Lok Sabha Chunav 2024: मेरठ में सपा ने क्यों बदला कैंडिडेट, क्या पीएम मोदी हैं कारण?
Lok Sabha Election UP: समाजवादी पार्टी ने मेरठ लोकसभा सीट पर एडवोकेट भानु प्रताप सिंह को बदलकर सरधना के एमएलए अतुल प्रधान को टिकट दे दिया है। इस सीट पर बीजेपी ने ऐतिहासिक सीरियल 'रामायण' में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को उम्मीदवार बनाया है। मेरठ में 26 अप्रैल को दूसरे चरण में चुनाव है, उससे पहले सपा ने आखिर प्रत्याशी क्यों बदला है?
बीजेपी ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और राम लला के प्राण प्रतिष्ठा के बाद अपने गढ़ मेरठ में अरुण गोविल को क्यों उतारा है, यह बात जगजाहिर है। राम मंदिर बीजेपी के बनने के समय से ही उसका प्रमुख एजेंडा रहा है। अरुण गोविल के साथ खास बात ये है कि मेरठ उनका जन्म स्थान भी है।

मेरठ में सपा ने क्यों बदला कैंडिडेट?
लेकिन, एक दलित प्रत्याशी एडवोकेट भानु प्रताप सिंह को बीच चुनाव में हटाकर एक गुर्जर नेता अतुल प्रधान को टिकट देना अखिलेश यादव की किस रणनीति का हिस्सा है? यह दिलचस्प सवाल है। क्योंकि, दलित चेहरा होने की वजह से सपा के लिए भानु प्रताप एक बेहतर विकल्प माने जा रहे थे। वह ईवीएम हटाओ अभियान और किसान आंदोलन में योगदान की वजह से भी अपनी एक अलग पहचान रखते हैं।
मेरठ में सपा ने अतुल प्रधान को ही क्यों दिया टिकट?
दरअसल, जब बीजेपी ने मेरठ से अरुण गोविल के नाम की घोषणा की तो समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति बदलने का फैसला किया है। तथ्य यह है कि मेरठ एक मुस्लिम आबादी बहुल इलाका है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहां मुसलमानों की आबादी 36% से भी ज्यादा है। मुजफ्फरनगर से सटे होने की वजह से यह सांप्रदायिक तौर पर भी काफी संवेदनशील है।
हिंदुत्व के चेहरा संगीत सोम को हरा चुके हैं प्रधान
अतुल प्रधान समाजवादी पार्टी के ऐसे चेहरे हैं, जिन्होंने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा के दो-बार के चर्चित विधायक संगीत सोम को सरधना की सीट पर हरा दिया था। संगीत सोम इलाके में कट्टर हिंदुत्व के एक प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं और मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपियों में भी शामिल रहे हैं।
एक समय वह बीफ-विरोधी अभियान के भी हिस्सा भी रह चुके हैं। इस तरह से सपा ने भाजपा-विरोधी कट्टर वोटरों पर फोकस करने की रणनीति अपनाई है, जिससे अरुण गोविल की लोकप्रियता पर वोटों से चोट किया जा सके।
कौन हैं अतुल प्रधान?
अतुल प्रधान ने मेरठ के चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से ही छात्र राजनीति से शुरुआत की है। उन्हें पश्चिमी यूपी में अखिलेश यादव का दाहिना हाथ माना जाता है। न्यूज18 हिंदी की एक रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ इलाके में पंचायत से लेकर शहरी निकाय और विधानसभा चुनावों तक में समाजवादी पार्टी उनके परिवार या करीबियों पर ही दांव लगाती रही है।
पीएम मोदी के खिलाफ दे चुके हैं कथित आपत्तिजनक बयान
अतुल प्रधान की पत्नी सीमा सपा के टिकट पर मेयर का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। 2022 में कथित तौर पर प्रधान तब चर्चा में आ गए थे, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक विवादित बयान दिया था। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दरौली थाने के एसएचओ ने कहा था, 'मैंने 32 सेकंड का एक वीडियो देखा है, जिसमें अतुल प्रधान को प्रधानमंत्री के बारे में अशोभनीय टिप्पणियां करते देखा जा सकता है।' उसने इससे माहौल बिगड़ने की भी बात कही थी।
पीएम मोदी तीन बार से मेरठ से ही शुरू कर रहे हैं चुनाव अभियान
दिलचस्प बात ये है कि पीएम मोदी लगातार तीन लोकसभा चुनावों से मेरठ से ही चुनाव अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह इलाका जाट-गुर्जर और दलितों की आबादी के प्रभाव वाला इलाका है और यही वजह है कि भाजपा ने इसे अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया है। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद यह जुगलबंदी भाजपा के पक्ष में काम भी करता आया है।
रविवार को मेरठ में पीएम मोदी की रैली में जुटी भीड़ भी इस बात की गवाही दे चुका है कि वे हर बार चुनाव अभियान की शुरुआत यहीं से करना क्यों पसंद करते हैं। समाजवादी पार्टी ने अतुल प्रधान के माध्यम से बीजेपी की इसी रणनीति को चुनौती देने का दांव चला है।












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