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नोएडा डेकेयर में 15 माह की मासूम पर अत्याचार: काटने के निशान, खौफनाक फुटेज से खुला राज! हिरासत में अटेंडेंट

Noida Daycare Torture: नोएडा के सेक्टर-137 में पारस टिएरिया आवासीय परिसर के एक डेकेयर में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। 15 महीने की मासूम बच्ची की जांघों पर काटने के निशान और सीसीटीवी फुटेज में एक महिला अटेंडेंट द्वारा बच्ची को मारने और जमीन पर गिराने का खौफनाक दृश्य देख माता-पिता और पूरा परिसर स्तब्ध है।

नोएडा पुलिस ने अटेंडेंट को हिरासत में लिया है, और डेकेयर मालिक पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह मामला अब सोशल मीडिया पर तूल पकड़ रहा है। आइए, इस भयावह खबर को मसालेदार अंदाज में जानते हैं!

Noida Daycare Torture

क्या हुआ मासूम के साथ?

21 मई 2025 से बच्ची के माता-पिता संदीप और उनकी पत्नी अपनी 15 महीने की बेटी को पारस टिएरिया डेकेयर में रोजाना दो घंटे के लिए छोड़ते थे। 4 अगस्त 2025 को संदीप ने अपनी बेटी की जांघों पर अजीब निशान देखे। पहले उन्हें लगा कि यह एलर्जी हो सकती है, लेकिन डेकेयर के शिक्षकों ने भी इन निशानों पर ध्यान दिया। संदीप ने तुरंत बच्ची को डॉक्टर के पास ले गए, जहां पता चला कि ये काटने के निशान हैं।

इस खुलासे से हैरान माता-पिता ने डेकेयर के सीसीटीवी फुटेज की मांग की। फुटेज ने जो सच्चाई दिखाई, उसने उनके होश उड़ा दिए। महिला अटेंडेंट बच्ची के चेहरे पर जानबूझकर मार रही थी और उसे जमीन पर गिरा रही थी। फुटेज में बच्ची रोते हुए दिख रही थी, जो किसी भी माता-पिता के लिए दिल तोड़ने वाला दृश्य था।

माता-पिता की शिकायत, पुलिस की कार्रवाई

संदीप ने तुरंत सेक्टर-142 पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई। थाना प्रभारी प्रभात दीक्षित के नेतृत्व में पुलिस ने महिला अटेंडेंट को हिरासत में लिया। बच्ची की मेडिकल जांच कराई गई, जिसमें काटने के निशान की पुष्टि हुई। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि डेकेयर मालिक चारू ने एक नाबालिग अटेंडेंट को इस संवेदनशील काम के लिए कैसे नियुक्त किया। डेकेयर का लाइसेंस और नियमों का पालन भी जांच के दायरे में है।

संदीप का दर्द: ' हम टूट चुके हैं'

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संदीप ने बताया, ' हम रोजाना 2,500 रुपये देकर अपनी बेटी को दो घंटे के लिए डेकेयर छोड़ते थे। हमें बताया गया था कि वहां तीन शिक्षक हैं, लेकिन बच्ची एक नाबालिग अटेंडेंट के हवाले थी। मालिक कहता था, 'आपका बच्चा खुश है।' लेकिन फुटेज ने सब उजागर कर दिया।' संदीप ने कहा कि जब उन्होंने मालिक और अटेंडेंट से सवाल किया, तो उन्हें गाली-गलौज और धमकियों का सामना करना पड़ा।

संदीप ने आगे कहा, ' यह हमारे लिए बहुत कठिन समय है। मैं काम पर नहीं जा सका, मेरी पत्नी रातभर सो नहीं पाई। हम चाहते हैं कि मालिक और अटेंडेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि कोई और बच्चा इस दर्द से न गुजरे।' उन्होंने यह भी खुलासा किया कि परिसर के एक अन्य परिवार ने बताया कि उनके बच्चे के साथ भी डेकेयर में ऐसी ही घटना हुई थी, और वे जल्द शिकायत दर्ज करेंगे।

डेकेयर की लापरवाही: नाबालिग अटेंडेंट का सच

पुलिस ने खुलासा किया कि जिस अटेंडेंट ने बच्ची को मारा, वह नाबालिग है। संदीप ने सवाल उठाया, ' इतने संवेदनशील काम के लिए नाबालिग को कैसे रखा गया? डेकेयर को ऐसे लोगों की भर्ती करनी चाहिए, जिनमें बच्चों की देखभाल का धैर्य हो।' पुलिस अब डेकेयर के संचालन और कर्मचारी भर्ती प्रक्रिया की जांच कर रही है। अगर लाइसेंस में अनियमितता मिली, तो डेकेयर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

क्यों अहम है यह मामला?

पारस टिएरिया डेकेयर जैसे कई आवासीय डेकेयर दिल्ली-एनसीआर में कामकाजी माता-पिता के लिए जरूरी हैं। लेकिन इस घटना ने सुरक्षा, कर्मचारी सत्यापन, और निगरानी पर सवाल उठा दिए हैं। यह मामला माता-पिता के लिए एक चेतावनी है कि डेकेयर चुनते समय लाइसेंस, कर्मचारी पृष्ठभूमि, और सुरक्षा उपायों की जांच जरूरी है।

पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 323 (मारपीट), 341 (गलत तरीके से रोकना), और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। जांच में डेकेयर के अन्य कर्मचारियों और मालिक की भूमिका की भी पड़ताल होगी। अगर और शिकायतें सामने आईं, तो यह मामला और बड़ा हो सकता है।

क्या आपने भी कभी डेकेयर में ऐसी लापरवाही देखी है? और क्या इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम जरूरी हैं? कमेंट्स में अपनी राय शेयर करें!

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