सेंगोल या संविधान? मायावती ने भी दी प्रतिक्रिया, X पर लिखा ' हथकण्डों से सावधान रहें', सपा को दे दी नसीहत
लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद संसद के विशेष सत्र के दौरान सेंगोल विवाद से राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता इस पर बयान दे रहे हैं। इस मामले पर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी है।
मामले को लेकर मायावती ने समाजवादी पार्टी पर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार सुबह मायावती ने सोशल साइट एक्स पर एक संदेश शेयर करते हुए लिखा कि समाजवादी पार्टी की सभी हथकंडों से सावधान रहने की जरूरत है।

दरअसल, मोहनलालगंज लोकसभा से समाजवादी पार्टी के सांसद आरके चौधरी द्वारा स्पीकर और प्रोटेम स्पीकर को एक पत्र लिखकर संसद भवन में सेंगोल की जगह भारतीय संविधान की विशालकाय प्रति स्थापित करने की मांग की गई।
सपा सांसद द्वारा लिखे गए पत्र में यह भी लिखा गया था कि सेंगोल राजाओं-महाराजाओं का प्रतीक है और इसे संसद भवन से हटा देना चाहिए। उसके बाद इस मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का बयान भी सामने आया था।
अखिलेश यादव अपने पार्टी के सांसद का बचाव करते हुए कहा था कि हमारे पार्टी के सांसद ऐसा इसलिए कह रहे होंगे क्योंकि जब संसद भवन में सेंगोल पहली बार लगा था तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे प्रणाम किया था और इस बार शपथ लेते हुए शायद उसे भूल गए।
सपा सांसद द्वारा पत्र लिखे जाने के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया। भारतीय जनता पार्टी और एनडीए गठबंधन के नेताओं द्वारा इस पर प्रतिक्रिया दी गई। अब इसी मामले को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।
मायावती ने शुक्रवार सुबह में सोशल साइट एक पर मैसेज शेयर करते हुए लिखा है कि "सेंगोल को संसद में लगाना या नहीं, इस पर बोलने के साथ-साथ सपा के लिए यह बेहतर होता कि यह पार्टी देश के कमजोर एवं उपेक्षित वर्गों के हितों में तथा आम जनहित के मुद्दों को भी लेकर केन्द्र सरकार को घेरती।"
इसके अलावा मायावती द्वारा दूसरा मैसेज भी किया गया है। दूसरे मैसेज में मायावती ने लिखा है कि "जबकि सच्चाई यह है कि यह पार्टी अधिकांश ऐसे मुद्दों पर चुप ही रहती है तथा सरकार में आकर कमजोर वर्गों के विरूद्ध फैसले भी लेती है। इनके महापुरूषों की भी उपेक्षा करती है। इस पार्टी के सभी हथकण्डों से जरूर सावधान रहें।"












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