कांवड़ियों की सुविधा के लिए 4 दिन बंद रहेगा लखनऊ-अयोध्या हाईवे, जानिए क्या रहेगा ऑप्शन

लखनऊ, 23 जुलाई: उत्तर प्रदेश में पवित्र सावन माह में कांवड़ियों की आवाजाही को देखते हुए प्रशासन ने अपने स्तर से तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों की माने तो श्रावण मास के दौरान 23-26 जुलाई तक अयोध्या पहुंचने वाले कांवड़ियों की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने शनिवार से लखनऊ-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग पर चार दिनों के लिए भारी वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। दरअसल लखनऊ-अयोध्या राजमार्ग बंद होने के बाद अब लोग पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से होकर अयोध्या जा सकते हैं।

कांवड़ यात्रा

दरअसल श्रावण मास के दौरान 23-26 जुलाई को अयोध्या पहुंचने वाले कांवड़ियों की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने लखनऊ-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग पर शनिवार से चार दिन के लिए भारी वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। फोर लेन लखनऊ-अयोध्या-गोरखपुर हाईवे की दो लेन कांवड़ियों के लिए आरक्षित होंगी जबकि शेष दो लेन आवश्यक सेवाओं के लिए खुली रहेंगी।

उप निदेशक, सूचना, मुरली धर सिंह के मुताबिक, "निजी हल्के वाहनों की आवाजाही भी प्रतिबंधित रहेगी। हालांकि, विशेष मामलों में ऐसे वाहनों को अनुमति दी जाएगी।" सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अमेठी, अंबेडकरनगर, बस्ती और आजमगढ़ के लाखों कांवड़िये 'कृष्ण पक्ष' और 'श्रवण शिवरात्रि' की 'त्रयोदशी' पर सरयू नदी से पानी लेने अयोध्या आते हैं।

कांवड़

कांवड़ यात्रा को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। ट्रैफिक डायवर्जन प्लान के तहत गोरखपुर से भारी वाहनों को खलीलाबाद से बाराबंकी-लखनऊ होते हुए मेहदावल-बंसी, डुमरियागंज, बलरामपुर और गोंडा होते हुए डायवर्ट किया जाएगा। बस्ती से वाहनों को बाराबंकी होते हुए लखनऊ की ओर डायवर्ट किया जाएगा। गोंडा-बलरामपुर की ओर से अयोध्या होते हुए यातायात गोंडा एवं मनकापुर में रोका जाएगा और बाराबंकी एवं लखनऊ होते हुए करनैलगंज, जारवाल रोड और रामनगर चौराहे के रास्ते डायवर्ट किया जाएगा।

योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने का आदेश दिया है ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके। कांवड़ यात्रा के दौरान, भक्त गंगा से जल लेकर ज्यादातर पैदल यात्रा करते हैं और इसे अपने इलाकों या ऐतिहासिक स्थानों में स्थित शिव मंदिरों में चढ़ाते हैं। जलाभिषेक का मुख्य अवसर 26 जुलाई को शिवरात्रि के दिन मनाया जाएगा।

दिल्ली, मध्य प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के तीर्थयात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 58 का सहारा लेते हैं। यह राजमार्ग उत्तराखंड में हरिद्वार और रुड़की और उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा से होकर गुजरता है। दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भक्त सहारनपुर, शामली और बागपत जिलों के रास्ते दूसरे रास्ते से भी जाते हैं। हरियाणा के भक्तों के लिए एक अन्य मार्ग उत्तर प्रदेश के रुड़की, गगलहेरी, सरसावा और हरियाणा के यमुनानगर से होकर गुजरता है।

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