मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में सामने आया सच, क्यों छोड़ा हिंदू परिवारों ने कैराना
उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश का राजनीति में भूचाल मचाने वाले 'कैराना से हिंदुओ के पलायन' मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी रिपोर्ट दी है।

इस साल जून में उत्तर प्रदेश के शामली जिले का कैराना तब चर्चा में आया था, जब वहां के भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने 346 हिंदू परिवारों की एक सूची सार्वजनिक करते हुए कहा कि ये परिवार दूसरे समुदाय के डर से पलायन कर गए हैं।
शामली प्रशासन ने सांसद की सूची के आधार पर जब जांच की तो इसमें सांसद के दावे को गलत पाया। प्रशासन की जांच में कहा गया कि जिन परिवारों के पलायन की बात कही गई है, उनमें से ज्यादातर कई साल पहले रोगार और दूसरी वजहों से कैराना छोड़ चुके हैं।
कई हिंदू परिवारों ने भी सांसद की बात का विरोध किया और कहा कि कस्बे से पलायन का कारण रोजगार और तरक्की है ना कि दूसरे समुदाय का डर।
जमकर हुई थी राजनीति
सांसद के सूची सौंपने और हिंदू परिवारों के पलायन की बात कहने के बाद इस पर जमकर राजनीति हुई। दूसरी पार्टियों ने इसे भाजपा की सांप्रदायिकरण की कोशिश बताया।
कई राजनीतिक पार्टियों ने इस मामले में अपनी तरह से जांच की थी, और अपने-अपने तर्क रखे थे। साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले की जांच की थी।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सांसद की सूची में दिए गए पलायन करने वाले लोगों, तीन रिहायशी इलाकों और अन्य लोगों से बात कर कैराना के पलायन का सच जानना चाहा। इस मामले में अब आयोग ने रिपोर्ट दी है।
दंगा विस्थापितों के डर से हुआ पलायन
आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर कानून व्यवस्था और मुजफ्फरनगर दंगो के दौरान विस्थापित होकर आए 25 से 30 हजार लोग कैराना से दूसरे समुदाय के लोगों के पलायन की वजह हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने कैराना छोड़ दूसरे राज्यों और शहरों में रह रहे लोगों से फोन के जरिए भी कैराना से पलायन की वजह जानी।
कस्बे की बद से बदतर कानून व्यवस्था को पलायन की सबसे बड़ी वजह माना गया साथ ही मुजफ्फरनगर दंगे के बाद आकर बसे विस्थापित भी पलायन की बड़ी वजह बताए गए गए हैं।
आयोग ने पुलिस महानिदेशक से मांगी रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक दंगों के दौरान आकर बसे 25 से 30 हजार लोगों के कारण कैराना का सामाजिक संतुलन गड़बड़ा गया। इन विस्थापितों के युवा लोग हिंदू समुदाय की लड़कियों के साथ खराब बर्ताव करते हैं, जिससे दूसरे समुदाय के मन में डर पनपा, जो पलायन की बड़ी वजह बनी।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस भेजकर मामले में अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने इसके लिए आठ सप्ताह का समय दिया है।












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