MLA Pooja Pal के पति राजू की कैसे हुई थी मौत? जानकर कांप जाएगी रूह, उठ जाएगा BSP-SP से भरोसा!
Pooja Pal Husband Raju Pal Murder: समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी विधायक पूजा पाल को 14 अगस्त 2025 को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया, जब उन्होंने विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'शून्य सहिष्णुता' नीति की तारीफ की और गैंगस्टर अतीक अहमद के खात्मे के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। यह वही अतीक अहमद था, जिसे पूजा पाल ने अपने पति, तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की 2005 में हुई निर्मम हत्या का जिम्मेदार ठहराया था।
पूजा के इस बयान ने सपा नेतृत्व को असहज कर दिया, और अखिलेश यादव की अगुवाई वाली पार्टी ने तुरंत उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। लेकिन इस सियासी ड्रामे के पीछे की कहानी रूह कंपा देने वाली है-एक ऐसी हत्या की दास्तान, जिसने प्रयागराज की गलियों को खून से रंग दिया और सपा-बसपा की माफिया के प्रति कथित नरमी को उजागर किया। आइए जानते हैं राजू पाल की हत्या की वह खौफनाक कहानी और इसके पीछे की सियासत...

Raju Pal की हत्या: 19 गोलियों की गूंज
25 जनवरी 2005 को प्रयागराज (तब इलाहाबाद) की सड़कों पर एक खौफनाक वारदात ने पूरे शहर को दहला दिया। बसपा के नवनिर्वाचित विधायक राजू पाल, जो कुछ ही दिन पहले 15 जनवरी को पूजा पाल से शादी के बंधन में बंधे थे, स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल से अपनी क्वालिस गाड़ी में निकले। उनके साथ दो गाड़ियां-एक क्वालिस और एक स्कॉर्पियो-थीं।
राजू खुद क्वालिस चला रहे थे, और उनके बगल में उनके दोस्त की पत्नी रुखसाना बैठी थीं, जो रास्ते में मिली थीं। काफिला जीटी रोड पर बढ़ रहा था, तभी एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने उनकी गाड़ी को ओवरटेक किया। इससे पहले कि राजू कुछ समझ पाते, एक गोली सामने के शीशे को चीरती हुई उनके सीने में जा धंसी।
गाड़ी धीमी हुई, और स्कॉर्पियो से पांच हमलावर उतरे। तीन ने राजू पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कीं, जबकि बाकी दो ने पीछे की गाड़ियों पर फायरिंग की। इस हमले में राजू पाल, उनके साथी संदीप यादव, और गनर देवीलाल की मौके पर ही मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम में राजू के शरीर से 19 गोलियां निकाली गईं, जो इस हत्या की क्रूरता को दर्शाती हैं। यह हमला न केवल एक विधायक की हत्या थी, बल्कि प्रयागराज की सियासत में माफिया के दबदबे का खौफनाक प्रदर्शन था।
अतीक अहमद (Atiq Ahmed): माफिया से सियासत तक
इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी था गैंगस्टर अतीक अहमद, जो उस समय प्रयागराज की अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह था। 1970 के दशक के अंत में, जब इलाहाबाद में नए कॉलेज और उद्योग फल-फूल रहे थे, अतीक ने अपराध की दुनिया में कदम रखा। 1979 में, 17 साल की उम्र में 10वीं फेल होने के बाद, उसने लूट, अपहरण, और रंगदारी जैसे अपराध शुरू किए। उसी साल उस पर पहला हत्या का केस दर्ज हुआ, और धीरे-धीरे वह शहर के कुख्यात बाहुबली चांद बाबा को चुनौती देने लगा। सात सालों में अतीक ने न केवल अपराध की दुनिया में अपनी बादशाहत कायम की, बल्कि बड़े सरकारी ठेके हासिल कर मोटा पैसा कमाया। उसका खौफ इतना था कि पुलिस और स्थानीय सियासतदां भी उसे शह देने लगे।
1989 में अतीक ने सपा के टिकट पर पहली बार इलाहाबाद पश्चिम से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीता। इसके बाद वह लगातार पांच बार (1989-2004) इस सीट से विधायक रहा। 2004 में, वह सपा के टिकट पर फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद चुना गया, जिसके बाद इलाहाबाद पश्चिम सीट खाली हो गई। अतीक ने अपने भाई अशरफ को इस सीट से उपचुनाव लड़वाया, लेकिन बसपा के राजू पाल ने अशरफ को हरा दिया। यह हार अतीक के लिए सियासी और निजी अपमान थी, और यही राजू पाल की हत्या का कारण बना।
सियासत और माफिया का गठजोड़: BSP-SP की भूमिका?
राजू पाल की हत्या ने न केवल अतीक के अपराधी साम्राज्य को उजागर किया, बल्कि बसपा और सपा की सियासत पर भी सवाल उठाए। उस समय उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार थी, और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे (29 अगस्त 2003 से 13 मई 2007)। इससे पहले, मायावती की बसपा सरकार (3 मई 2002 से 29 अगस्त 2003) थी। राजू पाल, जो पहले अतीक के करीबी थे, ने बसपा के टिकट पर 2004 का उपचुनाव जीता। उनकी जीत ने अतीक के सियासी दबदबे को चुनौती दी, और उनकी हत्या ने सपा की सरकार में माफिया-राजनीति के कथित गठजोड़ को उजागर किया।
सपा पर आरोप लगा कि उसने अतीक जैसे बाहुबलियों को संरक्षण दिया। वहीं, बसपा पर सवाल उठे कि राजू पाल की हत्या के बाद मायावती ने इस मामले में पर्याप्त सक्रियता नहीं दिखाई। 2016 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस हत्याकांड की जांच शुरू की, और 2024 में सात लोगों-रंजीत पाल, आबिद, फरहान अहमद, इसरार अहमद, जावेद, गुलहसन, और अब्दुल कवि-को हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप में दोषी ठहराया गया।
अतीक और अशरफ की हत्या: योगी सरकार का एक्शन
फरवरी 2023 में, राजू पाल हत्याकांड के प्रमुख गवाह उमेश पाल की प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद, अप्रैल 2023 में, अतीक और उनके भाई अशरफ को मेडिकल जांच के लिए ले जाते समय तीन हमलावरों ने गोली मारकर मार डाला। यह घटना कैमरे में कैद हुई और अतीक के बेटे असद के झांसी में कथित पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद हुई। योगी सरकार ने इसकी उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए, और न्यायिक आयोग ने 'पूर्व नियोजित साजिश' या 'पुलिस लापरवाही' की संभावना से इनकार किया।
पूजा पाल ने विधानसभा में कहा, 'जब कोई अतीक जैसे अपराधियों के खिलाफ नहीं लड़ा, तब योगी जी ने मुझे और कई अन्य महिलाओं को न्याय दिलाया।' लेकिन सपा को यह बयान बगावत लगा, और उन्होंने पूजा को निष्कासित कर दिया।
राजू पाल की हत्या की कहानी न केवल अतीक अहमद के आतंक की गवाही देती है, बल्कि सपा और बसपा की सियासत में माफिया के प्रभाव को भी उजागर करती है। पूजा पाल का योगी की तारीफ करना और सपा का त्वरित निष्कासन इस बात का सबूत है कि सपा सच को बर्दाश्त नहीं कर सकती। यह घटना उत्तर प्रदेश में माफिया-राजनीति के गठजोड़ और योगी सरकार की सख्त नीतियों के बीच टकराव को रेखांकित करती है। सपा का यह कदम 2027 के विधानसभा चुनाव में उसकी छवि को और नुकसान पहुंचा सकता है।
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