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KGMU Love Jihad कांड के बाद अवैध मजारों पर एक्शन की तैयारी, 15 दिन में बोरिया-बिस्तर समेटने का आदेश

Lucknow News: योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का असर अब लखनऊ के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान में भी दिखने लगा है। सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के संकल्प को दोहराते हुए, केजीएमयू (KGMU) प्रशासन ने परिसर के भीतर दशकों से जमे अवैध मजारों के खिलाफ 'बुलडोजर एक्शन' की तैयारी कर ली है।

केजीएमयू प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि सरकारी संस्थान में कोई भी अवैध धार्मिक ढांचा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। परिसर में स्थित सभी मजारों को अवैध घोषित करते हुए उन पर आधिकारिक नोटिस चस्पा कर दिए गए हैं।

kgmu illegal mazar case

15 दिन में बोरिया-बिस्तर समेटने का आदेश

संचालकों को केवल 15 दिन की मोहलत दी गई है। यदि इस अवधि में अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो प्रशासन अपने स्तर पर कार्रवाई कर मजारों को ध्वस्त कर देगा।

केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने साफ किया कि इन अवैध ढांचों और इनके आसपास बढ़ते अतिक्रमण के कारण मरीजों और एम्बुलेंस के आवागमन में भारी रुकावट आ रही थी। पार्किंग के संकट और परिसर के अनुशासन को भंग करने वाली इन गतिविधियों को रोकने के लिए प्रशासन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। संस्थान का मानना है कि लाखों मरीजों के इलाज के लिए बनी जमीन का उपयोग केवल चिकित्सा कार्यों के लिए ही होना चाहिए।

बुलडोजर कार्रवाई का खर्च भी वसूलेगा प्रशासन

योगी मॉडल के अनुरूप, प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि उन्हें स्वयं इन मजारों को हटाना पड़ा, तो इसमें लगने वाले पुलिस बल और मशीनों के खर्च की पाई-पाई अवैध कब्जा करने वालों से ही वसूली जाएगी। यह कदम भू-माफियाओं और अवैध धार्मिक निर्माण करने वालों के लिए एक बड़ी नजीर साबित होगा।

KGMU के प्रवक्ता ने क्या कहा?

KGMU के प्रवक्ता के.के. सिंह ने कहा, 'किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी कैंपस में कई धार्मिक ढांचे अवैध रूप से बनाए गए थे और लंबे समय से मौजूद थे। हमने ऐसी आठ जगहों की पहचान की और डेढ़ साल पहले यह तोड़फोड़ अभियान शुरू किया। इस अभियान का मौजूदा घटना से कोई लेना-देना नहीं है। यह अभियान डेढ़ साल पहले शुरू किया गया था जब वाइस चांसलर ने कार्रवाई करने की इच्छा दिखाई और हमें सरकार से समर्थन मिला।'

धर्मांतरण के प्रयासों पर लगाम

परिसर में अवैध मजारों की आड़ में चल रहे धर्मांतरण के प्रयासों का मुद्दा गरमाने के बाद राज्य महिला आयोग ने भी इस पर तल्ख तेवर दिखाए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप, सरकारी अस्पतालों को कट्टरपंथ और अवैध गतिविधियों का अड्डा बनने से रोकने के लिए संस्थान ने अब नियमों का हवाला देकर इस सफाई अभियान को गति दी है।

क्या है KGMU का 'लव जिहाद' और धर्मांतरण कांड?

दरअसल, विश्वविद्यालय परिसर में मजारों के खिलाफ इस कड़े एक्शन के पीछे एक गंभीर आपराधिक मामला है। केजीएमयू के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन नाइक पर एक हिंदू महिला डॉक्टर को शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने, जबरन गर्भपात कराने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप लगा है। पीड़िता द्वारा आत्महत्या के प्रयास के बाद यूपी एसटीएफ (STF) ने आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित था और उसने अपनी पहली पत्नी का भी धर्मांतरण कराया था। इस घटना के बाद से ही संस्थान के भीतर बाहरी हस्तक्षेप और अवैध धार्मिक ढांचों को हटाने की मांग तेज हो गई थी।

अतिक्रमण और चिकित्सा सेवाओं में बाधा

केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार, इन अवैध मजारों और उनके आसपास बढ़ते अतिक्रमण के कारण अस्पताल में मरीजों, तीमारदारों और एम्बुलेंस के आवागमन में भारी समस्या हो रही थी। मजारों के आसपास बढ़ती भीड़ के कारण पार्किंग का संकट भी गहरा गया था। प्रशासन का मानना है कि सरकारी अस्पताल की जमीन का उपयोग केवल चिकित्सा सेवाओं के लिए होना चाहिए, न कि किसी भी प्रकार के अवैध धार्मिक निर्माण के लिए।

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