Lucknow Murder: बहन को 4 दिन तक बंद रखा, पिता के टुकड़े किए, नीले ड्रम में मिला धड़, सिर-पैर कहां लगाए ठिकाने?
Lucknow Blue Drum Murder Case: मेरठ के मुस्कान रस्तोगी के बाद लखनऊ में 11 महीने 353 दिन बाद एक बार फिर 'नीला ड्रम' हत्याकांड ने अपना फन फैलाया। एक 21 साल के बेटे ने अपने पिता को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद, सबूत को मिटाने और शव को आरी से टुकड़ों में काटा। हाथ-पैर अलग-अलग जगह ठिकाने लगाया।
बाकी बचा हुआ धड़ घर में बेटे ने पन्नी में लपेटकर नीले ड्रम में ठूंस दिया। छोटी बहन को 4 दिन तक घर में बंद रखकर डराया-धमकाया। इस घटना ने पूरे लखनऊ को दहला दिया है। आइए जानते हैं कहां ठिकाने लगाया? क्या-क्या पुलिस को कबूलनामे में हत्यारे बेटे ने बताया?

Lucknow Nila Drum Case: घटना का पूरा क्रम क्या था?
वक्त था 20 फरवरी 2026 की सुबह करीब 4:30 बजे। लखनऊ के आशियाना (Lucknow Aashiana Case) थाना क्षेत्र, सेक्टर-एल, मकान नंबर 91 (तीन मंजिला घर) में पिता मानवेंद्र सिंह (Manvendra Singh
) बेटे अक्षत पर NEET क्वालीफाई कर MBBS करने का दबाव डालते थे। अक्षत बीकॉम का छात्र था और पढ़ाई के बजाय बिजनेस (जैसे लॉन या रेस्टोरेंट खोलना) में रुचि रखता था। इसी बात पर बार-बार झगड़ा होता था। गुस्से में अक्षत ने पिता की लाइसेंसी राइफल से सिर में गोली मार दी, जिससे मौत हो गई। बहन कृति (17) उस वक्त घर में थी। गोली की आवाज सुनकर भागी तो पिता का शव फर्श पर देखकर चीख पड़ी। अक्षत ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चुप कराया और 4 दिन तक घर में बंद रखा। किसी को बताने पर मार डालने की धमकी दी।

शव को ठिकाने लगाने की क्रूर योजना
अक्षत (Akshat Singh) ने पिता के शव को आरी से काटा। दोनों हाथ और पैर (घुटने के नीचे से काटकर) पारा के सदरौना इलाके में ठिकाने लगाया। सिर कार में रखकर लगभग 21 किमी दूर फेंका (अभी तक नहीं मिला)। बाकी धड़ (आधा कटा हुआ) घर में नीले ड्रम में भरकर छिपाया। कुछ रिपोर्ट्स में 10 लीटर केरोसिन का जिक्र है, शायद शव जलाने की तैयारी थी। घर की ऊपरी मंजिल पर पिता, बेटा और बेटी रहते थे। चाचा-चाची दूसरी मंजिल पर थे, नीचे पार्किंग और गेस्ट रूम।
कहां फेंका सिर? हाथ-पैर लगाया ठिकाने
20 फरवरी से मानवेंद्र लापता थे। 23 फरवरी (सोमवार) को अक्षत खुद थाने जाकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने घर पहुंचकर पूछताछ की। अक्षत घबराया हुआ था। पड़ोसियों और दोस्तों से बातचीत में भी संदेह हुआ (एक दोस्त को उसने कहा था 'पापा ने सुसाइड कर लिया')। सख्त पूछताछ में अक्षत ने जुर्म कबूल लिया। पुलिस मौके पर पहुंची, नीले ड्रम से धड़ बरामद किया। हाथ-पैर सदरौना से मिले, लेकिन सिर अभी गायब है। डीसीपी (सेंट्रल) विक्रांत वीर ने कन्फर्म किया कि अक्षत ने ही हत्या की। बाकी अंगों की तलाश जारी है।
मानवेंद्र सिंह मूल रूप से जालौन जिले के थे। पिता सुरेंद्र पाल सिंह यूपी पुलिस से रिटायर्ड। मानवेंद्र ने आशियाना में घर बनवाया, वर्धमान पैथोलॉजी लैब (सालेह नगर और बुद्धेश्वर में) चलाई, साथ ही शराब का कारोबार। पत्नी का निधन 2017 में हो गया था। तब से अकेले बच्चों की परवरिश कर रहे थे। छोटा भाई एसएस रजावत यूपी पुलिस में सचिवालय में तैनात। अक्षत टीएस मिश्रा कॉलेज से बीकॉम/बीबीए कर रहा था। कृति एपीएस/एलपीएस में 11वीं की छात्रा है।
ट्रॉमा और काउंसिलिंग
बहन कृति अब भी सदमे में है। पुलिस ने उसकी काउंसिलिंग कराई। घटना खुलने पर परिवार बिलख रहा था, लेकिन कृति शांत थी, शायद डर से। यह मामला पढ़ाई के दबाव, पारिवारिक विवाद और क्रूरता का भयावह उदाहरण बन गया है। पुलिस जांच जारी है, और जल्द ही चार्जशीट दाखिल होने की उम्मीद है।
क्या उठ रहे सवाल?
- हत्याकांड के वक्त कहां थे दूसरी मंजिल पर रहने वाले चाचा-चाची?
- 4 दिन तक कैसे बंद रखा बेटी को?












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