मायावती के भतीजे आकाश आनंद किन सीटों से लड़ सकते हैं चुनाव,Y-plus सिक्योरिटी के बाद तेज हुई चर्चा
बसपा सुप्रीमो मायावती ने पिछले साल दिसंबर में अपने भतीजे आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। वह अब घोषित रूप में दूसरे नंबर पर हैं। हाल में जिस तरह से केंद्र की मोदी सरकार ने उन्हें वाई-प्लस सिक्योरिटी देने की घोषणा की है, उससे यूपी की राजनीति में कई तरह की अटकलें लगनी शुरू हैं।
केंद्र सरकार की ओर से आकाश आनंद को वाई-प्लस सिक्योरिटी देने से ठीक पहले राज्यसभा चुनाव में बसपा के एकमात्र एमएलए उमाशंकर सिंह भाजपा के आठवें प्रत्याशी संजय सेठ के पक्ष में मतदान कर चुके हैं।

क्या बसपा-भाजपा में कोई डील है?
हालांकि, रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से बीएसपी विधायक ने भाजपा प्रत्याशी को वोट देने का निर्णय निजी बताया था, लेकिन जिस तरह से उन्होंने इसकी सूचना पार्टी प्रमुख को देने की बात कही, उसे लोकसभा चुनाव से पहले सियासी चश्मे से देखा जाना स्वाभाविक है। क्योंकि, मायावती की ओर से भी इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं देखी गई है।
बसपा का यूपी में जनाधार गिरा है, इस बात में कोई दो राय नहीं। लेकिन, 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को यूपी में भले ही एक सीट मिली हो, लेकिन तथ्य यह है कि उसके पास अभी भी करीब 13% वोट है, जिसकी चुनावी ताकत को नकारना मुश्किल है।
इस बात में भी दो राय नहीं कि प्रदेश में गैर-जाटव दलित वोट बड़े पैमाने पर भाजपा में शिफ्ट हुए हैं, लेकिन जाटव वोट अभी भी बड़े पैमाने पर मायावती के साथ जुड़ा हुआ बताया जाता है। लेकिन, घोसी विधानसभा उपचुनाव के परिणाम ने इस तरह के दावे पर सवालिया निशान भी लगाया है।
इसलिए, यूपी में बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी का हर ऐक्शन राजनीतिक विश्लेषण की वजह बन रहा है। मायावती को अपने वोट बैंक को सहेजे रखने की चुनौती है, वहीं बीजेपी, उसके संभावित खिसकने की स्थिति में खुद को पहली दावेदार प्रोजेक्ट करने की कोशिश में हो सकती है।
क्योंकि, जानकार मानते हैं कि अगर बसपा समर्थक वोट विकल्प की तलाश में निकलता भी है तो भी उनमें मायावती या उनके परिवार के प्रति उनका सम्मान नहीं खत्म होगा। ऐसे समय में आकाश आनंद को वाई-प्लस सिक्योरिटी और वह भी लोकसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले, काफी कुछ इशारा हो सकता है।
वाई-सिक्योरिटी मिलने का मतलब क्या है?
बसपा अध्यक्ष के भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनंद को वाई-सिक्योरिटी मिलने का मतलब है कि उन्हें 24/7, 6 पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSOs) की सुरक्षा मिलेगी, जो तीन शिफ्टों में उनको कवर देंगे। इसके अलावा पांच सुरक्षाकर्मी उनके आवास पर तैनात रहेंगे। यह सुरक्षा केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से हाई थ्रेट पर्सेप्शन के आधार पर उपलब्ध करवाई जाती है।
अंबेडकरनगर या बिजनौर से लड़ेंगे आकाश आनंद?
वैसे यह भी कहा जा रहा है कि आकाश आनंद इस बार यूपी से लोकसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं और पार्टी उनके लिए किसी सुरक्षित (जिताऊ) सीट की तलाश में है। ये सीटें अंबेडकरनगर और बिजनौर बताई जा रही हैं और खबरें हैं कि पार्टी नेतृत्व इसपर विचार भी कर रहा है।
वैसे आकाश अभी तक कोई चुनाव नहीं लड़े हैं। अगर बसपा उनके लिए अंबेडकरनगर सीट चुनती है तो उन्हें वहां पार्टी के पूर्व सांसद रितेश पांडे से मुकाबला करना होगा, जो हाल ही पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं और उन्हें टिकट भी मिल गया है। 2019 में इस सीट पर बीएसपी, सपा के साथ गठबंधन में चुनाव जीती थी।
जहां तक बिजनौर सीट की बात है तो यहां से पिछली बार बीएसपी के मलूक नागर चुनाव जीते थे। पिछली बार इस सीट पर भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार से करीब साढ़े 6 फीसदी वोटों से ही पिछड़ी थी। ऐसे में गठबंधन टूटने से समीकरण बदल चुका है।
2019 के लोकसभा चुनाव में जब चुनाव आयोग ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर 48 घंटे तक प्रचार करने पर प्रतिबंध लगा दिया था तो आकाश आनंद को पहली बार आगरा में सपा-बसपा और रालोद की रैली को संबोधित करने का मौका मिला था। लोकसभा चुनावों के बाद जब मायावती ने पार्टी में बड़ा फेर-बदल किया तो आकाश को उन्होंने पार्टी का एकमात्र राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया था।












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