओवैसी ने गिनाया बीजेपी का आपराधिक इतिहास
ओवैसी ने अहमद का बचाव करते हुए कहा कि, उनको किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया था। यूपी में बीजेपी के 37 फीसदी विधायक हैं। पार्टी के 116 सांसदों को आपराधिक आरोप लगे हुए हैं। भोपाल की भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर पर लगे आतंकी आरोपों और 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े 77 मामलों की ओर इशारा किया, जिन्हें आदित्यनाथ सरकार ने वापस ले लिया था। उन्होंने कहा कि आदित्यनाथ ने गोरखपुर में एक कथित अभद्र भाषा से जुड़े एक मामले में खुद पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
अतीक का बचाव करते हुए ओवैसी ने कहा कि, '' इससे यह स्पष्ट होता है कि यदि किसी राजनेता का नाम प्रज्ञा, अजय, कुलदीप, संगीत, सुरेश या कपिल है, तो वह लोकप्रिय नेता होगा। लेकिन अतीक और मुख्तार नाम वालों को बाहुबली कहा जाएगा।"
प्रयागराज के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक पीएन द्विवेदी कहते हैं कि,
''ओवैसी ने अतीक परिवार को केवल चुनाव के लिहाज से ही शामिल करवाया है। इससे प्रयागराज, फूलपुर, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर की लगभग दस सीटों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। इन जिलों की कई विधानसभाएं ऐसी हैं जो मुस्लिम बाहुल्य है और वहां अतीक को लेकर आइकन मानते हैं। इसका लाभ ओवैसी की पार्टी को मिल सकता है।''












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