UP में दलितों पर Mayawati की पकड़ हो रही ढीली ? मौके का फायदा उठा पाएगी Congress
Uttar Pradesh में क्या दलितों के उपर से Mayawati की पकड़ ढीली हो रही है। क्या मायावती को कमोजर होते देख कांग्रेस अब अपनी छवि बदलने की कोशिश में जुटी है और इसीलिए उसने दलित पर दांव खेला है। कांग्रेस के सूत्रों की माने तो यूपी में दलित नेता बृजलाल खाबरी को Congress का यूपी का चीफ बनाए जाने के पीछे कांग्रेस की सोच यही है कि दलितों के उपर से मायावती की पकड़ ढीली हो रही है इसलिए दलितों पर दांव लगाया जा सकता है। हालांकि यह सबकुछ इतना आसान भी नहीं है। लगातार चुनावी हार झेल रही कांग्रेस को खड़ा करने के लिए यूपी बीजेपी चीफ बृजलाल खाबरी को आम चुनाव 2024 में करिश्मा करके दिखाना होगा।

निराश कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश
देश में 2024 के लोकसभा चुनाव कांग्रेस की क्या संभावनाएं हैं। यूपी में नई टीम के पास विधानसभा चुनावों में हार के बाद निराश कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का एक कठिन काम है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में एक उत्साही अभियान के बावजूद, पार्टी 2022 के विधानसभा चुनावों में 403 सीटों में से केवल दो सीटें जीतने में सफल रही और 2.33 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया, जो अब तक का सबसे कम वोट है।
सवर्ण पार्टी होने का ठप्पा हटाना चाहती है कांग्रेस
विधानसभा चुनाव में सफाया होने के बाद कुछ राजनीतिक जमीन बचाने के लिए एक प्रसिद्ध दलित नेता बृजलाल खबरी को उत्तर प्रदेश के प्रमुख के साथ छह क्षेत्रीय प्रमुखों के रूप में नियुक्त किया है। यूपी में ऐसे समय में दलित नेता को चीफ बनाया गया है जब उसी समुदाय के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का नेतृत्व करने जा रहे हैं। यह एक स्पष्ट संकेत है कि कांग्रेस सवर्णों की पार्टी होने की अपनी छवि को बदलने की कोशिश कर रही है।
विधानसभा में कांग्रेस का वोट शेयर केवल आठ फीसदी
कांग्रेस ने खाबरी को देश के सबसे बड़े राज्य के प्रमुख के रूप में चुनकर समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने की अपनी योजना में निरंतरता दिखाई है। हालांकि खाबरी और उनकी पत्नी उर्मिला सोनकर दोनों विधानसभा चुनाव हार गए थे। पिछले कुछ दशकों में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का वोट शेयर पिछले विधानसभा चुनाव में लगभग 8 प्रतिशत रहा था। प्रियंका गांधी वाड्रा के लगातार संघर्ष के बावजूद बमुश्किल 2.33 प्रतिशत वोट और दो सीटों के साथ सबसे खराब स्थिति थी। ध्रुवीकरण की सीमा बसपा के प्रदर्शन में परिलक्षित हुई - पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली, हालांकि उसका वोट शेयर 12.88 प्रतिशत से बहुत अधिक था।
दलितों पर मायावती की हो रही पकड़ ढीली
कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बताया कि कांग्रेस को उम्मीद है कि बसपा संसदीय चुनाव में और भी खराब प्रदर्शन करेगी क्योंकि मायावती नरेंद्र मोदी सरकार के दबाव में काम करती दिख रही हैं। पार्टी का मानना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा के अधिकांश वोट भाजपा में स्थानांतरित हो गए थे। केंद्रीय नेतृत्व को उम्मीद है कि भाजपा के प्रति बढ़ते असंतोष के कारण दलित मायावती की बजाए कांग्रेस की ओर देखेंगे।
पंजाब में नहीं चला था कांग्रेस का दलित कार्ड
हालांकि इसी तरह का एक प्रयोग पंजाब में किया गया था लेकिन चुनाव में विफल हो गया। वहां चुनाव से पहले चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। लेकिन विफलता के कारण भी थे। ऐसा कहा गया कि चुनाव से तीन महीने पहले चन्नी की नियुक्ति दलितों को बेवकूफ बनाने के लिए एक चाल चली गई थी। पंजाब के परिणाम ने कांग्रेस के दलित कार्ड को नकार दिया था। इस लिहाज से यूपी में कांग्रेस दलित कार्ड खेलने के बाद कितना सफल होगी यह देखना दिलचस्प होगा।












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