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'Mulayam के सैफई महोत्सव ने बर्बाद की जिंदगी, Akhilesh Yadav ने डकारे मेरे 15 लाख', 22 साल से तड़प रहा सपाई

Mulayam-Akhilesh Yadav Saifai Mahotsav Fake Check: समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के लिए समाजवाद कोई किताबों का सिद्धांत नहीं था, बल्कि जमीन से जुड़ा व्यवहारिक दर्शन था। इसका जन्म उन लोगों की आवाज बनने के लिए हुआ, जो लंबे समय तक सत्ता और व्यवस्था से बाहर रखे गए। लेकिन, क्या मुलायम के जाते ही, अखिलेश यादव भूल गए समाजवादी कर्तव्य? ये शब्द सुल्तानपुर के सपा जिला सचिव मोहम्मद अली के हैं, जो कभी मुलायम सिंह यादव के करीबी थे और आज उनके बेटे अखिलेश यादव को 'दगाबाज' बता रहे हैं।

मोहम्मद अली का दावा है कि 2004 के सैफई महोत्सव (Saifai Mahotsav)में होर्डिंग लगाते समय करंट लगने से घायल होने के बाद मुलायम सिंह ने 15 लाख 5 हजार रुपये की मदद मंजूर की, लेकिन अखिलेश यादव ने 'फर्जी चेक' थमाकर धोखा दिया। 22 साल से आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन पैसा नहीं। इलाज में दशक गुजरा, परिवार बर्बाद हुआ, और अब BJP से मदद की उम्मीद। क्या ये सपा की 'कार्यकर्ता भक्ति' का सच है? Oneindia Hindi के Explainer में पीड़ित सुल्तानपुर सपा जिला सचिव मोहम्मद अली से Exclusive बातचीत में जानते हैं- वफादार के बेकर्दी की कहानी...

Mulayam-Akhilesh Yadav Saifai Mahotsav Fake Check

Who Is Mohammad Ali: मोहम्मद अली कौन हैं? सपा से जुड़ाव और शुरुआती सफर

मोहम्मद अली सुल्तानपुर जिले के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के सुरौली गांव के रहने वाले हैं। 1990 के दशक में किशोरावस्था में वो लखनऊ आ गए, जहां मोटर मैकेनिक का काम करते हुए गाने गाते थे। उनकी आवाज ने सपा के वरिष्ठ नेता बेनी प्रसाद वर्मा (Senior leader Beni Prasad Verma) का ध्यान खींचा, जिन्होंने उन्हें मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) से मिलवाया। मुलायम ने अली को अपने आवास पर रखा और छोटे-मोटे काम सौंपे। 2003 में मुलायम तीसरी बार मुख्यमंत्री बने, तो 2004 में अली को सचिवालय में अस्थाई इंट्री ऑपरेटर की नौकरी मिली। अली मुलायम के साथ मंच पर गाने गा चुके हैं और सपा से गहरा जुड़ाव रखते हैं। 2021 में उन्हें सुल्तानपुर सपा कार्यकारिणी में जिला सचिव बनाया गया। लेकिन हादसे ने सब बदल दिया।

Saifai Mahotsav controversy

Saifai Mahotsav Accident: सैफई महोत्सव में करंट का झटका, दो मौतें और जिंदगी भर का दर्द

दिसंबर 2004 में सैफई महोत्सव की तैयारियों के दौरान अली और उनके साथी होर्डिंग लगा रहे थे। लोहे का फ्रेम ऊपर से गुजर रही बिजली की तार से टकराया, करंट लगने से दो युवक (बहराइच के उमेश यादव और राकेश यादव) की मौके पर मौत हो गई। अली गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें पहले लखनऊ, फिर दिल्ली AIIMS और मुंबई के हिंदुजा हॉस्पिटल ले जाया गया। हादसे ने उन्हें हेड इंजरी दी, जो आज भी परेशान करती है - नाक से खून आता है, काम नहीं कर पाते। इलाज में करीब एक दशक वेंटिलेटर पर गुजरा। पत्नी ने गहने बेचे, पिता ने जमीन गिरवी रखी। माता-पिता अब गुजर चुके हैं।

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मुआवजे की कहानी: 15 लाख का 'फर्जी चेक' और आश्वासनों का सिलसिला

तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने ही मुख्यमंत्री राहत कोष से 15 लाख 5 हजार रुपये मंजूर किए। 6 सितंबर 2004 को जिलाधिकारी सुल्तानपुर ने SBI को चेक (बैंक ड्राफ्ट नंबर 178912) जमा करने का पत्र जारी किया, लेकिन मौके पर न मिलने के कारण चेक वापस हो गया। मृतकों के परिवारों को 20-20 लाख मिले, लेकिन अली को कुछ नहीं। 2016 में डिस्चार्ज होने पर अली मुलायम से मिले, जिन्होंने अखिलेश (तब मुख्यमंत्री) को निर्देश दिए। 19 मई 2016 को मुख्यमंत्री कार्यालय से लखनऊ निदेशक को पत्र भेजा गया, लेकिन पैसा नहीं आया। अखिलेश ने कई बार मुलाकात में आश्वासन दिए, 2022 विधानसभा चुनाव के बाद 'पार्टी फंड' से देने का वादा किया, लेकिन चुनाव हारने के बाद भूल गए। आपको बता दें कि यह वही साल था, जब मुलायम सिंह का निधन (10 अक्टूबर 2022) को हुआ। अली का आरोप:- 'फर्जी चेक थमाकर धोखा दिया गया।' 22 साल से सपा कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन।

