Mahakumbh 2025: महाकुंभ में मुलायम सिंह यादव की मूर्ति पर विवाद, अखाड़ा परिषद ने कहा ‘सनातन विरोधी प्रतीक’
Mahakumbh 2025 Mulayam Statue Controversy: प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के दौरान समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की मूर्ति स्थापित करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। महाकुंभ क्षेत्र के सेक्टर 16 में स्थापित इस मूर्ति पर संतों और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कड़ा विरोध जताया है।
समाजवादी पार्टी के नेता माता प्रसाद पांडे ने बताया कि मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान द्वारा शिविर में लगभग दो-तीन फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण शनिवार (11 जनवरी 2025) को किया गया। पांडे के अनुसार, इस शिविर का उद्देश्य "नेताजी" की विचारधारा और उनके योगदान को बढ़ावा देना है। श्रद्धालुओं के लिए शिविर में भोजन और रहने की भी व्यवस्था है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महाकुंभ के बाद इस मूर्ति को पार्टी कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

संतों और अखाड़ा परिषद का विरोध
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने इस मूर्ति स्थापना को "सनातन और हिंदू विरोधी विचारों" का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान मुलायम सिंह यादव की भूमिका सभी को याद है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मूर्ति संत समाज को उन घटनाओं की याद दिलाने के लिए स्थापित की गई है, जब मुलायम सिंह की सरकार ने संतों और हिंदुओं के खिलाफ कार्रवाई की थी। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद ने भी इस निंदा का समर्थन किया और इसे अनुचित बताया।
समाजवादी पार्टी का पक्ष
माता प्रसाद पांडे ने इस मुद्दे पर कहा कि शिविर में प्रतीकात्मक रूप से मूर्ति स्थापित की गई है और इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को सेवा देना और "नेताजी" की विचारधारा का प्रसार करना है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव महाकुंभ मेले का दौरा करेंगे, उन्होंने कहा कि अभी इस संबंध में कोई बातचीत नहीं हुई है।
मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक सफर
मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री रह चुके हैं। वे 10 बार विधायक और 7 बार सांसद चुने गए। उनका अधिकतर राजनीतिक सफर मैनपुरी और आजमगढ़ से जुड़ा रहा। 10 अक्टूबर 2022 को उनका निधन हो गया।
विवाद से जुड़े मुख्य बिंदु
- संत समाज ने मूर्ति स्थापना को राम मंदिर आंदोलन और हिंदू विरोधी नीतियों से जोड़ा।
- अखाड़ा परिषद ने इसे महाकुंभ की धार्मिक भावना के विपरीत बताया।
- समाजवादी पार्टी का दावा है कि यह श्रद्धालुओं के बीच सेवा और विचारधारा का प्रसार करने का प्रयास है।
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