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Lok Sabha Election: सांसद बनने का सपना, स्मार्टफोन की कीमत जितनी नहीं है बैंक बैलेंस, देखें लिस्ट

Lok Sabha Election 2024: उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान चुनाव मैदान में राजनीतिक दलों द्वारा करोड़पति उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए उतारा जा रहा है। इसी बीच आगरा जनपद से कैसे प्रत्याशी भी सांसद बनने का सपना देख रहे हैं जिनके पास स्मार्ट फोन खरीदने भर का बैंक बैलेंस नहीं है।

बेहद कम पैसे में चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे इस प्रत्याशी का फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रत्याशी को देखकर और उनके द्वारा लोकसभा चुनाव लड़ने की बात सुनकर लोग हैरान हैं।

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दरअसल, आगरा जनपद के खेरागढ़ तहसील के रहने वाले हसनुरम अंबेडकरी तीसरे चरण में हो रहे लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव मैदान में हैं। इस लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी द्वारा दिग्गज उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा गया है।

वहीं हसनुराम राम भी निर्दलीय नामांकन कर चुके हैं। हलफनामा में दी गई जानकारी के अनुसार हसनुराम राम के पास बैंक बैलेंस के रूप में महज 16000 रुपए हैं। ऐसे में यदि उनके द्वारा पूरे लोकसभा क्षेत्र में किसी चार पहिया वाहन से भ्रमण किया जाए तो भी रुपए कम पड़ जाएंगे।

वहीं लोगों का कहना है कि मौजूदा समय में यदि कोई भी शख्स एक मीडियम क्वालिटी का स्मार्टफोन खरीदने के लिए बाजार में जाता है तो उसे भी 12 हजार से अधिक रुपए चुकाने पड़ते हैं। ऐसे में मात्र 12000 रुपए में चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हसनुराम चर्चा में बने हैं।

इस बार सब चुनाव लड़ने का सपना हो जाएगा पूरा
हसनुराम का कहना है कि इस बार लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने आगरा लोकसभा सीट और फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से नामांकन किए हैं। उनका कहना है कि अभी तक वह 98 चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार 100 चुनाव हो जाएगा।

वहीं उनसे जो पूछा गया कि चुनाव लड़ने के बारे में आपने क्यों फैसला किया और हर बार क्यों आप चुनाव लड़ते हैं? इस बारे में हसनुरराम द्वारा बताया गया कि साल 1984 में वे अमीन की नौकरी करते थे। इस दौरान बहुजन समाज पार्टी के नेता द्वारा उन्हें टिकट देने की बात कही गई थी।

ऐसे में उन्होंने सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। नौकरी से इस्तीफा देने के बाद चुनाव मैदान में प्रचार शुरू कर दिए लेकिन बाद में बसपा द्वारा उन्हें टिकट नहीं दिया गया। इस बारे में जब उन्होंने पार्टी के तत्कालीन संयोजक से बात की तो संयोजक द्वारा कहा गया कि 'तुम्हें तुम्हारी बीवी भी वोट नहीं देगी।'

इस बात से नाराज होकर हसनुराम ने चुनाव लड़ने का फैसला किया। 1985 के बाद से अब तक वे ग्राम प्रधान, विधानसभा, एमएलए, एमएलसी और लोकसभा का चुनाव लड़ते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह हर बार चुनाव लड़ते हैं और हार जाते हैं इसका उन्हें कोई गम नहीं रहता है।

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