सलीम को बांके बिहारी मंदिर में रेलिंग का ठेका मिलने पर भड़के संत, ADM को देनी पड़ी सफाई, CM तक पहुंचा मामला
Mathura Banke Bihari Temple Railing Contract Controversy: विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बार विवाद मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में स्टील रेलिंग लगाने का ठेका एक मुस्लिम फर्म को दिए जाने पर है। इस फैसले के सार्वजनिक होते ही ब्रजभूमि के साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। उन्होंने इसे सनातन परंपराओं का अपमान बताया है।

फलाहारी महाराज ने अपने बयान में कहा कि, 'जहां भगवान राधा कृष्ण ने महारास और माखन चोरी लीला की हो, जहां बांके बिहारी विराजमान हों, उस स्थान पर गौ मांस खाने वाले, सनातन धर्म के विरोधी आएंगे तो ब्रज वासियों को सहन नहीं होगा, हमारे कृष्ण कन्हैया भी नाराज हो जाएंगे।'
उन्होंने कहा कि, 'यह लोग सनातन धर्म के विरोधी हैं। हिंदुओं को काफिर कहते हैं। ऐसे लोगों को मंदिर प्रांगण से 1 किलोमीटर तक घुसने नहीं दिया जाएगा। हमारे सनातनियों में स्टील रेलिंग लगाने के लिए हजारों ठेकेदार हैं, तो फिर हिंदुओं पर अत्याचार करने वाले और मथुरा, काशी, अयोध्या को तोड़कर वहां नमाज अदा करने वाले मुगलों के वंशजों को यह ठेका क्यों दिया गया है?'
Seers in UP's Mathura have begun protesting against contract for installing steel railings inside banke Bihari temple allegedly awarded to a Muslim contactor. pic.twitter.com/TQSfGT8yU9
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) February 3, 2026
पहचान छिपाकर ठेका लेने का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि 'कनिका कंस्ट्रक्शन' के मालिक सलीम अहमद ने अपनी पहचान छिपाकर यह ठेका हासिल किया है और मांग की कि इसे तुरंत निरस्त कर किसी सनातनी को सौंपा जाए। सोशल मीडिया पर भी संदीप पहल जैसे कार्यकर्ताओं ने हरिद्वार की 'हर की पौड़ी' का हवाला देते हुए इस पर सवाल उठाए हैं।
प्रशासन और मंदिर कमेटी का पक्ष
विवाद बढ़ता देख ADM पंकज वर्मा ने आजतक से बातचीत में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि यह ठेका मंदिर के बजट से नहीं दिया गया है।
- CSR फंड का उपयोग: ADM के अनुसार, जिन बैंकों में मंदिर का पैसा जमा है, उन्होंने अपने 'कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी' (CSR) फंड के तहत रेलिंग लगवाने का प्रस्ताव दिया था।
- चयन प्रक्रिया: बैंक ने कोटेशन के आधार पर मेरठ की फर्म 'कनिका कंस्ट्रक्शन' को चुना।
- कार्यकारी टीम: प्रशासन का दावा है कि वर्तमान में इस संस्था का संचालन 'रंजन' नामक व्यक्ति कर रहे हैं और मौके पर काम की देखरेख फील्ड मैनेजर 'रुपेश शर्मा' द्वारा की जा रही है। रेलिंग का काम लगभग पूरा हो चुका है।
वहीं, मंदिर की हाई-पावर्ड कमेटी के सदस्य शैलेन्द्र गोस्वामी ने सांप्रदायिक सौहार्द की अपील करते हुए कहा कि टेंडर नियमों के तहत दिया गया है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि मुगल सम्राट अकबर भी स्वामी हरिदास को सुनने आए थे, हमारी परंपरा नफरत का समर्थन नहीं करती।












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