तो क्या मायावती ने राजस्थान-MP के चुनावों को देखते हुए किया जगदीप धनखड़ का समर्थन, जानिए

लखनऊ, 04 अगस्त : उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है। इस लिहाज से हर चुनाव में यहां की अपनी अहमियत होती है। हाल ही में सम्पन्न हुए राष्ट्रपति के चुनाव में भी यूपी ने अहम रोल अदा किया था। अब देश में उपराष्ट्रपति चुनाव का बिगुल बज चुका है। एनडीए ने जगदीप धनखड़ को अपना उम्मीदवार बनाया है। धनखड़ चूंकि जाट विरादरी से आते हैं और इस जाति की कई राज्यों में चुनाव के दौरान अहम भूमिका होती है। राजस्थान और एमपी में भी जल्द ही चुनाव होने हैं ऐसे में इस जाट समाज के बीच एक सकारात्मक मैसेज देने के लिए बीजेपी ने ये दांव खेला है। लेकिन बसपा प्रमुख मायावती ने भी इनको अपना समर्थन देकर जाट समाज की सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया है।

मायावती की जाट समुदाय को साधने की कोशिशश

मायावती की जाट समुदाय को साधने की कोशिशश

जगदीप धनखड़ एक जाट हैं और जाटों की जातिवार स्थिति अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग है। जाट यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित नौ राज्यों में ओबीसी में शामिल हैं। धनखड़ को मायावती का समर्थन इस लिहाज से भी अहम है। बसपा ने अपने दलित और ओबीसी समुदाय की बात कर अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने की कोशिश की है। बसपा हमेशा ही पिछड़ों और दलितों के विकास की बात करती रही है।

एमपी-राजस्थान चुनाव को देखकर लिया फैसला

एमपी-राजस्थान चुनाव को देखकर लिया फैसला

राजनीतिक विश्लेष्कों की मााने तो बसपा ने राजस्थान, मध्य प्रदेश में यूपी की तरह कुछ विधानसभा सीटें जीती हैं। वहां जाटों को ओबीसी माना जाता है। इस तरह, धनखड़ को उनका समर्थन इन राज्यों में जाटों के बीच एक संदेश देने का एक प्रयास है। बसपा आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सक्रिय हो गई है, कि पार्टी उनके उत्थान और विकास का समर्थन करेगी। मायावती ने काफ सोच समझकर धनखड़ को समर्थन देने का ऐलान किया है ताकि यूपी समेत कई राज्यों में इसका लाभ बसपा को मिल सके।

यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा को मिली थी करारी हार

यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा को मिली थी करारी हार

दरअसल यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में बसपा ने बहुत खराब प्रदर्शन किया था। बसपा केवल एक सीट जीतने में कामयाब रही थी। यूपी चुनाव में मिली करारी हार के बाद मायावती ने अपनी रणनीति को बदलने की कोशिश की है। बसपा का हर राजनीतिक निर्णय पार्टी के प्रारंभिक आंदोलन को केंद्र में ही रखकर हो रहा है। मायावती की बसपा को एकमात्र ऐसी पार्टी के रूप में स्थापित करने के लिए काम कर रही हैं जो अपने फैसले के राजनीतिक नतीजों की चिंता किए बिना 'दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों' का समर्थन करती है।

मायावती ने किया है धनखड़ को समर्थन का ऐलान

मायावती ने किया है धनखड़ को समर्थन का ऐलान

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने बुधवार को एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि यह "व्यापक जनहित" में था और उनकी पार्टी के आंदोलन को ध्यान में रखते हुए कि वह धनखड़ का समर्थन कर रही थीं। एनडीए के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (अब राष्ट्रपति) को अपना समर्थन देने की घोषणा करते समय मायावती ने यही कारण बताया था।

धनखड़ को समर्थन देकर खेला चुनावी दांव

धनखड़ को समर्थन देकर खेला चुनावी दांव

उन्होंने कहा कि बसपा ने फिर से जगदीप धनखड़ को समर्थन देने के लिए व्यापक जनहित और अपने स्वयं के आंदोलन को ध्यान में रखा है। ऐसे समय में जब विपक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री मार्गरेट अल्वा की उप-राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी पर बंटा हुआ दिख रहा है और टीएमसी ने दूर रहने का फैसला किया है, बसपा ने फिर से एनडीए के साथ है। मायावती ने धनखड़ का समर्थन कर कई राज्यों के चुनावी समीकरण साधने का प्रयास किया है।

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