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दलितों को गुमराह कर BSP को कमजोर कर रही हैं जातिवादी ताकतें, मायावती का चंद्रशेखर पर करारा वार

BSP chief Mayawati: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए सत्ताधारी और विपक्षी दलों पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि देशभर में जातिवादी राजनीतिक ताकतें, खासकर उत्तर प्रदेश में, एक सोची-समझी साजिश के तहत बसपा को कमजोर करने में लगी हुई हैं।

लखनऊ में बुधवार, 5 जून को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती ने कहा कि सत्ताधारी और विपक्षी दलों में शामिल जातिवादी पार्टियां पर्दे के पीछे कुछ स्वार्थी और अवसरवादी लोगों का इस्तेमाल करके नए दल बनवा रही हैं।

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मायावती के मुताबिक, इन दलों का एकमात्र उद्देश्य दलितों और अन्य उपेक्षित वर्गों के वोटों को बांटकर बसपा को कमजोर करना है। उन्होंने नवगठित दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन संगठनों का डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है। मायावती ने दावा किया कि यह सब बसपा की राजनीतिक ताकत और जनसमर्थन को खत्म करने की एक चाल है।

बसपा की बढ़ती लोकप्रियता से डरी हुई हैं जातिवादी ताकतें: बसपा सुप्रिमो

मायावती ने कहा कि बसपा की प्रगति और उसके बढ़ते जनाधार से जातिवादी ताकतें डरी हुई हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां बसपा ने सालों तक दलितों, पिछड़ों और अन्य वंचित वर्गों की आवाज को बुलंद किया और उन्हें सत्ता में भागीदारी भी दिलाई।

मायावती के अनुसार, यही कारण है कि ये जातिवादी ताकतें किसी भी कीमत पर बसपा के उभार को रोकना चाहती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी जहां बसपा का मजबूत आधार है, वहां षड्यंत्रों के जरिए पार्टी को कमजोर करने की कोशिशें चल रही हैं।

BSP सत्ता नहीं, समाज परिवर्तन का मिशन: Mayawati

मायावती ने याद दिलाया कि बसपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य भारत के सबसे कमजोर, सबसे शोषित और सबसे वंचित वर्गों को उनका सम्मान और अधिकार दिलाना है।
उन्होंने कहा, "हमारे आंदोलन की जड़ें बाबा साहब आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम की विचारधारा में हैं। यह कोई सत्ता की लालसा से प्रेरित आंदोलन नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति की राह है।"

बसपा सुप्रीमो ने दलितों, पिछड़ों, मुसलमानों और अन्य वंचित वर्गों से अपील की कि वे भ्रामक ताकतों से सतर्क रहें और एकजुट होकर बसपा का समर्थन करें। मायावती ने कहा कि अगर दलित वोटों का विभाजन हुआ, तो इसका सीधा फायदा उन ताकतों को मिलेगा जो सदियों से वंचितों को हाशिये पर रखने का काम करती रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषण: मायावती की चिंता का कारण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह बयान हाल ही में उभर रही छोटी-छोटी दलित पार्टियों और संगठनों के प्रभाव को लेकर उनकी चिंता को दर्शाता है। पहले बसपा के साथ रहे कई दलित चेहरे अब अपने संगठन बनाकर मैदान में हैं, जिससे बसपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने का खतरा पैदा हो गया है।

इसके अलावा, 2024 के लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, इस बयान को बसपा की भविष्य की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है, जिसके तहत पार्टी एक बार फिर अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

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