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कोर्ट की लड़ाई: रिट पिटीशन और खारिजी

2023 में अली ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट-सी नंबर 1293 ऑफ 2023 दाखिल की। याचिकाकर्ता:- मोहम्मद अली। प्रतिवादी: कलेक्टर सुल्तानपुर, अखिलेश यादव और अन्य। मांग:- 15 लाख 5 हजार रुपये जारी करने का निर्देश। कोर्ट (जस्टिस संगीता चंद्रा और मनीष कुमार) ने 24 फरवरी 2023 को याचिका खारिज कर दी, क्योंकि ये 'गलत' थी और सिविल कोर्ट में जाना चाहिए। कोर्ट ने अखिलेश के 2022 चुनाव बाद पार्टी फंड से देने के वादे को नोट किया, लेकिन कोई राहत नहीं दी।

Saifai Mahotsav controversy

हाल के डेवलपमेंट: BJP से मुलाकात और नई उम्मीद

13 जनवरी 2026 को दिल्ली BJP मुख्यालय में अली ने लोकसभा सदस्य संबित पात्रा से मुलाकात की। पात्रा ने मुआवजा पहुंचाने और इंसाफ दिलाने का आश्वासन दिया। अली अब CM योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से उम्मीद लगाए हैं, कहते हैं:- 'सपा से कुछ नहीं मिला, अब बाबा (योगी) से उम्मीद है।' सपा पर आरोप:- कार्यकर्ताओं को धोखा देती है।

Saifai Mahotsav controversy

परिवार की स्थिति: आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य संकट

अली के परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। एक बेटी का निकाह हो चुका, दो की जिम्मेदारी बाकी है। हेड इंजरी से काम नहीं कर पाते - नाक से खून आता है, PGI लखनऊ के चक्कर काटते हैं। मासिक दवा 7 हजार रुपये की। पत्नी और बेटियां घरों में काम करके गुजारा चला रही हैं। 25 किलो राशन कोटेदार से मिलता है। सपा से कोई मदद नहीं।

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सपा के लिए खेल बने मोहम्मद अली?

मोहम्मद अली बताते हैं कि मुलायम सिंह यादव के आवास में रहते हुए कई छोटे-मोटे काम सौंपे गए। किसी भी कार्यक्रम में गाना गवाया जाता था। आवास में रहते हुए सपा के एक प्रमुख राजनेता अब्बू आजमी (Abu Azmi), वरिष्ठ नेता बेनी प्रसाद वर्मा (Beni Prasad Verma), सपा के कद्दावर नेता अहमद हसन (Ahmed Hassan), लोकसभा के सदस्य व सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल (Naresh Uttam Patel) ने भी अपने मनोरंजन का हिस्सा बनाया।

घटना की टाइमलाइन: स्टेप बाय स्टेप

क्रमांक तारीख/वर्ष मुख्य घटना डिटेल
1
1990s लखनऊ आगमन मोटर मैकेनिक और गायक के रूप में मुलायम से जुड़े।
2
2003-2004 नौकरी और महोत्सव सचिवालय में नौकरी, सैफई में ड्यूटी।
3
दिसंबर 2004 हादसा करंट से घायल, दो मौतें। 15 लाख मंजूर, लेकिन चेक वापस।
4
2004-2016 इलाज हिंदुजा हॉस्पिटल में वेंटिलेटर, परिवार बर्बाद।
5
2016 डिस्चार्ज और अपील मुलायम से मिले, अखिलेश को निर्देश; 19 मई को पत्र, लेकिन पैसा नहीं।
6
2021 जिला सचिव सपा में पद मिला, लेकिन मुआवजा नहीं।
7
2022 चुनाव वादा अखिलेश ने पार्टी फंड से देने का आश्वासन, लेकिन भूल गए।
8
2023 कोर्ट केस रिट पिटीशन खारिज।
9
13 जनवरी 2026 BJP मुलाकात संबित पात्रा से आश्वासन।

उठते सवाल: क्या सपा कार्यकर्ताओं को धोखा दे रही?

  • मुआवजा क्यों नहीं मिला? दस्तावेज मौजूद, फिर देरी क्यों?
  • अखिलेश का 'फर्जी चेक' आरोप:- क्या ये राजनीतिक बदला है या सच?
  • PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समुदाय से अली, सपा की PDA राजनीति पर सवाल।

मोहम्मद अली की कहानी सपा की 'कार्यकर्ता भक्ति' पर सवाल उठाती है। 22 साल का दर्द अब कविताओं और आरोपों में निकल रहा है। क्या न्याय मिलेगा? समय बताएगा।

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